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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Township establishment rules changed, world-class museum to be built in Ayodhya; read the cabinet's major

यूपी: टाउनशिप बसाने के नियमों में बदलाव, अयोध्या में बनेगा विश्वस्तरीय संग्रहालय; पढ़िए कैबिनेट के बड़े फैसले

Tue, 02 Dec 2025 11:04 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 02 Dec 2025 11:04 PM IST
सार

UP Cabinet decision: लखनऊ में योगी कैबिनेट की अहम बैठक हुई। जिसमें अयोध्या में विश्वस्तरीय संग्रालय बनाने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा टाउनशिप बसाने के नियम में बदलाव समेत कुछ अहम फैसले हुए हैं।

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UP: Township establishment rules changed, world-class museum to be built in Ayodhya; read the cabinet's major
योगी कैबिनेट के फैसले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2005 और 2014 के अधीन स्वीकृत और अब तक निष्क्रिय आवासीय परियोजनाओं को निरस्त करने व चालू करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने आवंटियों के हितों को देखते हुए इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में स्वीकृत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में संशोधन करने और परियोजना अवधि में विस्तार की सुविधा दे दी है। अब इस नीति में न्यूनतम 25 एकड़ में टाउनशिप बसाने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। बिल्डर न्यूनतम 12.5 एकड़ भूमि पर अब इस योजना में टाउनशिप बना सकेंगे। 25 एकड़ तक तीन साल और इससे अधिक होने पर पांच साल में टाउनशिप को पूरा करना होगा। इससे इन योजनाओं में आवंटियों को फ्लैट और भूखंड मिलने का रास्ता हो गया है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आवास विभाग द्वारा रखे गए इससे संबंधित नीति के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। बता दें कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2005 और 2014 के तहत बिल्डरों को न्यूतम 25 एकड़ से लेकर 500 एकड़ में टाउनशिप विकसित करने के लिए विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद के माध्यम से लाइसेंस दिया गया था। इस योजना में परियोजनाओं को आठ से लेकर 12 साल में पूरा करना था, लेकिन कई परियोजनाएं पूरी नहीं हो पाई और आवंटियों का पैसा फंस गया।
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आवंटियों के हितों को देखते हुए सरकार ने इस संशोधित नीति में बिल्डरों को बड़ी राहत देते हुए बिल्डरों को कई सहूलियत देने का फैसला किया है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, बिल्डरों अब न्यूनतम 12.5 एकड़ क्षेत्रफल में भी टाउनशिप बसा सकतें हैं। पहले 2005 व 2014 की नीति में न्यूतम 25 एकड़ की भूमि की सीमा अनिवार्य रखा गया था। अब सरकार ने इस सीमा को घटा दिया है। बशर्ते भूमि सीमा घटने के बाद छोड़ी गई भूमि किसी थर्ड पार्टी को नहीं दिया जाएगा। परियोजना क्षेत्र के बाहर 10 प्रतिशत क्षेत्र पर भी विकास की अनुमति दी जाएगी। 

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अयोध्या में अब 52 एकड़ में बनेगा विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय

अयोध्या में प्रस्तावित विश्व स्तरीय मंदिर संग्रहालय अब 52.102 एकड़ में विकसिल किया जाएगा। टाटा संस के सहयोग से बनने वाले इस संग्रहालय के लिए अयोध्या में संस्था को 27.102 एकड़ और भूमि नि:शुल्क दिए जाने को मंगलवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। इससे यह संग्रहालय अब और भव्य क्षेत्र में आकार लेगा साथ ही इसकी कुल लागत 750 करोड़ से और अधिक बढ़ेगी।

पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि टाटा संस के सीएसआर फंड से अयोध्या में एक अत्याधुनिक मंदिर संग्रहालय विकसित करने और उसका संचालन करने की इच्छा जताई थी। इसके लिए कंपनी एक्ट के तहत एक गैर-लाभकारी एसपीवी बनाया जाएगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। परियोजना के लिए भूमि आवंटन को केंद्र, प्रदेश सरकार और टाटा संस के बीच त्रिपक्षीय एमओयू पिछले साल हो चुका है।

उन्होंने बताया कि पूर्व में प्रदेश सरकार ने अयोध्या के मांझा जमथरा गांव में 25 एकड़ नजूल भूमि टाटा संस को 90 साल के लिए लीज पर देने की अनुमति दी थी। टाटा संस ने संग्रहालय की भव्यता के दृष्टिगत अधिक भूमि की अपेक्षा की थी। इस क्रम में अब अतिरिक्त 27.102 एकड़ और भूमि, कुल 52.102 एकड़ भूमि का निःशुल्क हस्तांतरण आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग के पक्ष में किया जाएगा। इससे परियोजना का दायरा और बड़ा होगा।

मंत्री ने कहा कि मंदिर संग्रहालय बनने से अयोध्या को न सिर्फ एक नई सांस्कृतिक पहचान मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और अब ध्वजारोहण समारोह के बाद अयोध्या में पर्यटकों का आगमन काफी बढ़ा है। रोजाना लगभग 2 से 4 लाख पर्यटक अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं। अयोध्या में सांस्कृतिक आकर्षणों को बढाने की दिशा में यह संग्रहालय महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से परियोजना की लागत भी और बढ़ेगी।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 246 करोड़ रुपये की और मंजूरी

