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यूपी: डामर की कीमत दोगुनी होने से सड़कों का निर्माण अटका, कीमत 52 हजार टन से बढ़कर एक लाख तक पहुंची

Fri, 02 Oct 2026 09:47 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 02 Oct 2026 09:47 AM IST
सार

सड़क निर्माण कंपनी एआर थर्मोस्टेट्स के निदेशक सिद्धार्थ गुप्ता के मुताबिक, फरवरी 2026 में बिटुमिन करीब 52 हजार रुपये प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर लगभग एक लाख रुपये प्रति टन हो गया। कीमत बढ़ने के साथ आपूर्ति संकट भी गहरा गया। 

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UP: Road construction stalled as bitumen prices double; impact of Iran conflict reaches UP villages.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर अब उत्तर प्रदेश के गांवों की सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमिन (डामर) की कीमत कुछ ही महीनों में करीब दोगुनी होने और आपूर्ति घटने से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 68 सड़कों का करीब 650 किलोमीटर निर्माण अटक गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कुछ परियोजनाओं को बढ़ी लागत से राहत मिल चुकी है, लेकिन ग्रामीण सड़कों के लिए समान व्यवस्था का इंतजार है।

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सड़क निर्माण कंपनी एआर थर्मोस्टेट्स के निदेशक सिद्धार्थ गुप्ता के मुताबिक, फरवरी 2026 में बिटुमिन करीब 52 हजार रुपये प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर लगभग एक लाख रुपये प्रति टन हो गया। कीमत बढ़ने के साथ आपूर्ति संकट भी गहरा गया। तेल कंपनियों से आपूर्ति करीब आधी रह गई और कई राज्यों में अधिक कीमत देने के बावजूद बिटुमिन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
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देश में बिटुमिन की करीब 30 से 40 फीसदी जरूरत आयात से पूरी होती है। पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद आयात प्रभावित हुआ। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में 2.36 लाख टन बिटुमिन आयात हुआ।

मूल्य के अंतर का भुगतान हो: केंद्र ने संकट के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए बिटुमिन की कीमत बढ़ने पर मूल्य समायोजन की व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश में भी मई में उन पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं की बढ़ी बिटुमिन लागत वहन करने का फैसला हुआ, जिनकी निविदा एक अप्रैल से पहले हुई थी और जिनमें मूल्य वृद्धि का प्रावधान नहीं था। इसके बाद कई रुके काम फिर शुरू हुए। ग्रामीण सड़क ठेकेदारों का कहना है कि पीएमजीएसवाई के ठेके छोटे, निश्चित दर वाले और सीमित मार्जिन के होते हैं। ऐसे में बिटुमिन की कीमत दोगुनी होने से अतिरिक्त लागत सीधे कार्यशील पूंजी पर पड़ रही है। उनका कहना है कि पीडब्ल्यूडी की तरह बिटुमिन के मूल्य अंतर का भुगतान, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और आपूर्ति संकट से हुई देरी पर बिना दंड समय विस्तार की व्यवस्था की जाए। उनका दावा है कि राहत न मिलने पर छोटे ठेकेदार ग्रामीण सड़क निर्माण से बाहर हो सकते हैं।

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