फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Sarnath included in the UNESCO World Heritage List.

UP: सारनाथ यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल, उत्तर प्रदेश की बौद्ध विरासत को मिली वैश्विक पहचान

Sat, 25 Jul 2026 06:03 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sat, 25 Jul 2026 06:03 PM IST
सार

बौद्ध स्थली सारनाथ उत्तर प्रदेश का चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है। सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा 28 वर्षों बाद मिला है।

विज्ञापन
UP: Sarnath included in the UNESCO World Heritage List.
विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित सारनाथ - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिल गया है। इसके साथ ही सारनाथ भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार को यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। इस उपलब्धि के साथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक विरासत के सर्वोच्च मंच पर नई पहचान मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विज्ञापन


सारनाथ को 03 जुलाई 1998 को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट (संभावित सूची) में शामिल किया गया था। लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य के तीनों विश्व धरोहर स्थल- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (आगरा क्षेत्र) तक सीमित थे। सारनाथ के शामिल होने से उत्तर प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है। यह राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मान्यता मिली है।
विज्ञापन


चौखंडी और धामेक स्तूप : यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। ये दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन की स्मृति का प्रतीक है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष तथा अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये सभी मिलकर सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था और ज्ञान केंद्र के रूप में हुए विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बौद्ध धर्म सारनाथ क्यों महत्वपूर्ण?
सारनाथ, वह पावन धरती है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद मानवता को अपना प्रथम उपदेश देकर 'धर्मचक्र प्रवर्तन' का शुभारंभ किया था। आज यह विश्व धरोहर के रूप में विशिष्ट पहचान प्राप्त कर चुका है। बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में 'ऋषिपत्तन' के नाम से वर्णित किया गया है। यही वह ऐतिहासिक स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश समस्त मानवता तक पहुंचाया। आज यह गौरवशाली विरासत वैश्विक मंच पर और अधिक प्रतिष्ठित हो गई है। करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। यह स्थल आज भी बौद्ध मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का साक्षी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed