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यूपी: बिजली का निजीकरण रोकने के लिए नियामक आयोग पहुंचा उपभोक्ता परिषद, मसौदे को रद्द करने की मांग

Fri, 31 Jan 2025 10:08 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 31 Jan 2025 10:08 PM IST
सार

Privatization of power: यूपी में बिजली के निजीकरण को लेकर हो रहा विरोध और तेज हो गया है। बिजली का निजीकरण रोकने के लिए नियामक आयोग उपभोक्ता परिषद पहुंच गया है। 
 

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UP: Regulatory Commission reaches consumer council to stop electricity privatization, demands cancellation of
यूपी में महंगी हो सकती है बिजली। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उपभोक्ता परिषद ने शुक्रवार को विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया। निजीकरण के प्रस्ताव पर पूरी तरह से रोक लगाने और इसे निरस्त करने की मांग की। बताया कि गर्मी का मौसम आने वाला है। ऐसे में उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए निजीकरण के बजाय बिजली व्यवस्था सुधारने पर फोकस बढाया जाए।

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उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को नियामक आयोग के सदस्य संजय सिंह से मुलाकात की। उन्हें परिषद की ओर से लोक महत्व प्रस्ताव सौंपा। इसमें बताया कि केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यों वाली ऊर्जा मंत्री समूह के संयोजक प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा है। बृहस्पतिवार को इस समूह की पहली बैठक में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में चौतरफा सुधार और आरडीएसएस में सर्वोत्तम कार्य होने का दावा किया है।
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 ऐसे में मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 में प्रस्तावित निजीकरण मसौदे को तत्काल रद्द किया जाए। दक्षिणांचल व पूर्वाचल के 42 जिलों में ट्रांजक्शन एडवाइजर नियुक्त करने के बजाय सुधार के लिए कार्य शुरू किया जाए। मंत्री समूह ऊर्जा क्षेत्र में सुधार कार्यक्रम की रणनीति बना रहा है। ऐसे में इस रणनीति के सामने आने तक निजीकरण की प्रक्रिया ना की जाए।

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निजीकरण के विरोध में देशभर में हुआ विरोध प्रदर्शन

दक्षिणांचल एवं पूर्वांचल सहित अन्य राज्यों में हो रहे निजीकरण के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया। उत्तर प्रदेश के सभी बिजली कार्यालयों और लखनऊ के ऊर्जा भवन पर प्रदर्शन करते हुए कार्मिकों ने निजीकरण का विरोध किया। इस दौरान ऊर्जा मंत्रालय की ओर से गठित मंत्री समूह की रिपोर्ट आने तक निजीकरण का फैसला रद्द किए जाने की मांग की गई।

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाॅइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर शुक्रवार को सभी विद्युत वितरण निगमों के कार्यालयों एवं परियोजनाओं के कार्यालयों पर अभियंताओं एवं अन्य कार्मिकों ने हाथ में प्रबंधन विरोधी नारे लिखे हुई तख्तियां लेकर नारेबाजी की। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का दावा है कि उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और राजस्थान में निजीकरण के विरोध में देशभर में 27 लाख से अधिक बिजली कर्मी सड़क पर उतरे। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों ने दोहराया कि जब मंत्री समूह के संयोजक खुद उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा हैं और उन्हें सुधार की रणनीति बनाने का मौका दिया गया है। वह खुद उत्तर प्रदेश की व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं। ऐसे में निजीकरण क्यों किया जा रहा है?

 
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