फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Use of Bahubali will start in place of iron barrier in the state

यूपी: प्रदेश में लोहे के बैरियर की जगह शुरू होगा बाहुबल्ली का प्रयोग, दुर्घटना होने पर कर लेगा शॉक एब्जॉर्ब

Thu, 21 Dec 2023 07:07 AM IST
रोहित मिश्र ज्ञान बिहारी मिश्र, अमर उजाला , लखनऊ
ज्ञान बिहारी मिश्र, अमर उजाला , लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 21 Dec 2023 07:07 AM IST
सार

प्रदेश में पहली बार इस बंबू क्रैश बैरियर का इस्तेमाल किया गया है। शहीद पथ पर जहां इसे लगाया गया है वहां आए दिन हादसे होते रहते हैं।

विज्ञापन
UP: Use of Bahubali will start in place of iron barrier in the state
यह नितिन गडकरी की महात्वाकांक्षी योजना है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सड़क हादसों में जान बचाने के लिए बांस के बने क्रैश बैरियर-बाहुबल्ली का प्रयोग प्रदेश में भी शुरू हो गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की ओर से समिट बिल्डिंग के सामने शहीद पथ पर पांच सौ मीटर के दायरे में इसे लगाया गया है। यह स्टील के बैरियर का एक मजबूत विकल्प है। दुर्घटना होने पर यह शॉक एब्जॉर्ब कर लेगा, जिससे वाहन की गति कम हो जाएगी। वहीं वाहन सड़क के नीचे खाई अथवा गड्ढे में नहीं जा सकेंगे।

विज्ञापन


प्रदेश में पहली बार इस बंबू क्रैश बैरियर का इस्तेमाल किया गया है। शहीद पथ पर जहां इसे लगाया गया है वहां आए दिन हादसे होते रहते हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया के मुताबिक सबसे खास बात है कि यह बैरियर ईको फ्रेंडली है। इसमें छत्तीसगढ़ के एक खास प्रजाति के बांस का इस्तेमाल किया गया है। इससे न केवल लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी हो रहा है। अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया गया है। इसके बाद शहीद पथ के अन्य मार्गों व हाईवे पर इसे लगाया जाएगा।
विज्ञापन


मार्च में महाराष्ट्र में लगाया गया था दुनिया का पहला बंबू क्रैश बैरियर
विश्व का पहला बंबू क्रैश बैरियर महाराष्ट्र में इसी साल मार्च में लगाया गया। तब केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था कि चंद्रपुर और यवतमाल जिले को जोड़ने वाले राजमार्ग पर दो सौ मीटर लंबा बांस का क्रैश बैरियर लगाया गया है। उन्होंने इसके प्रयोग से पर्यावरण को नुकसान की चिंता कम होने की बात कही थी। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया था कि स्टील क्रैश बैरियर की जगह बांस का इस्तेमाल एक सही विकल्प है। इसका नाम उन्होंने ही बाहुबल्ली दिया था
विज्ञापन
विज्ञापन


परीक्षण में भी उतरा खरा
नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स इंदौर में बांस क्रैश बैरियर का परीक्षण किया था। यही नहीं, रुड़की में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान में फायर रेटिंग टेस्ट के दौरान भी इसे बेहतर बताया गया था। कठोर परीक्षणों के बाद इसको इंडियन रोड कांग्रेस भी मान्यता प्रदान कर चुका है।


इस बैरियर को बनाने में बंबूसा बालकोआ प्रजाति के बांस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कीड़ों से सुरक्षित रखने वाले तेल-क्रेओसोट का लेप लगाया जाता है। इसके बाद हाई डेंसिटी पॉली एथिलीन की कोटिंग की गई गई है। इस कोटिंग से उच्च तापमान में भी बैरियर को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed