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यूपी: निजी अस्पतालों को हर हाल में देनी होगी कैशलेस चिकित्सा, इनकार किया तो तत्काल खत्म होगी संबद्धता

Fri, 24 Jan 2025 07:36 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 24 Jan 2025 07:36 AM IST
सार

Cashless treatment in UP: प्रदेश में पीएमजेएवाई के तहत पंजीकृत सरकारी एवं निजी अस्पतालों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के लाभार्थियों को उपचार नहीं देने की शिकायतें शासन तक पहुंची है।

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UP: Private hospitals will have to provide cashless medical treatment under all circumstances, if they refuse,
चिकित्सा देने से मना नहीं कर सकेंगे अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 प्रदेश में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान) के तहत संबद्ध निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने की नई रणनीति अपनाई गई है। किसी भी अस्पताल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में रुपये मांगे अथवा इलाज से इनकार किया तो तत्काल उसकी संबद्धता खत्म की जाएगी। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए गोपनीय तरीके से भी जांच शुरू कराई गई है। इस संबंध में प्रदेशभर के निजी अस्पतालों को नोटिस भेजते हुए चेतावनी दी गई है। सभी जिलाधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को भी निगरानी रखने के लिए कहा गया है।

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प्रदेश में पीएमजेएवाई के तहत पंजीकृत सरकारी एवं निजी अस्पतालों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना के लाभार्थियों को उपचार नहीं देने की शिकायतें शासन तक पहुंची है। कहीं इलाज शुरू करने से पहले रुपये मांगे जा रहे हैं तो कहीं योजना में पंजीयन होने के बाद भी इलाज से इनकार किया जा रहा है। ऐसे में स्टेट एजेंसी फॉर कंप्रेहेंसिव हेल्थ एंड इंट्रीग्रेटेड सर्विस (साजीच) की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. पूजा यादव ने पंजीकृत सभी अस्पतालों के प्रबंधकों एवं प्रबंध समिति को नोटिस भेजा है। इसमे सख्त चेतावनी दी है कि योजना के लाभार्थियों को न सिर्फ उपचार दिया जाए बल्कि योजना के बारे में जागरूक भी किया जाए। किसी ने इलाज से इनकार किया अथवा नगद धनराशि ली तो यह समझा जाएगा कि संबंधित अस्पताल योजना में कार्य करने का इच्छुक नहीं है। ऐसे में तत्काल उसकी संबद्धता खत्म कर दी जाएगी।

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दर्जनभर के खिलाफ शुरू हुई जांच

विभागीय सूत्रों की मानें तो विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने करीब 13 निजी अस्पतालों के खिलाफ शिकायत की है। ये अस्पताल एजेंसी के रडार पर हैं। इनकी दो स्तरीय जांच शुरू की गई है। एक तो शिकायत के आधार पर संबंधित शिकायतकर्ता और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। दूसरी तरफ शिकायतों की वास्तविकता का अध्ययन करने के लिए गोपनीय तरीके से भी जांच टीम उतारी गई है।

कितने अस्पतालों पर हुई कार्रवाई
प्रदेश में आयुष्मान के तहत पंजीकृत किए गए अस्पतालों में रुपये मांगने, इलाज में आनाकानी करने सहित विभिन्न आरोपों में अब तक 410 की संबद्धता खत्म की गई है। इसी तरह 97 को निलंबित किया गया और 68 का भुगतान रोका गया। इसी तरह विभिन्न अस्पतालों में 3.44 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।

यूपी में हैं सर्वाधिक अस्पताल

उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत 2949 सरकारी और 2885 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। पंजीयन के मामले में देश में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है।

 
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क्या है कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना

प्रदेश में 21 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। योजना के तहगत राज्य के सरकारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके आश्रित परिजनों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलती है। सरकारी अस्पतालों में बिना किसी वित्तीय सीमा के कैशलेस उपचार जबकि आयुष्मान योजना में पंजीकृत निजी अस्पताल में हर लाभार्थी को पांच लाख प्रति वर्ष की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलती है। नवंबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में 904785 कर्मचारी और 650259 पेंशन को शामिल किया गया है। इसमें 981261 लाभार्थियों को स्टेट हेल्थ कार्ड कारी कर दिया गया है। अन्य का बन रहा है। नवंबर माह तक हेल्थ कार्ड से 68577 लाभार्थियों ने उपचार लिया। हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से प्रदेश में 22 लाख कर्मचारी और पेंशन भोगी होने का दावा किया जाता है। इसी तरह प्रदेश में करीब आठ करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया है।

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