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यूपी : निकायों में संपत्ति कर के डाटा में हेराफेरी पर लगेगी लगाम, ई नगर सेवा और स्टांप विभाग से एकीकृत किया जाएगा डाटा
Tue, 05 Apr 2022 08:55 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 05 Apr 2022 08:55 PM IST
सार
अब तक नगर निकायों में संपत्ति कर से संबंधित आंकड़ों का डाटा मैनुअल ही रखने की व्यवस्था है। इससे किसी संपत्ति के मूल्यांकन में खूब खेल होता है।
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विस्तार
नगर निकाय में संपत्ति कर से संबंधित डाटा में हेराफेरी कर लाखों की कमाई करने वाले राजस्व अधिकारियों के खेल पर अब लगाम लगेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत डाटा को ई नगर सेवा और स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग से एकीकृत किया जाएगा। ऐसा होने के बाद डाटा में कोई मैनुअल हस्तक्षेप नहीं किया जा सकेगा। साथ ही पंजीकृत संपत्ति का पूरा ब्योरा शासन से लेकर निकाय के अधिकारियों को ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा। इससे निचले स्तर के अधिकारी डाटा में किसी प्रकार से छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे।
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अब तक नगर निकायों में संपत्ति कर से संबंधित आंकड़ों का डाटा मैनुअल ही रखने की व्यवस्था है। इससे किसी संपत्ति के मूल्यांकन में खूब खेल होता है। कर निर्धारण से जुड़े कर्मचारी अधिकारियों से मिलीभगत करके किसी भी संपत्ति के कर का निर्धारण कम या अधिक कर देते हैं। इससे वे जहां अवैध कमाई करते हैं, वहीं निकायों को सालाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। लेकिन अब संपत्ति कर के निर्धारण की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का फैसला किया गया है।
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अपर मुख्य सचिव नगर विकास डॉ. रजनीश दुबे ने पिछले दिनों अधिकारियों को संपत्ति कर के डाटा को स्टांप एवं पंजीयन विभाग के पोर्टल से एकीकृत करने के निर्देश दिए थे। ताकि एक पोर्टल पर संपत्तियों से संबंधित पूरा ब्योरा उपलब्ध होने से सतत निगरानी हो सके। इसके अलावा शासन ने एक ऐसी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यह प्रावधान होगा कि निबंधन कार्यालय में संपत्ति की रजिस्ट्री होने के साथ नामांतरण से संबंधित प्रारूप भी पोर्टल पर दिखने लगे। यानि रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसके लिए अलग से आवेदन न करना पड़े।
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विज्ञापन व साइनेज के आवेदन भी होंगे ऑनलाइन
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नगर निकायों द्वारा साइनेज व विज्ञापन के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी। इस व्यवस्था को तत्काल लागू करने की तैयारी है। इसके लिए साइनेज व विज्ञापन लगाने के स्थान की सूची और फीस का विवरण पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। ताकि आवेदन करते समय आवेदक को इसकी जानकारी के लिए भटकना न पड़े। लाइसेंस सिर्फ ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे।