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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Tawde bans the display of hoardings, posters, and banners for welcome events; says strength should be demo

यूपी: स्वागत में होर्डिंग-पोस्टर, बैनर लगाने पर तावड़े ने लगाई रोक; बोले- सड़क पर नहीं, बूथ पर दिखाएं ताकत

Fri, 04 Sep 2026 11:58 AM IST
Akash Dwivedi सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 04 Sep 2026 11:58 AM IST
सार

भाजपा के प्रदेश प्रभारी ने अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान स्वागत में होर्डिंग, पोस्टर और बैनर लगाने तथा सड़क पर भीड़ जुटाने से कार्यकर्ताओं को रोक दिया है। उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। दौरे में संगठन, जनप्रतिनिधियों के समन्वय और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा होगी।

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UP: Tawde bans the display of hoardings, posters, and banners for welcome events; says strength should be demo
बैनर लगाने पर तावड़े ने लगाई रोक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में ताजपोशी के बाद पहली बार राजधानी आए पदाधिकारियों के स्वागत में जिस तरह से होर्डिंग-पोस्टर लगाए गए थे स्वागत में उमड़ी भीड़ की वजह से यातायात व्यवस्था चरमराई थी, उसपर केंद्रीय नेतृत्व की नजरे टेढ़ी हैं। 

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इसलिए ही 5-6 सितंबर को अपने पहले अधिकारिक दौरे पर यूपी आ रहे पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने राजधानी आने पर होर्डिंग, पोस्टर बैनर न लगाने के निर्देश दिए हैं। स्वागत में होर्डिंग-पोस्टर और सड़क पर भीड़ जुटाने से कार्यकर्ताओं को दूर रहने का संदेश तावड़े ने देकर साफ कर दिया है कि इस बार शक्ति प्रदर्शन का पैमाना सड़कों की भीड़ नहीं, बल्कि बूथ पर संगठन की सक्रियता होगी।
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सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी ने कार्यकर्ताओं को सड़क पर भीड़ न जुटाने और स्वागत में होर्डिंग-पोस्टर से परहेज की सख्त हिदायत दी है। माना जा रहा है कि तावड़े ने प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अपने स्वागत से परहेज करने की हिदायत से साफ है कि प्रभारी के दौरे को राजनीतिक चमक-दमक का मंच बनाने की बजाय इसे संगठन की तैयारियों की समीक्षा के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जाए। 

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पिछले चुनावी दौर में विपक्ष ने सेंध लगाई

दरअसल तावड़े का यह रुख महज सादगी का संदेश नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के सामने विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के साथ ही उन इलाकों में संगठन को फिर सक्रिय करने की चुनौती है, जहां पिछले चुनावी दौर में विपक्ष ने सेंध लगाई है।

दिवसीय यूपी के प्रवास पर आ रहे तावड़े प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में बूथ स्तर की सक्रियता, संगठनात्मक समन्वय और चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी करेंगे। इससे साफ है कि तावड़े प्रदेश संगठन से हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की ताकत और कमजोरी का कागज से ज्यादा जमीनी हकीकत के आधार पर हिसाब-किताब लेंगे। तावड़े के निर्देशों में पोस्टर और स्वागत से दूरी का राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण है।

तावड़े की बैठक में प्रदेश संगठन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जिस क्षेत्र में संगठन कमजोर है, वहां जिम्मेदार पदाधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने के लिए नए लक्ष्य तय हो सकते हैं। इस लिहाज से पांच और छह सितंबर का लखनऊ प्रवास भाजपा के लिए पोस्टर और स्वागत का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिशन-2027 की चुनावी प्रयोगशाला जैसा होगा। संदेश साफ है- सड़क पर ताकत दिखाने से ज्यादा जरूरी है कि चुनाव के दिन बूथ पर पार्टी की ताकत दिखाई दे।

बूथ पर पकड़ मजबूत करने की तैयारी

तावड़े के दौरे का सबसे अहम राजनीतिक पहलू मिशन-2027 को लेकर संगठन की जमीनी स्थिति की पड़ताल है। विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा ने बूथ स्तर पर अपनी तैयारियां तेज करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बैठकों में बूथ समितियों की सक्रियता, पन्ना स्तर तक कार्यकर्ताओं की भूमिका, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल तथा कमजोर क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति पर चर्चा होगी।

शक्ति प्रदर्शन की बजाय काम का हिसाब

तावड़े के निर्देशों को भाजपा के भीतर बदलती कार्यशैली के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। आम तौर पर बड़े नेताओं के दौरे पर कार्यकर्ता होर्डिंग-पोस्टर लगाने और सड़क पर भीड़ जुटाने में सक्रिय रहते हैं। इससे जहां शक्ति प्रदर्शन का संदेश जाता है, वहीं यातायात और आम लोगों की परेशानी का मुद्दा भी उठता है। तावड़े ने इससे दूरी बनाकर संगठनात्मक काम को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।

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