फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Seeing Congress' love for Dalits, BSP alert, took this big step to save cadre vote bank

यूपी: कांग्रेस का दलित प्रेम देख बसपा सतर्क, कैडर वोट बैंक बचाने के लिए उठाया ये कदम, नेताओं को मिली चेतावनी

Fri, 06 Sep 2024 12:37 PM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ
अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 06 Sep 2024 12:37 PM IST
सार

Dalit politics of Congress: लोकसभा चुनावों में दलित वोट बैंक कांग्रेस की तरफ जाते हुए देख बसपा चौंकन्नी हो गई है। कांग्रेस ने बसपा के बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश भी की है। 

विज्ञापन
UP: Seeing Congress' love for Dalits, BSP alert, took this big step to save cadre vote bank
माायवती कांग्रेस से हैं आशंकित। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

लोकसभा चुनाव में अपने कैडर वोट बैंक का नुकसान सहने वाली बहुजन समाज पार्टी के लिए प्रदेश में कांग्रेस बड़ा खतरा बनती जा रही है। कांग्रेस ने बसपा नेताओं को अपने पाले में करने की रणनीति बनाई है, जिससे दलित वोट बैंक पर करीब चार दशक पुराना उसका वर्चस्व दोबारा स्थापित हो सके। कांग्रेस की इस रणनीति से बसपा यूपी में और कमजोर होगी, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का पलड़ा सपा पर भारी होता जाएगा।

विज्ञापन


बता दें कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने हाल ही में अपनी पार्टी के उन नेताओं को सख्त चेतावनी दी है कि वह आरक्षण के उप-वर्गीकरण और क्रीमीलेयर के मुद्दे पर कांग्रेस की विचारधार का समर्थन नहीं करे। ऐसा करने वालों को पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मायावती की इस चेतावनी की वजह बसपा नेताओं में कांग्रेस के प्रति बढ़ता आकर्षण माना जा रहा है। लोकसभा में करारी शिकस्त के बाद पार्टी नेताओं को बसपा के दोबारा सियासत में आने की संभावना खत्म होती दिख रही है। यही वजह है कि वह अपने राजनीतिक सफर को जारी रखने के लिए कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। बीते दिनों बस्ती और चित्रकूट में बसपा नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है, जो बसपा के लिए नुकसान का सबब बन गया।
विज्ञापन


आखिर किसने पाले में गया यह वोट
दरअसल, करीब चार दशक पूर्व प्रदेश के दलित वोट बैंक पर पूरी तरह से कांग्रेस का कब्जा था। बसपा के अस्तित्व में आने के बाद कांग्रेस की पकड़ दलित वोट बैंक पर कमजोर पड़ती गयी। यही वजह रही कि कांग्रेस की जगह बसपा का प्रभुत्व बढ़ता गया और उसने दलित वोट बैंक की बदौलत प्रदेश में 4 बार सरकार बनाई। हालिया लोकसभा चुनाव में दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने का दावा सपा और कांग्रेस कर तो रहे हैं, लेकिन यह कितना वोट बैंक किसके पाले में गया, इसे लेकर असमंजस बरकरार है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तो सपा पर बढ़ जाएगा दबाव
वहीं आगामी उपचुनाव में सीटों को बंटवारे को लेकर दोनों दलों में अभी सहमति नहीं बन सकी है। कांग्रेस अगर दलित नेताओं को अपने पाले में करने में सफल रही तो यह सपा के साथ सीटों के बंटवारे में कारगर साबित हो सकता है। साथ ही पार्टी को यूपी में अपना खोया हुआ जनाधार भी वापस दिलाने में मदद कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed