योगी के चेहरे पर ही सजेगा यूपी का चुनावी मैदान : काशी में पीएम मोदी की बात से 2022 का चुनावी संदेश साफ
काशी के पांच घंटे के प्रवास के पहले पड़ाव बीएचयू की सभा में ही उन्होंने 40 मिनट के भाषण में जो कुछ बोला, उससे साफ हो गया कि भाजपा उनकी सरकार के सात और योगी आदित्यनाथ सरकार के पांच साल के काम को लेकर ही चुनावी मैदान में उतरेगी।
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र काशी के साल 2021 के पहले दौरे में प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के एजेंडे को भी सेट कर दिया। साथ ही सियासी तस्वीर को भी साफ कर दिया। काशी के पांच घंटे के प्रवास के पहले पड़ाव बीएचयू की सभा में ही उन्होंने 40 मिनट के भाषण में जो कुछ बोला, उससे साफ हो गया कि भाजपा उनकी सरकार के सात और योगी आदित्यनाथ सरकार के पांच साल के काम को लेकर ही चुनावी मैदान में उतरेगी। औपचारिक रूप से घोषित भले न हो, लेकिन प्रदेश में चुनावी समर योगी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। सांस्कृतिक सरोकारों के साथ विश्वास, विकास और राष्ट्रवाद भाजपा के सियासी हथियार होंगे, जिनके जरिये जातिवाद, आतंकवाद, माफियावाद व गुंडाराज के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधा जाएगा।
पीएम मोदी ने जिस तरह नए यूपी की नई काशी का उल्लेख किया और उससे पहले सीएम योगी ने नई काशी की चतुर्दिक तरक्की पर बात की, उससे कोई संदेह नहीं रहा कि दोनों के बीच समन्वय के साथ एजेंडे पर काम करने की समझदार व परस्पर भरोसा कायम है। केंद्र पूरी तरह योगी के पीछे खड़ा है, मीडिया में अटकलें कुछ भी चली हों। प्रधानमंत्री के भाषण में योगी के काम पूरी तरह छाए रहे। एक तरह से काशी के आज के दौरे से पिछले दिनों प्रदेश में चली राजनीतिक बदलाव व फेरबदल की अटकलों को फिलहाल पूरी तरह बेबुनियाद साबित कर दिया। साथ ही काशी की धरती से प्रदेश की जनता को स्थिरता व स्थिर सरकार का संदेश देते हुए उन लोगों को भी आगाह कर दिया जो इस तरह की अटकलों को हवा देते हैं।
कोरोना पर योगी सरकार के प्रबंधन की तारीफ कर दिया साफ संदेश
मोदी ने कोरोना महामारी से निपटने पर योगी सरकार की पीठ थपथपाई। अधिकारियों को भी शाबाशी दी। चिकित्सा सुविधाओं से लेकर ऑक्सीजन के प्रबंधन तक के लिए प्रबंधन व तत्परता को दाद दी। इंसेफे लाइटिस सहित अन्य बीमारियों से निपटने के लिए योगी सरकार की बार-बार तारीफ की। चार साल पहले स्वास्थ्य सुविधाओं की समस्या का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए सपा व बसपा की सरकारों को यह कहते हुए कठघरे में खड़ा किया कि पहले प्रदेश में छोटी सी समस्या विकराल रूप धारण कर लेती थी। अब यूपी कोरोना जैसी विकराल समस्या और 100 साल में पहली बार आई भीषण महामारी का भी पूरी सामर्थ्य व संवदेनशीलता के साथ मुकाबला कर लोगों की जिंदगी बचा रहा है। संदेश साफ है कि कोरोना पर प्रदेश सरकार की आलोचनाएं प्रधानमंत्री की नजर में कोई महत्व नहीं रखती हैं।
इस तरह सेट किया एजेंडा
सियासी नब्ज पर हाथ
याद करना होगा कि 2014 के पहले से लेकर 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए पूर्वांचल में सभा करने वाले मोदी पूर्वी यूपी में मौजूद संभावनाओं का उल्लेख करते हुए इसकी बदहाली पर लोगों के दिल व दिमाग में गैरभाजपा सरकारों की नीति व नीयत को लेकर खूब झकझोरते थे। इनमें स्वास्थ्य व अवस्थापना के साथ बेरोजगारी का मुद्दा जरूर होता था। शायद इसीलिए उन्होंने योगी के साथ काशी में 1500 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने और काशी के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजनाओं पर काम चलने या शुरू होने का उल्लेख करते हुए वाराणसी के पूर्वांचल के मेडिकल हब बनने की बात कह लोगों को यह बताने की भी कोशिश की कि भाजपा सरकारें सिर्फ वादा नहीं करतीं, बल्कि उस पर खरा भी उतरती हैं। एक तरह से मोदी ने काशी की सभा से विश्वास का एजेंडा भी सेट किया। उन्होंने विपक्ष को कथनी व करनी में अंतर के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।
सांस्कृतिक सरोकारों पर नजर
प्रधानमंत्री ने बनारसी शैली भोजपुरी हिंदी में भाषण की शुरुआत भोलेनाथ व माता अन्नपूर्णा देवी से कर हर-हर महादेव पर समाप्त करते हुए कोरोना काल में भी काशी में विकास की गति न रुकने का उल्लेख किया। कई बार महादेव का जिक्र किया। गंगा की अविरलता, निर्मलता पर काम का उल्लेख करते हुए पूरी काशी में गंगा की लाइव आरती देखने के लिए किए गए प्रबंधों का जिक्र किया। काशी की गरिमा व महत्व का उल्लेख कर सांस्कृतिक एजेंडे पर प्रतिबद्धता जताई। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण करते हुए इसके निर्माण में जापान और वहां के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के सहयोग को याद कर उनका आभार व्यक्त किया, उससे भी सरोकारों के समीकरणों पर ही काम करते नजर आए।