यूपी : विधानमंडल में अनुपूरक बजट व लेखानुदान पारित, कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए
प्रदेश सरकार द्वारा पेश 8479.53 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट व 2022-23 के चार महीने के लिए 1,68,903.24 करोड़ रुपये का लेखानुदान ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसी के साथ सत्रहवीं विधानसभा का अंतिम सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
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विधामंडल के दोनों सदनों में शुक्रवार को प्रदेश सरकार द्वारा पेश 8479.53 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट व 2022-23 के चार महीने के लिए 1,68,903.24 करोड़ रुपये का लेखानुदान ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसी के साथ सत्रहवीं विधानसभा का अंतिम सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के अंतिम दिन अनुपूरक बजट पर नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने चर्चा की। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री के प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के स्थगित करने की घोषणा की। सत्र की समाप्ति पर विधानसभा अध्यक्ष सभी विधायकों और विधानसभा के अधिकारियों को धन्यवाद दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि इस सत्र में अनुपूरक बजट पारित करने के अलावा कुल 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।। सदन की कुल कार्यवाही 11 घंटा 27 मिनट चली। सदन के पहले दिन विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष वर्तमान विधायक सुखदेव राजभर और सीडीएस जनरल बिपिन रावत एवं उनके सहयोगियों की असामायिक निधन पर भावभीनी श्रद्वांजलि दी गयी। उन्होंने बताया कि तीन दिन के सत्र में 1 अल्पसूचित प्रश्न, 91 तारांकित प्रश्न और 235 अतारांकित प्रश्न प्राप्त हुए। इनमें से कुल 26 प्रश्नों का जवाब आया। इसी प्रकार नियम -51 के अंतर्गत 124, नियम-301 के अंतर्गत 78, और नियम-56 के अंतर्गत 17 सूचनाएं और 171 याचिकाएं सदन में प्रस्तुत की गईं। विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष सहित सभी दलीय नेताओं को सदन के संचालन में सहयोग देने, संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा सदन के संचालन में सरकार का पक्ष रखने और सभी सदस्यों के साथ सहयोगात्मक दृष्टि रखने के लिए आभार व्यक्त किया।
विधान परिषद में 10 विधेयक पास
सपा सदस्य संजय लाठर के विरोध के बीच विधान परिषद में कुल 10 विधेयक पास हुए। इनमें से दो धन विधेयक हैं। विधानभा में ये पहले ही पास हो चुके थे।
- उत्तर प्रदेश माल और सेवाकर अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2021
- औद्योगिक शांति (मजदूरी का यथा समय संदाय)(संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश राज्य क्रीड़ा विवि (संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश चतुर्थ निरसन विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश विनियोग (2021-22 का द्वितीय अनुपूरक) विधेयक, 2021
- उत्तर प्रदेश विनियोग (लेखानुदान) विधेयक, 2021
आरक्षण और निजी मंडियों के मुद्दे पर सपा का वाक आउट
विधान परिषद में सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को कई मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण में गड़बड़ियों और निजी मंडियों से किसानों के बदहाल होने का आरोप लगाते हुए सपा सदस्यों ने सदन से वॉक आउट किया। सत्ता पक्ष ने उनके आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सही बात विपक्ष सुनना ही नहीं चाहता है।
सपा के सदस्यों ने दोनों मुद्दे कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाए। बासुदेव यादव ने कहा कि 69 हजार और 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। सपा के राजपाल कश्यप और राजेश यादव ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तक ने आरक्षण नियमों की अनदेखी की बात कही है। सपा के संजय लाठर और शशांक यादव ने रद्द किए गए नए कृषि कानूनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यूपी ने विधानमंडल में प्रस्ताव लाकर इन्हें अपनाया। इसलिए इन्हें रद्द भी विधेयक लाकर किया जाना चाहिए। उन्होंने निजी मंडियों और उप मंडियों की व्यवस्था को किसानों के खिलाफ बताया।
नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार ने 4.5 लाख से अधिक भर्तियां पूरी पारदर्शिता के साथ की हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में पूरी तरह से आरक्षण नियमों का पालन किया गया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि तीनों कृषि कानूनों को केंद्र के वापस लेने के बाद प्रदेश में कार्यकारी आदेश जारी करके इन कानूनों से पहले की व्यवस्था को ही लागू कर दिया गया है। वहीं लाठर ने कहा कि मंडी शुल्क का कम होना किसान हित में नहीं, बल्कि व्यापारियों के हित में है। सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर नेता प्रतिपक्ष राम सुंदर निषाद ने सपा के सभी सदस्यों के साथ वाक आउट किया।
तिलक-तराजू-तलवार का नारा देने वाले रख रहे गलत तथ्य : दिनेश शर्मा
कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए ही बसपा के दिनेश चंद्रा और भीमराव अंबेडकर ने असंगठित मजदूरों और बेरोजगारों का मुद्दा उठाया। उन्हें जीवन यापन भत्ता दिए जाने की मांग की। अंबेडकर ने कहा कि यह सरकार सामंतवादी, वर्णवादी और पूंजीवादी व्यवस्था की पोषक है। यह सामान्य वर्ग के लोगों के सम्मान को भी कम कर रही है। इस पर नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि तिलक-तराजू और तलवार जैसे नारे देने वाले लोग गलत तथ्य रख रहे हैं। इस पर बसपा सदस्यों ने कहा कि इस नारे का सुबूत दिखाया जाए। देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले हमारे तब के नेता तो आज इस सरकार में मंत्री हैं।
वहीं, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने श्रमिकों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को रखते हुए कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से कई गुना ज्यादा लाभार्थी पिछले साढ़े चार साल में बनाए गए हैं। कांग्रेस के दीपक सिंह ने महंगाई, निर्दलीय समूह के डॉ. आकाश अग्रवाल ने नए वित्तविहीन स्कूलों को मान्यता न देने, शिक्षक दल के सुरेश त्रिपाठी और ध्रुव त्रिपाठी ने माध्यमिक, संस्कृत और महाविद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों को जीपीएफ न दिए जाने और सपा के शशांक यादव ने धान खरीद में घपले का मुद्दा प्रमुखता से रखा। दीपक सिंह ने कहा कि पशु आहार तक महंगा हो गया है। पशुधन मंत्री लक्ष्मी नारायण ने कहा कि हमारी सरकार 7 लाख गायों के भरण पोषण के लिए प्रति गाय प्रति माह 900 रुपये दे रही है। नेता सदन ने शिक्षकों की समस्या पर यथोचित कार्यवाही का भरोसा दिया।