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यूपी: पूरे देश की सभी विधानसभाओं के अध्यक्ष जुटेंगे लखनऊ में, 19 से 21 जनवरी तक लोकसभा अध्यक्ष रहेंगे मौजूद
Sat, 17 Jan 2026 08:11 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 17 Jan 2026 08:11 PM IST
सार
OP Birla in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 19 से 21 जनवरी तक देश के सबसे बड़े विधायी आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। इसमें सभी राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष मौजूद रहेंगे।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहेंगे विशेष तौर पर मौजूद।
- फोटो : ANI
विस्तार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ 19 से 21 जनवरी तक देश के सबसे बड़े विधायी आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन यहां आयोजित होगा, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, विधान परिषदों के सभापति तथा संसद के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना आयोजन की मेजबानी करेंगे।
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सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। सम्मेलन के समापन सत्र को 21 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।
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विधानमंडलीय परंपरा के अनुसार यह सम्मेलन हर वर्ष किसी न किसी राज्य में आयोजित किया जाता है। पिछली बार इसकी मेजबानी कर्नाटक ने की थी। उत्तर प्रदेश में यह सम्मेलन चौथी बार आयोजित हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में प्रदेश को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं, 100वां सम्मेलन वर्ष 2022 में शिमला में आयोजित किया गया था।
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सम्मेलन के समानांतर 19 जनवरी को देश भर के विधानसभा और विधान परिषद सचिवों का अलग सम्मेलन भी आयोजित होगा। इसमें बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिवेश में विधानमंडलीय सचिवों की भूमिका, डिजिटल प्रक्रियाएं और कार्यप्रणाली में सुधार जैसे विषयों पर मंथन किया जाएगा।
20 जनवरी को मुख्य सम्मेलन सत्र में पीठासीन अधिकारियों के स्तर पर विधायी संस्थाओं की भूमिका, कार्यकुशलता, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय ने सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था, अतिथियों के आवास, परिवहन और कार्यक्रम स्थलों को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं। इस आयोजन से लखनऊ एक बार फिर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक विमर्श के केंद्र के रूप में उभरेगा और प्रदेश को संसदीय परंपराओं के सुदृढ़ीकरण में अग्रणी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।