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UP: असुरक्षा महसूस होने पर रोजाना तीन महिलाओं ने मांगी मदद...पीआरवी ने एस्कॉर्ट कर पहुंचाया घर; जानें कैसे

Sat, 03 Jan 2026 03:08 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 03 Jan 2026 03:08 PM IST
सार

यूपी-112 की महिला सुरक्षा सेवा के तहत वर्ष 2025 में 1120 महिलाओं को पुलिस ने सुरक्षित घर तक पहुंचाया। रोजाना औसतन तीन महिलाओं ने एस्कॉर्ट की मदद ली। बीते पांच वर्षों में पीआरवी का रेस्पांस टाइम आधा हो गया है। 

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UP: Three women sought help daily after feeling unsafe...PRV (Police Response Vehicle) escorted them home; fin
यूपी-112 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अगर आप (महिला) रात में घर से बाहर हैं। घर तक जाने में असुरक्षा महसूस हो रही तो आप निश्चित होकर यूपी-112 पर कॉल करिए। पुलिस की पीआरवी आएगी और आपको घर तक सुरक्षित पहुंचाएगी। इस तरह प्रदेश में पिछले साल रोजाना करीब तीन महिलाओं ने पुलिस की इस सुविधा का लाभ लिया। एक कॉल पर पुलिसकर्मी पहुंचे और उनको गंतव्य तक पहुंचाया।

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यूपी-112 के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष-2025 में कुल 1120 महिलाओं को पीआरवी से एस्कॉर्ट कर उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। यूपी-112 की एडीजी नीरा रावत ने बताया कि यूपी पुलिस की ये योजना काफी समय से चल रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी महिला या युवती एस्कॉर्ट के लिए इमरजेंसी नंबर पर कॉल कर सकती है। इसके लिए झिझकने की जरूरत नहीं है। यूपी पुलिस उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उसको घर तक पहुंचाएगी।

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पांच साल में आधा हुआ रेस्पांस टाइम

वर्ष 2020 में सूचना पर पीआरवी के पहुंचने का औसत टाइम 12 मिनट 34 सेकेंड था। जो अब 2025 में 6 मिनट 51 सेकेंड हो गया है। मतलब किसी घटना की सूचना पर पांच साल पहले जितने समय मे पुलिस मौके पर पहुंचती थी अब उसके आधे समय में पहुंच रही है। बीते वर्ष प्रतिदिन 34 हजार 124 कॉल आपात सहायता के लिए कंट्रोल रूम में पहुंची। कुल 3 करोड़ 10 लाख 87 हजार 583 कॉल अटेंड की गईं।

पशु-पक्षियों का बचाया जीवन, बच्चों की मदद की

लोगों की मदद करने के साथ साथ पीआरवी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पशु-पक्षियों का भी जीवन बचाया। ऐसे 91,436 मामले सामने आए जिसमें पशु-पक्षी संबंधी रेस्क्यू आदि करना था। इस काम को पुलिसकर्मियों ने बखूबी किया। वहीं 14,422 गुमशुदा बच्चों की भी मदद की गई।
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