UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर SC सख्त, कहा- SIT में चार्टर्ड अकाउंटेंट और फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करें
राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने जांच को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल में चार्टर्ड अकाउंटेंट और फोरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए प्रगति रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
विस्तार
श्री राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय लेनदेन और चढ़ावे से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच हो सके।
सुनवाई के दौरान CJI ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल अदालत का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, SIT अपना काम करे, अभी हमारा ध्यान अच्छी जांच पर है। बाकी विषयों पर बाद में विचार किया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि विस्तारित SIT अपनी जांच आगे बढ़ाए और निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
#WATCH | Delhi: Petitioner and advocate Ajay Rai says, "Today, the state government informed the Supreme Court that a special investigation team consisting of higher police officers of the state has been constituted. The new SIT has already taken over the investigation. The court… https://t.co/5zzcdSPIiC pic.twitter.com/d9JSgft0Uu
— ANI (@ANI) July 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच में पेशेवर वित्तीय विशेषज्ञों की भागीदारी से तथ्यों का सही आकलन हो सकेगा और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसका स्पष्ट खुलासा सामने आएगा। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है, तब तक SIT से प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का दिया निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा, ''लोगों ने 500 रुपये और 1000 रुपये दिए हैं। आखिर में पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है। ट्रस्ट को जो भी राशि मिली है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जा सकता है ताकि लोगों को पता चले कि उनका पैसा ट्रस्ट तक पहुंच गया है। यह कोई विवादात्मक मामला नहीं है।''
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं। सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कुछ कदमों को आप नोट कर सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी होगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''अभी आप सभी मुद्दों को नोट कर लें। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान जांच पर है। हमें शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण जांच करनी होगी। हम एसआईटी को दो हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दे रहे हैं। बाकी का फैसला हम बाद में करेंगे।''
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा था- अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं?
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, "जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।" साथ ही अदालत ने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि "अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।" सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि उसके पहले के निर्देशों का पालन करते हुए सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।