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UP: प्रदेश में घटाई गई स्टांप ड्यूटी, सेमीकंडक्टर सेक्टर में 3,000 करोड़ का निवेश; जानिए कैबिनेट के बड़े फैसले

Tue, 06 Jan 2026 07:07 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 06 Jan 2026 07:07 PM IST
सार

UP Cabinet meeting: मंगलवार को योगी सरकार की कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में 14 प्रस्ताव रखे गए जिनमें  से मंत्रीमंडल ने 13 प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। 

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UP: Stamp duty reduced in the state, investment of Rs 3,000 crore in the semiconductor sector; learn about the
योगी कैबिनेट के फैसले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में 13 अहम प्रस्तावों पर मंत्रीमंडल की मुहर लगी। इसमें सबसे प्रमुख फैसला स्टांप ड्यूटी को लेकर था। इस फैसले के अनुसार अब व्यावसायिक भूमि का परिवार के सदस्यों के नाम करने पर मात्र 5 हजार रुपये स्टाम्प ड्यूटी और 1 प्रतिशत शुल्क ही लिया जाएगा। अभी तक यह सुविधा कृषि व आवासीय भूमि पर थी।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य में परिवार के सदस्यों के मध्य निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क में दी जा रही छूट के दायरे को और व्यापक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय से अब पारिवारिक सदस्यों के बीच व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी स्टाम्प शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। अभी तक भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दान विलेखों पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार हस्तांतरण पत्र (कन्वेयंस डीड) की भांति स्टाम्प शुल्क देय होता है, जबकि रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के अनुसार अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है।

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5,000 तक सीमित है स्टाम्प शुल्क

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अनुभाग-2 की 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के माध्यम से यह व्यवस्था की गई थी कि यदि अचल संपत्ति का दान परिवार के सदस्यों के पक्ष में किया जाता है तो स्टाम्प शुल्क में छूट देते हुए अधिकतम 5,000 ही लिया जाएगा। यह छूट अब तक केवल कृष्य एवं आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी। योगी कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के तहत इस छूट को पारिवारिक सदस्यों के मध्य व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों के दान पर भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे परिवारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हो जाएगी।

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सेमीकंडक्टर सेक्टर में 3,000 करोड़ के निवेश पर विशेष प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के औद्योगिक विकास को लेकर एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2024 में लाई गई सेमीकंडक्टर नीति के तहत बड़े निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से 3,000 करोड़ या उससे अधिक के निवेश पर विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी।

केस-टू-केस आधार पर मिलेगा प्रोत्साहन
सुरेश खन्ना ने बैठक के बाद बताया कि अमेरिका, यूरोप, जापान और ताइवान जैसे देशों में सेमीकंडक्टर का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसी क्रम में भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश को इस उभरते उद्योग का बड़ा केंद्र बनाने के लिए सरकार ने केस-टू-केस आधार पर प्रोत्साहन देने की स्वीकृति दी है। इसके तहत सेमीकंडक्टर इकाइयों को ब्याज सब्सिडी, कर्मचारी लागत प्रतिपूर्ति, 10 वर्षों तक नेट एसजीएसटी में छूट, यूपी के मूल निवासियों के लिए 100 प्रतिशत ईपीएफ प्रतिपूर्ति (अधिकतम 2,000 प्रतिमाह), जल मूल्य में छूट और 10 वर्षों तक प्रति यूनिट 2 रूपये बिजली बिल में छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करना है।

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उत्तर प्रदेश बनेगा वैश्विक सर्विस का केंद्र, जीसीसी नीति को मंजूरी

 कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति-2024 की नियमावली को मंजूरी दे दी गई। इस नियमावली के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक निवेश, उच्च स्तरीय सेवाओं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन में नई गति मिलेगी। कैबिनेट से अनुमोदित नियमावली के अंतर्गत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली जीसीसी नीति-2024 के प्रख्यापन की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। जो राज्य सरकार द्वारा संशोधन अथवा समाप्त किए जाने तक लागू रहेगी।

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने बताया कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है, जिसके चलते निवेश करने के लिए उद्योग घराने और मल्टीनेशनल कंपनियां संपर्क में हैं। इसके लिए जीसीसी नीति बहुत लाभप्रद है और आज इसकी एसओपी लेकर आए हैं।

