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यूपी : रुक-रुक कर होगी बरसात, लगातार के लिए करें इंतजार, 25 को भारी बारिश के आसार

Sat, 24 Jul 2021 03:18 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 24 Jul 2021 03:18 PM IST
सार

झमाझम बारिश का इंतजार लोगों के लिए भारी पड़ता जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि कहीं ज्यादा तो कहीं बरसात होती रहेगी। वहीं लगातार बरसात के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।

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UP: There will be intermittent rain, wait for continuous, heavy rain expected on 25

विस्तार

झमाझम बारिश का इंतजार लोगों के लिए भारी पड़ता जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि कहीं ज्यादा तो कहीं बरसात होती रहेगी। वहीं लगातार बरसात के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। 

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जिन जिलों में रविवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, उसमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, ज्योतिबाफुलेनगर, गौतमबुद्दनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद, बलरामपुर, खीरी, पीलीभीत, बरेली, रामपुर व आसपास के इलाके शामिल हैं।
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मौसम के बदलावों पर वैज्ञानिकों की नजर, जारी है अध्ययन
वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएम नौटियाल कहते हैं कि इस वर्ष भारत में लगभग सामान्य (101%) वर्षा का पूर्वानुमान था। केरल में 3 जून को मानसून का आगमन हल्की देर से था लेकिन अंडमान- निकोबार में थोड़ा पहले।  वैसे मानसून कैसा है, यह कुल मिला कर कितनी वर्षा हुई उसके आधार पर तय होगा, न कि किसी एक शहर या अंचल में हुई वर्षा के आधार पर।  देश में 19 जुलाई तक तो लगभग 58% ज़िलों में तो सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा हुई। 
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उत्तर भारत के 287 ज़िलों में , जिनमें उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली भी है, सामान्य से कम वर्षा हुई। इसके दो कारण समझे जा रहे हैं। एक तो बंगाल की खाड़ी में कम दबाव ( ट्रफ) के क्षेत्र के बनने में देरी तथा दिल्ली के समीप भूतल पर ऐसे ही निम्न दाब क्षेत्र की अनुपस्थिति। इनके कारण मानसून आगे बढ़ नहीं पाया। एक और कारण था पश्चिम से उत्तर भारत में आने वाली हवाएं जिन्होंने उत्तर भारत मे पूर्व से आने वाली हवाओं को अप्रभावी कर दिया।


वैसे अपेक्षा है कि 26 जुलाई के आसपास दिल्ली एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और वर्षा होगी। कम वर्षा के पीछे कारण ला नीन्याँ नहीं है; उसके कारण तो इस वर्ष भारत मे अन्य वर्षों से अधिक आर्द्रता अपेक्षित थी। ला नीन्याँ की घटना एल निन्यों की उल्टी होती है। एल नीन्याँ में पेरू, इक्वेडोर आदि में कम लेकिन ऑस्ट्रेलिया, भारत मे अधिक वर्षा होती है।

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