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UP: खेती की जमीन को लीज पर देने के नियम होंगे सरल, आसानी से मिलेगा बैंक कर्ज
Wed, 27 May 2026 12:12 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 27 May 2026 12:12 PM IST
सार
मॉडल एक्ट का उद्देश्य भूमिहीन, सीमांत और किरायेदारी पर खेती करने वाले किसानों को कानूनी
सुरक्षा देना और उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है। इसके तहत जमीन मालिक अपनी कृषि भूमि लीज पर दे सकेगा, जबकि खेती करने वाले किसान को भूमि पर निर्बाध कब्जे और उपयोग का अधिकार मिलेगा।
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- फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में खेती की जमीन लीज पर देने के नियम आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक, सार्वजनिक एवं निजी बैंकों के साथ हुई शासन व वित्त विभाग के अधिकारियों की बैठक में नीति आयोग के मॉडल एग्रीकल्चरल लैंड लीजिंग एक्ट-2016 को लागू करने पर विचार किया गया है। प्रस्ताव के तहत भूमिहीन, बटाईदार और किरायेदार किसानों को कानूनी मान्यता देकर बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ा जा सकता है।
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सुझाव दिया कि एक्ट के मौजूदा प्रतिबंधों में ढील देकर लीज पर खेती करने वालों को तीन वर्ष की वैधता वाला लोन एलिजिबिलिटी कार्ड जारी किया जाए, जिससे वे बिना भूमि स्वामित्व दस्तावेज के और बिना भूमि को गिरवी रखे ऋण ले सकें। प्रदेश में 2.38 करोड़ से अधिक जोतधारक और औसत 0.73 हेक्टेयर जोत आकार होने के कारण ये सुधार किसानों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
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मॉडल एक्ट का उद्देश्य भूमिहीन, सीमांत और किरायेदारी पर खेती करने वाले किसानों को कानूनी
सुरक्षा देना और उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है। इसके तहत जमीन मालिक अपनी कृषि भूमि लीज पर दे सकेगा, जबकि खेती करने वाले किसान को भूमि पर निर्बाध कब्जे और उपयोग का अधिकार मिलेगा।
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वर्ष 2016 में राजस्व संहिता में संशोधन कर ऐसे प्रावधान यूपी में किए गए थे, जिनके तहत दिव्यांग या खेती करने में असमर्थ व्यक्ति अपनी भूमि अधिकतम तीन वर्ष के लिए लीज पर दे सकते हैं। हालांकि, यह व्यवस्था सीमित दायरे में है। बैठक में भूमि अभिलेखों को आधार से जोड़ने तथा बैंकों को ऑनलाइन चार्ज सृजित करने की सुविधा देने का भी प्रस्ताव रखा गया।
अधिकारियों का मानना है कि इससे एक ही भूमि पर कई बार ऋण लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रस्ताव पर आगे विस्तृत अध्ययन और कानूनी परीक्षण किया जाएगा। यदि मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट की तर्ज पर कानून में संशोधन किया जाता है तो उत्तर प्रदेश में लाखों भूमिहीन और किरायेदार किसानों के लिए बैंक ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा।
लीज पर खेती करने वालों को बैंक ऋण नहीं मिलता
नीति आयोग की मॉडल लैंड लीजिंग रिपोर्ट का मुख्य तर्क यही है कि बड़ी संख्या में बटाईदार, किरायेदार और भूमिहीन किसान खेती तो करते हैं, लेकिन जमीन उनके नाम न होने से उन्हें बैंक ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। मॉडल कानून इन्हें संस्थागत ऋण से जोड़ने का रास्ता खोलता है।