यूपी: लखनऊ में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हल्ला बोल, कांग्रेस-सपाई बैरिकेडिंग पर चढ़े; 'इस्तीफा दो' के लगे नारे
लखनऊ में एसआईआर को लेकर कांग्रेस और सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने नगर निगम मुख्यालय से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिसके दौरान धक्का-मुक्की हुई और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
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लखनऊ में सोमवार को SIR को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। नगर निगम मुख्यालय से चुनाव आयोग कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और इस्तीफे की मांग की। चुनाव आयोग कार्यालय के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की।
इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की और कपड़े फाड़ दिए। बाद में कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया गया।
SIR में गड़बड़ी का लगाया आरोप
मार्च में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे लेकर विरोध जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
पुलिस ने रास्ते में रोका
प्रदर्शन को देखते हुए चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ता जब कार्यालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक हुई।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से नोकझोंक
एसआईआर के दौरान धांधली के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को प्रांतीय आह्वान पर राजधानी में चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। जिन्हें पुलिस ने नगर निगम कार्यालय के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
पुतला फूंकने और आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस से उनकी नोकझोंक हुई। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले जाया गया। जहां से उन्हें देर शाम रिहा कर दिया गया।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनकी गिरफ्तारी और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों व मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक एवं स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रहे थे।