यूपी: प्रदेश भाजपा की नई टीम सवालों के दायरे में, नई टीम में जो लोग चुने गए वह गैरप्रभावी; सिफारिश रही हावी
UP BJP organization: भाजपा प्रदेश संगठन की नई टीम तैयार करने में कई मानक गढ़ने का खूब प्रचार किया गया था। इसी मानक के तहत नाम चयन पर तीन-चार महीने लखनऊ से दिल्ली तक कई बार बैठक भी हुई।
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प्रदेश भाजपा संगठन ने नई टीम के बल पर भले ही मिशन 2027 फतह करने की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन टीम में शामिल कई नामों पर पार्टी के अंदरखाने सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सियासी गलियारों में भी यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि जब बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा करने वाले चहेतों और सिफारिश के आधार पर ही नाम शामिल होने थे तो टीम चयन के लिए मानक का ढिंढोरा क्यों पीटा गया?
सबसे अधिक चर्चा टीम में शामिल विधान परिषद सदस्यों को लेकर है। कहा जा रहा है कि जब तय हुआ था कि इस बार टीम गठन में उन सभी पदाधिकारियों को हटाया जाएगा जो सांसद, विधायक और एमएलसी बन गए हैं तो फिर चार विधान परिषद सदस्यों सत्यपाल सैनी, मोहित बेनीवाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह और विजय शिवहरे को किस मानक पर टीम में शामिल किया गया है? सवाल यह भी उठ रहा है कि इन चार माननीयों को किसकी सिफारिश पर संगठन में दोबारा मौका दिया गया?
दरअसल, भाजपा प्रदेश संगठन की नई टीम तैयार करने में कई मानक गढ़ने का खूब प्रचार किया गया था। इसी मानक के तहत नाम चयन पर तीन-चार महीने लखनऊ से दिल्ली तक कई बार बैठक भी हुई। तय हुआ था जो पदाधिकारी सांसद, विधायक बन गए हैं उनको संगठन से मुक्त कर अन्य जिम्मेदारी दी जाएगी। इस मानक का कुछ हद तक तो पालन हुआ, लेकिन चहेते और सिफारिशी एमएलसी को दोबारा संगठन में पद देने के दोहरे मानक से सवाल उठने लगे हैं। सियासी विश्लेषकों का कहना है कि नई टीम में न मानक की झलक दिख रही है और न ही कोई ऐसा चेहरा है जो चुनाव में अपना प्रभाव दिखा सके।
बुंदेलखंड से कोई ब्राह्मण चेहरा नहीं
मुख्य टीम के अलावा मोर्चों में हुईं नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में हैं। खासतौर पर युवा मोर्चे की टीम के चेहरे पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि चुनावी साल में भाजपा काडर के पुराने राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रांशु दत्त द्विवेदी को हटाकर एक अनुभवहीन व्यक्ति को युवा मोर्चा की कमान सौंपना भी समझ से परे है। देखा जाए तो प्रांशु को हटाने से नई टीम में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र से कोई प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरा नहीं रह गया है।
भूपेंद्र की टीम में 15 माननीयों को मिला था पद
भूपेंद्र चौधरी की मुख्य टीम में एक राज्यसभा सांसद को मिलाकर कुल 15 विधायक व एमएलसी को उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री बनाया गया था। नई टीम में इनमें से राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्या के अलावा विधायक पंकज सिंह, एमएलसी विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, सलिल विश्नोई, मानवेंद्र सिंह, पद्मसेन चौधरी, गोविंद नारायण शुक्ला, अनूप गुप्ता, सुभाष यदुवंश और सुरेश पासी को तो संगठन से मुक्त कर दिया। पर, सत्यपाल सैनी, मोहित बेनीवाल, डॉ. धर्मेंद्र सिंह और विजय शिवहरे को दोबारा टीम में स्थान दिया गया है।