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यूपी : बिजली बकाये पर 12,353 करोड़ की छह लाख आरसी ठंडे बस्ते में, जिला प्रशासन नहीं कर रहा सहयोग

Thu, 12 May 2022 06:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 12 May 2022 06:49 AM IST
सार

हालत यह है कि पूरे प्रदेश में बिजली विभाग की ओर से बीते तीन साल में करीब छह बकायेदारों से वसूली के लिए 13,743 करोड़ रुपये से ज्यादा का वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किया गया है जबकि वसूली महज 530 करोड़ रुपये ही हो पाई। मौजूदा समय में 12,353 करोड़ रुपये से ज्यादा की आरसी ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। 

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UP: Six lakh RCs worth Rs 12,353 crore on electricity dues are pendng as district administration is not cooperating
बिजली संकट। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पावर कार्पोरेशन को बकायेदारों से वसूली करने में नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। हालत यह है कि पूरे प्रदेश में बिजली विभाग की ओर से बीते तीन साल में करीब छह बकायेदारों से वसूली के लिए 13,743 करोड़ रुपये से ज्यादा का वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) जारी किया गया है जबकि वसूली महज 530 करोड़ रुपये ही हो पाई। मौजूदा समय में 12,353 करोड़ रुपये से ज्यादा की आरसी ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। 

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जिला प्रशासन की ओर से सहयोग न किए जाने से आरसी पर अमल नहीं हो पा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि आरसी के जरिये बकाया वसूली करने पर जिला प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए पावर कार्पोरेशन द्वारा लागू की गई प्रोत्साहन योजना भी बेअसर साबित हुई है। पावर कार्पोरेशन प्रबंधन अपनी खराब माली हालत का हवाला देते हुए बिजली आपूर्ति पर ग्रहण की आशंका जताई है।
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प्रदेश में बिजली कंपनियों का कुल घाटा एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया है। अब स्थिति यह हो गई है बिजली खरीदने तक के लाले पड़ रहे हैं। जैसे-तैसे सरकारी विभागों पर बकाये के  भुगतान की व्यवस्था बजट से करा दी गई है लेकिन तमाम अन्य बकायेदारों से वसूली अब भी कार्पोरेशन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। 
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पावर कार्पोरेशन पर केंद्रीय एजेंसियों का बकाया 22,000 करोड़ से ऊपर हो गया है। उपभोक्ताओं की भी 20,596 करोड़ की देनदारी निकल रही है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम से खरीदी जाने वाली बिजली का नियमित भुगतान नहीं हो पा रहा है जिससे कोल कंपनियों को समय से पैसा देना, ऋण आदि के ब्याज का भुगतान अन्य खर्चे पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आरसी की धनराशि की वसूली में जिला प्रशासन के ढुलमुल रवैये ने कार्पोरेशन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

आरसी के जरिये बकाया वसूल करने के लिए पावर कार्पोरेशन ने जिला प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए 11 जून 2019 को प्रोत्साहन योजना भी लागू की थी। इसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष की पहली व दूसरी छमाही में कुल जारी आरसी के मुकाबले वसूली गई धनराशि और अधिकतम प्रतिशत वसूली के दो वर्गीकरणों में चयनित प्रथम तीन जिलों को गोल्ड, सिल्वर और कांस्य प्रशस्ति पत्र के साथ प्रोत्साहन धनराशि देने की व्यवस्था की गई है। 

यह प्रोत्साहन योजना भी आरसी की धनराशि वसूली में बेअसर साबित हुई है। बिजली विभाग की ओर से जारी आरसी की धनराशि की वसूली को लेकर जिला प्रशासन की गंभीरता अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2019-20 में 11.03 प्रतिशत, 2020-21 में 5.44 प्रतिशत तथा 2021-22 में महज 0.82 प्रतिशत ही वसूली हो पाई।

पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने राजस्व परिषद के पोर्टल ड्ढशह्म्.ह्वश्च.ठ्ठद्बष्.द्बठ्ठ पर बीते तीन वर्ष में प्रदेश के विद्युत वितरण खंडों द्वारा जारी आरसी की धनराशि और उसके मुकाबले की गई वसूली के ब्यौरे के साथ सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर वसूली में तेजी लाने का अनुरोध किया है। पंकज कुमार की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 4 मई 2022 तक उपलब्ध विवरण के  अनुसार पूरे प्रदेश में आरसी के 5,89,146 प्रकरण लंबित हैं जिसमें 12,353.49 करोड़ रुपये वसूल किए जाने हैं। 


एमडी ने पत्र में पावर कार्पोरेशन की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए जिलाधिकारियों से आरसी के लंबित प्रकरणों का संज्ञान लेते हुए ज्यादा से ज्यादा वसूली करवाने का अनुरोध किया है। पत्र में धनराशि वसूल न हो पाने की स्थिति में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति में बाधा आने की आशंका भी जताई गई है।
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प्रदेश में बीते तीन वर्ष में जारी आरसी व वसूली की स्थिति
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वित्तीय वर्ष        जारी की गई आरसी की धनराशि    वसूली गई धनराशि                प्रतिशत
                                      (करोड़ रुपये में)              (करोड़ रुपये में)
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2019-20            2483.95                                      274.00                            11.03
2020-21            3561.80                                      193.81                            05.44
2021-22            7697.70                                      62.90                              00.82
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