यूपी के ये 13 शहर बनेंगे स्मार्ट सिटी
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शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण स्मार्ट सिटी योजना के लिए 13 शहरों का चयन कर लिया गया है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, बरेली, झांसी, इलाहाबाद, आगरा, गाजियाबाद, रामपुर व मेरठ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।
वैसे तो स्थानीय निकाय निदेशालय ने रेटिंग के आधार पर कुल 24 शहरों की सूची तैयार की थी, लेकिन वरीयताक्रम में 13 शहरों का चयन किया गया। मेरठ और सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र रायबरेली रेटिंग में तो बराबर हैं, लेकिन वरीयताक्रम में मेरठ के ऊपर होने से रायबरेली इसमें शामिल होने से वंचित हो गया।
मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में योजना भवन के सभागार में राज्य स्तरीय उच्चाधिकार संचालन समिति बैठक में यह निर्णय किया गया।
मुख्य सचिव ने महापौरों, नगर आयुक्तों व पालिका परिषद अध्यक्षों से कहा है कि केंद्र सरकार की गाइड लाइन्स के अनुसार प्रदेश के शहरों का स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित करने के लिए कार्यों में और अधिक बेहतर उपलब्धि लाने के प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कहा कि अन्य शहरों को भी निर्धारित गाइड लाइन्स के अनुसार बेहतर कार्यों से छह माह में होने वाले मूल्यांकन में मार्किंग में अपना बेहतर स्थान पाने का प्रयास करें।
अभी तीन कदम बाकी
1. सचिव नगर विकास विभाग एसपी सिंह के मुताबिक इन 13 शहरों का नाम 31 जुलाई को केंद्र को भेजा जाएगा।
2. इसके बाद शहरों को स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा।
3. केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ब्लूमवर्क से इनका मूल्यांकन कराएगी। फिर देश के 100 शहर घोषित होंगे।
रेटिंग में कौन कहां?
मुरादाबाद व अलीगढ़ 90-90 अंक, सहारनपुर 87.50, बरेली 86.11, झांसी 85, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद व आगरा 82.50-82.50 अंक, रामपुर 78.13, मेरठ व रायबरेली 75-75 अंक, गोरखपुर, आजमगढ़, मथुरा व लखीमपुर 72.50-72.50 अंक, बस्ती व फतेहपुर 67.50-67.50 अंक, नवाबगंज 65 अंक, उरई 62.50, फिरोजाबाद व बिजनौर को 60-60 अंक मिले हैं।
रेटिंग का आधार
जनगणना 2011 के आधार पर निर्मित शौचालय, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, मासिक ई-पत्रिका, परियोजनावार म्युनिसिपल बजट व्यय सूचना, सेवा आपूर्ति में विलंब के लिए दंड लगाना, तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंतरिक रूप से राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, लेखाओं की लेखा परीक्षा, शुल्क और प्रयोक्ता प्रभारों, किराया तथा अन्य आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत, कर राजस्व, जल आपूर्ति की स्थापना और अनुश्रवण लागत का प्रतिशत, वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान प्रमुख कार्यों के लिए उपयोग किए गए आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत, शहर स्तरीय जेएनएनयूआरएम सुधार व मार्च 2012 तक स्वीकृत परियोजनाओं की पूर्णता के आधार पर 5 से 10 अंक देते हुए रेटिंग तय की गई।
क्या है स्मार्ट सिटी?
शहरों को प्रदूषण, सफाई, नगरीय सुविधाओं के लिहाज से रहने लायक बनाने के लिए प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को स्मार्ट सिटी का नाम दिया गया है। इसमें नगरीय सुविधाओं को मोबाइल इंटरनेट, ई-सुविधा केंद्रों की मदद से स्मार्ट करने की योजना है। इसमें स्मार्ट तरीके से हेल्थ, एजूकेशन, कम्युनिकेशन, पॉवर सप्लाई पर भी काम किया जाना प्रस्तावित है।
क्या आएंगे बदलाव?
अभी तक नगरीय सुविधाओं के लिए जूझना होता है। इसमें खासतौर पर हाउस टैक्स के असेसमेंट व भुगतान, नक्शा पास कराने, जल आपूर्ति व कूड़ा न उठने पर शिकायत, ट्रैफिक जाम, पॉवर कट जैसी समस्याओं का हल निकल सकेगा। नगर निगम इन सभी सुविधाओं के लिए नोडल संस्था होगी। इसके लिए अभी हालांकि 74वें संविधान संशोधन को लागू करने की मांग पूरी करनी होगी।
कैसे होगा काम?
केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी में लखनऊ के चयन के बाद नगर निगम को बजट देगी। इसके अलावा खुद को स्मार्ट सिटी के बेंचमार्क तक ले जाने के लिए अमृत योजना में भी बजट दिया जाएगा। इस कवायद में राज्य सरकार भी नगर निगम को मदद करेगी। इसमें सबसे ज्यादा प्राथमिकता स्मार्ट गवर्नेंस, स्मार्ट एनर्जी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट कम्युनिकेशन, स्मार्ट हेल्थ सिस्टम, स्मार्ट एजूकेशन पर होगी।