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यूपी: जारी है लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के धंसने का सिलसिला, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम फेल; तोड़ी जा रही एजिंग
Mon, 17 Aug 2026 12:43 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ/कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ/कानपुर
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 17 Aug 2026 12:43 PM IST
सार
Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ की तरफ दो स्थानों पर एक्सप्रेसवे दबा है। यहां लखनऊ से कानपुर की लेन पर किमी संख्या 31.5 सहरावां नहर पुल के ऊपर की स्लैब पर डामर-गिट्टी की परत पहली ही बारिश में उखड़ गई है।
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लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। लोकार्पण के 13वें दिन से ही धंसनी और टूटनी शुरू हुई 4200 करोड़ की सड़क की अलग-अलग स्थानों पर लगातार 23वें दिन भी मरम्मत जारी रही। हालत यह है कि 24 किमी लंबे ग्रीन फील्ड क्षेत्र (उन्नाव से बनी) की लगभग 80 प्रतिशत सड़क में मरम्मत और पैचिंग होने के बाद भी, हल्की बारिश में ही नई समस्या हो जाती है। रविवार अलग-अलग चार स्थानों पर सड़क उखड़ने और दबने पर निर्माण एजेंसी ने यहां भी मरम्मत शुरू कराई। इनमें दो जगह लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन खराब हुई है।
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कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर आजाद मार्ग टोल प्लाजा की तरफ किमी संख्या 62 पर कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर अड़ेरुआ गांव के रविवार को तीस मीटर सड़क जगह-जगह धंसने से उसकी ऊपरी परत को उखाड़ को दोबारा बनने का काम शुरू किया गया। 62.5 पर भी सड़क दबनी शुरू हो गई है। इसी लेन पर नेवरना गांव के पास किमी संख्या 58 से 59 पर 100 मीटर सड़क इतनी धंस गई कि यहां पहुंचते ही वाहन लहराने लगते हैं। वाहन चालक किसी तरह रफ्तार को नियंत्रित कर निकल रहे हैं। इस सौ मीटर में नाली (व्हील ट्रैक) बन गईं हैं। मरम्मत करा रहे इंजीनियर का कहना है कि पानी सड़क के अंदर जाने से नीचे की मिट्टी और गिट्टी गीली होने से सड़क कमजोर होने और वाहन निकलने से दब रही है। इसी लेन पर किमी संख्या 49 पर भटखेरवा गांव के पास पचास मीटर धंसी है और किमी संख्या 49 पर लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन के 50 मीटर हिस्से में सड़क को उखाड़ कर दोबारा बनाया जा रहा है।
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लखनऊ की तरफ दो स्थानों पर एक्सप्रेसवे दबा है। यहां लखनऊ से कानपुर की लेन पर किमी संख्या 31.5 सहरावां नहर पुल के ऊपर की स्लैब पर डामर-गिट्टी की परत (विटुमिन) पहली ही बारिश में उखड़ गई है। गिट्टी फैलने से वाहनों के लिए खतरे को देखते हुए इसकी मरम्मत शुरू कराई गई है। यहां पर दो लेन को बंद करके एक हाईस्पीड लेन से वाहनों को निकाला जा रहा है। वहीं किमी संख्या 53.6 पर बाबाखेड़ा अंडरपास ज्वाइंट के पास सड़क दबने से डिवाइडर तिरछा हो गया और उसमें दरार हो गई है और गड्ढा होने से पानी भरने लगा है। हालांकि जेई का कहना है कि डिवाइडर पर कंक्रीट बोल्डर लगाए गए हैं, वह टूटा नहीं है, केवल जोड़ खुल गया है।
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आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम फेल, तोड़ी जा रही एजिंग
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस।
एक्सप्रेसवे के अत्याधुनिक तकनीक से बनाने के दावे खोखले साबित हो गए हैं। लोकार्पण के 12 दिन बाद ही एक्सप्रेसवे ने दम तोड़ दिया। सूत्रों के मुताबिक आईआईटी की टीमों ने अभी तक की जांच में जो निष्कर्ष निकाला है उसके मुताबिक एक्सप्रेसवे की दुर्दशा के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार जल निकासी की तकनीक का फेल होना है। जलभराव होने से सड़क टूटने का सिलसिला जारी है। निर्माण एजेंसी ने अब सेफ्टी ग्रिल के पिलर को छोड़कर पूरे हिस्से की कंक्रीट एजिंग को तोड़ा जा रहा है ताकि पानी बिना रुके निकल जाए। 45 किमी हिस्से में यही तरीका अपनाया जाएगा।
अब ग्रीन फील्ड हिस्से में सड़क पटरी को किया जा रहा पक्का
एक्सप्रेसवे के धंसने में इसकी सड़क के दोनों तरफ कच्चा फुटपाथ भी बड़ी वजह है। मालूम हो कि एनएचएआई ने फुटपाथ को हार्वेस्टिंग सिस्टम तकनीक से बनाने का दावा किया था। हालांकि सड़क धंसने के मामले में पिछले दिनों जांच करने आए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकनीकी सदस्य आलोक दीपांकर ने जांच की तो जलनिकासी चौपट मिली अब एक्सप्रेसवे के 45 किमी लंबे ग्रीन फील्ड हिस्से में दोनों तरफ के फुटपाथ पर सीमेंट और कंक्रीट डालकर उसे मशीन से बराबर कराया जा रहा है ताकि पानी न रुके।
ठेकेदारों की है चूक
एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है। सड़क धंसने के पीछे कुछ तकनीक में गड़बड़ी तो कुछ जगह ठेकेदारों की चूक हुई है। इसमें सुधार किया जा रहा है। नालियों को ठीक कराने के साथ ही फुटपाथ को भी पक्का किया जा रहा है। सड़क जहां भी दब रही है उसे उखाड़ कर नया बनाया जा रहा है।- सत्य नारायण, मैनेजर निर्माण एजेंसी पीएनसी
अब ग्रीन फील्ड हिस्से में सड़क पटरी को किया जा रहा पक्का
एक्सप्रेसवे के धंसने में इसकी सड़क के दोनों तरफ कच्चा फुटपाथ भी बड़ी वजह है। मालूम हो कि एनएचएआई ने फुटपाथ को हार्वेस्टिंग सिस्टम तकनीक से बनाने का दावा किया था। हालांकि सड़क धंसने के मामले में पिछले दिनों जांच करने आए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के तकनीकी सदस्य आलोक दीपांकर ने जांच की तो जलनिकासी चौपट मिली अब एक्सप्रेसवे के 45 किमी लंबे ग्रीन फील्ड हिस्से में दोनों तरफ के फुटपाथ पर सीमेंट और कंक्रीट डालकर उसे मशीन से बराबर कराया जा रहा है ताकि पानी न रुके।
ठेकेदारों की है चूक
एक्सप्रेसवे को यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित किया जा रहा है। सड़क धंसने के पीछे कुछ तकनीक में गड़बड़ी तो कुछ जगह ठेकेदारों की चूक हुई है। इसमें सुधार किया जा रहा है। नालियों को ठीक कराने के साथ ही फुटपाथ को भी पक्का किया जा रहा है। सड़क जहां भी दब रही है उसे उखाड़ कर नया बनाया जा रहा है।- सत्य नारायण, मैनेजर निर्माण एजेंसी पीएनसी