कैबिनेट ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के चैनेज (45+980 किमी) पर स्थिति घाघरा पुल के पहुंच तटबंध के क्षतिग्रस्त हिस्से के स्थायी सुरक्षात्मक कार्य कराने के लिए 246.37 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे की संशोधित लागत बढ़कर 7529.66 करोड़ रुपये हो गई है। वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि एक्सप्रेसवे का निर्माण होने से स्थानीय क्षेत्र में तीव्र गति से विकास होगा। यात्रियों को आने-जाने की अच्छी सुविधा मिलेगी।

पसवारा पेपर्स लिमिटेड को 65.67 लाख की प्रतिपूर्ति

कैबिनेट ने मेसर्स पसवारा पेपर्स लिमिटेड मेरठ को एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति के रूप में 65.67 लाख रुपये देने को मंजूरी दे दी है। इससे पहले भी कंपनी को 1.50 करोड़ का भुगतान प्रतिपूर्ति के रूप में हो चुका है। यह सुविधा अवस्थापना एव औद्योगिक निवेश नीति-2012 के तहत दी गई है।

वृंदावन एग्रो को 17 करोड़ के भुगतान को मंजूरी

 कैबिनेट ने औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के तहत दो कंपनियों को धनराशि देने को मंजूरी दे दी है। मेसर्स केआर पल्प एंड पेपर्स लिमिटेड शाहजहांपुर को वर्ष 2021-22 और 2022-23 के लिए 56.39 लाख रुपये दिया जाएगा। ऐसे ही मेसर्स वृंदावन एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड मथुरा को 1 अप्रैल 2023 से 30 सितंबर 2024 तक के लिए 17.06 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खेल व प्रशिक्षण मानी जाएगी ड्यूटी

प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब उनके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंपों और संबंधित गतिविधियों में शामिल होने की पूरी अवधि, आवागमन समय सहित ड्यूटी में मानी जाएगी। मंगलवार को कैबिनेट ने इसके लिए उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली में संशोधन को हरी झंडी दी है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अभी तक अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली-2022 में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। सेवा नियमावली में अवकाश संबंधी प्रावधान न होने के कारण खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने के लिए अनुमति प्रक्रिया में दिक्कत आती थी। अब विभागाध्यक्ष इसकी स्वीकृत दे सकेंगे।

उन्होंने कहा कि अब नियुक्त खिलाड़ी जब भी किसी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता, कैंप या प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे, वह अवधि सेवा अवधि (ड्यूटी) मानी जाएगी। इसमें आने-जाने का पूरा समय भी शामिल होगा। इससे न केवल खिलाड़ियों को अपने कॅरियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि राज्य का प्रतिनिधित्व भी और मजबूत होगा। क्योंकि अब उन्हें इसके लिए अनुमति लेने में कोई बाधा नहीं आएगी।

अभी तक इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। क्योंकि भर्ती, सेवा नियमावली में अवकाश संबंधी व्यवस्था नहीं रखी जाती है। इससे संबंधित खिलाड़ियों को अनुमति लेने में समस्या होती है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने यह आवश्यक बदलाव किया है। जो खिलाड़ियों को और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा।

सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम का संचालन अब साई को

प्रदेश कैबिनेट ने वाराणसी में निर्माणाधीन डॉ. सम्पूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा के संचालन, प्रबंधन और रखरखाव तथा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए ‘भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ हुए एमओयू को मंजूरी दे दी है। यहां खेलो इंडिया योजना के तहत आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है।

एमओयू के तहत स्टेडियम परिसर में मौजूद खेल सुविधाओं, भवन, ढांचा, मैदान आदि अवसंरचनाओं को साई को दिया जाएगा। ताकि यहां नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना और संचालन सुचारु रूप से हो सके। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनने के बाद प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिलेगा।

उन्होंने बताया कि विभिन्न आयु वर्गों और खेल विधाओं के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान की जाएगी। उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न सिर्फ प्रदेश की खेल प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व और सशक्त होगा। इस पहल से खिलाड़ियों को भविष्य में रोजगार और खेल कॅरियर दोनों की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही वाराणसी देश के प्रमुख खेल केंद्रों में से एक के रूप में उभरकर सामने आएगा।

कानपुर के सिविल लाइन में बनेगा मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल

कानपुर के सिविल लाइन में मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए सरकार ने जार्जिना मैकराबर्ट मेमोरियल हॉस्पिटल की खाली पड़ी नजूल की 45000 वर्ग मीटर भूमि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को देने का फैसला किया है। आवास विभाग के इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस हॉस्पिटल का निर्माण पीपीपी मोड पर कराया जाना है। प्रस्ताव के मुताबिक इस मामले का न्यायालय के निस्तारण होने के बाद सरकार ने इस जमीन को मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने के लिए देने का फैसला किया है। यह जमीन कानपुर विकास प्राधिकरण को निशुल्क दी जाएगी। 

अब हर मंडल मुख्यालय पर होगा दिव्यांग पुनर्वास केंद्र

कैबिनेट ने प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की स्थापना और संचालन राज्य सरकार के संसाधनों से करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। वर्तमान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय सिर्फ 37 जिलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र चला रहा है। इनमें से 11 ही मंडल मुख्यालयों पर हैं। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बताया कि यह नई व्यवस्था दिव्यांगजनों के लिए दी जाने वाली सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाएगी। नए केंद्रों में दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ एक ही छत के नीचे प्राप्त कर सकेंगे। परामर्श, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसी आवश्यक सेवाएं भी मिलेंगी। 

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