उन्होंने बताया कि यूपी में जीसीसी के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। इस वित्तीय वर्ष में 21 कंपनियों ने इसमें निवेश किया है। इसके माध्यम से प्रदेश में व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। नियमावली के अनुसार, जीसीसी किसी भारतीय अथवा विदेशी कंपनी द्वारा स्थापित एक कैप्टिव इकाई होगी, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, वित्त, मानव संसाधन, डिजाइन, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और नॉलेज सर्विसेज के रास्ते खोलेगी।

इस नियमावली में जीसीसी इकाइयों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार के वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। इनमें फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट अथवा प्रतिपूर्ति, पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, संचालन व्यय (ओपेक्स) सब्सिडी, पेरोल और भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति, प्रतिभा विकास एवं कौशल प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं नवाचार प्रोत्साहन के साथ-साथ केस-टू-केस आधार पर विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं। वित्तीय लाभ के अतिरिक्त, जीसीसी इकाइयों को तकनीकी सहायता समूह, इंडस्ट्री लिंकेज सपोर्ट, विनियामक सहायता, आवेदन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, अनुमोदन एवं प्रोत्साहन वितरण की सुव्यवस्थित प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई जाएगी।

फर्जी डिग्री देने पर जेएस विवि की मान्यता रद्द

 बैक डेट में बीपीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश देकर फर्जी अंकतालिका व डिग्री जारी करने, अभियुक्तों के साथ संगठित अपराध के रूप में काम करने पर जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद, फिरोजाबाद की मान्यता प्रदेश सरकार ने रद्द करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने मंगलवार को इससे जुड़े उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दी।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि विभाग की जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं। इनका प्रयोग राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया। इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच व शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं हैं। वहीं इस मामले में कुलाधिपति व कुलसचिव की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है। इसमें डिग्री देने की शक्ति के दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं व डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना भी शामिल है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद, फिरोजाबाद की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे। उन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में जारी मार्कशीट व डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही मान्यता रद्द होने की अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55 (6) के तहत तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी विभाग ने निर्णय लिया है।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए ध्वस्त होंगे जर्जर भवन

वाराणसी में बनने वाले 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए श्री शिव प्रसाद गुप्ता मंडलीय जिला चिकित्सालय परिसर में पहले से मौजूद 11 जर्जर और निष्प्रयोज्य भवनों को ध्वस्त किया जाएगा। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

वाराणसी में 500 बेड का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बन रहा है। यह अस्पताल 315 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से बनेगा। इसका निर्माण कार्य चार वर्षों में पूरा होगा। यह परियोजना 60 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार (लगभग 189 करोड़ रुपये) और 40 प्रतिशत राज्य सरकार (लगभग 126 करोड़ रुपये) से पूरी होगी। इस अस्पताल के बनने से वाराणसी ही नहीं पूर्वांचल के सभी जिलों के मरीजों को अत्याधुनिक और उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। इस अस्पताल के निर्माण के लिए श्री शिव प्रसाद गुप्ता मंडलीय अस्पताल परिसर में लंबे समय से जर्जर एवं निष्प्रयोज्य भवनों को ध्वस्त करके उस जगह को खाली किया जाएगा। फिर उस स्थान पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण कराया जाएगा।

 प्रदेश में पैतृक संपत्ति बंटवारे को लेकर बदले नियम

योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पैतृक संपत्ति के बंटवारे और किराया रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस फैसले से जहां पारिवारिक विवादों में कमी आएगी, वहीं किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा। योगी सरकार का यह निर्णय ईज ऑफ डूइंग लिविंग की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत होगी और आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

पैतृक संपत्ति के बंटवारे में बड़ी सहूलियत
योगी सरकार के निर्णय के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे के लिए मात्र 10,000 रुपये में रजिस्ट्री कराई जा सकेगी। इसमें 5,000 रुपये स्टांप ड्यूटी और 5,000 रुपये निबंधन शुल्क शामिल होंगे। यह व्यवस्था तीन पीढ़ियों से अधिक पारंपरिक वंशजों के बीच लागू होगी। बंटवारा केवल पैतृक अचल संपत्ति का ही किया जाएगा, जिसमें कृषि, आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां शामिल हैं। संपत्ति का विभाजन उत्तराधिकार कानून के तहत प्राप्त हिस्से के अनुपात में किया जाएगा।

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