यूपी: तय हुई जिम्मेदारी, पूरे प्रदेश में वन विभाग को मिली बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी, जानिए डिटेल
Monkeys in UP: यूपी में बंदरों को कौन पकड़ेगा इसको लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। अब मुख्य सचिव ने वन विभाग को बंदरों को पकड़ने का काम दिया है।
विस्तार
लंबे समय से बंदरों को पकड़ने को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच चल रही खींचतान पर शनिवार को विराम लग गया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बंदर पकड़ने और उनके प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप दी गई है। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि बंदर वन्यजीव की श्रेणी में आते हैं और उनके व्यवहार, प्रबंधन व पुनर्वास से जुड़ी विशेषज्ञता वन विभाग के पास उपलब्ध है। इसी आधार पर यह जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंपी गई है। वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक माह के भीतर समेकित कार्ययोजना तैयार करे। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों का सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
दरअसल, बंदरों का आतंक केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्या पूरे प्रदेश में गंभीर रूप ले चुकी है। आए दिन बंदरों के हमले और काटने की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन जिम्मेदारी तय न होने के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही थी। नगर निगम और वन विभाग के बीच इसे लेकर कई बार पत्राचार हुआ और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद शासन स्तर पर निर्णय लेते हुए स्थिति स्पष्ट की गई।
विवाद पर विराम
बंदर पकड़ने को लेकर नगर निगम और वन विभाग के बीच करीब पांच वर्षों से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। दोनों विभाग जिम्मेदारी लेने से बचते रहे, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शनिवार को जारी शासनादेश को लाखों लोगों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है। बंदरों के काटने के मामलों में रैबीज का खतरा बना रहता है। अकेले लखनऊ में प्रतिदिन 10 से 12 मामले सामने आते हैं। प्रदेशभर में बीते एक वर्ष में ऐसे 10800 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। अनुमान के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में 55 हजार से अधिक लोग बंदरों के हमलों का शिकार हो चुके हैं, हालांकि घायलों की आधिकारिक संख्या किसी भी विभाग के पास संकलित रूप में उपलब्ध नहीं है।
इसलिए वन विभाग को सौंपी जिम्मेदारी
जारी आदेश के अनुसार, नगर निगम की जिम्मेदारी उन पशु-पक्षियों तक सीमित है जिनसे गंदगी या सार्वजनिक असुविधा उत्पन्न होती है, जैसे छुट्टा पशु, लावारिस कुत्ते या कीड़े-मकौड़े। बंदर वन्यजीव हैं, जिनकी प्रवृत्ति पालतू पशुओं जैसी नहीं होती। उनकी विभिन्न प्रजातियां होती हैं और उनके प्रबंधन, पकड़ने तथा पुनर्वास के लिए विशेष प्रशिक्षण व विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जो नगर निगम के पास नहीं है। यह विशेषज्ञता वन विभाग के पास उपलब्ध होने के कारण जिम्मेदारी उसी को सौंपी गई है।
अब हो गई स्थिति स्पष्ट
कुछ वर्षो से वन विभाग ने यह कहना शुरू कर दिया था कि बंदर नगर निगम को पकड़ना है जबकि शासन की ओर से ऐसा कोई शासनादेश भी जारी नहीं हुआ था। अब शासन की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। बंदर पकड़ना वन विभाग की ही जिम्मेदारी है। -डॉ. अरविंद राव, अपर नगर आयुक्त