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यूपी: माध्यमिक एडेड कॉलेजों में 2014 के बाद तैनात शिक्षक को सामूहिक बीमा का लाभ नहीं, नियमावली हुई संशोधित

Tue, 19 Dec 2023 06:55 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 19 Dec 2023 06:55 AM IST
सार

एलआईसी की ओर से इस योजना को बंद किए जाने के बाद भी कुछ समय तक (2015-16 में) बीमा के लिए कटौती की गई, फिर बंद कर दी गई। शिक्षक-कर्मचारियों को यह राशि भी अभी तक वापस नहीं मिल पाई है।

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UP: Teachers posted in aided colleges after 2014 do not get the benefit of group insurance
शिक्षक इस मुद्दे पर लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में 31 मार्च 2014 के बाद नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों को अनिवार्य जीवन बीमा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। शासन ने एडेड कॉलेजों के कर्मचारियों के लिए लाभत्रयी नियमावली में संशोधन संबंधित आदेश जारी किया है। इससे प्रदेश भर के 4500 से अधिक एडेड कॉलेजों के 10 हजार से अधिक शिक्षक-कर्मचारी प्रभावित होंगे।

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जानकारी के मुताबिक पूर्व में तैनात शिक्षक-कर्मचारियों का एलआईसी से ग्रुप इंश्योरेंस कराया गया था। इसमें 84 रुपये से लेकर 175 रुपये तक अलग-अलग पे-स्केल के अनुसार इंश्योरेंस का पैसा शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन से कटता था। कुछ साल पहले एलआईसी की ओर से इस योजना को बंद कर दिया गया। ऐसे में पहले से योजना में पंजीकृत कर्मचारियों को तो इसका लाभ मिल रहा है, लेकिन 31 मार्च 2014 के बाद तैनात शिक्षक-कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
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एलआईसी की ओर से इस योजना को बंद किए जाने के बाद भी कुछ समय तक (2015-16 में) बीमा के लिए कटौती की गई, फिर बंद कर दी गई। शिक्षक-कर्मचारियों को यह राशि भी अभी तक वापस नहीं मिल पाई है। हाल ही में माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 31 मार्च 2014 के बाद नियुक्त सहायता प्राप्त शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं के शिक्षक-कर्मचारी अनिवार्य बीमा योजना से आच्छादित नहीं माने जाएंगे।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि यह कर्मचारियों को पेंशन, सामूहिक बीमा से वंचित रखने का षड़यंत्र है। तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक राजमणि सिंह ने कहा है कि हाल ही में शासन ने सालों से काम कर रहे 2000 से अधिक शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया था। अभी तक उनका पुराना बकाया वेतन भी नहीं जारी किया गया है। ऐसे में अब यह निर्णय उनके साथ अन्यायपूर्ण है। हर शिक्षक-कर्मचारी के लिए बीमा और पेंशन अनिवार्य होनी चाहिए। इसके लिए आगे लड़ाई लड़ी जाएगी।


तदर्थ शिक्षकों की मौलिक नियुक्ति तिथि तय
अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा है कि ऐसे शिक्षक जो तदर्थ/अल्पकालिक खाली पदों पर नियुक्त हुए। बाद में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम के तहत नियमित हुए हैं। उनकी सेवा मौलिक नियुक्ति की तिथि 22 मार्च 2016 से ही अर्हकारी सेवा के रूप में गिनी जाएगी।

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