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यूपी : मांग में भारी वृद्धि से बिजली आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ाई, बढ़े लोड का बोझ नहीं उठा पा रहा वितरण व ट्रांसमिशन सिस्टम

Fri, 10 Jun 2022 12:35 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 10 Jun 2022 12:35 AM IST
सार

ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान समस्या से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करें। जनता को बार-बार होने वाली ट्रिपिंग एवं लो वोल्टेज से निजात दिलाने के लिए जरूरी मेंटीनेंस व क्षमता वृद्धि आदि के कार्य समय से पूरे कराए जाएं।

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UP: Power supply system falters due to huge increase in demand, distribution and transmission system is unable to bear the burden of increased load
यूपी में बिजली संकट

विस्तार

भीषण गर्मी में बिजली की मांग में रिकार्ड वृद्धि से प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई है। पहले से ओवरलोडेड वितरण और ट्रांसमिशन सिस्टम बढ़े हुए लोड का बोझ नहीं उठा पा रहा है। नतीजतन लोकल फाल्ट, ट्रांसफार्मर की खराबी, लो वोल्टेज की समस्या काफी बढ़ गई है। मांग पूरी करने के लिए पावर कार्पोरेशन एनर्जी एक्सचेंज समेत अन्य तमाम स्रोतों से अतिरिक्त बिजली का इंतजाम कर रहा है लेकिन जर्जर सिस्टम के कारण लोगों को रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। गांवों में बेतहाशा कटौती हो रही है जबकि शहरों में भी हालात बदतर हैं। लखनऊ के ही तमाम इलाकों में घंटों की अघोषित कटौती से गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। उद्योग-धंधों पर भी इसका खासा असर पड़ रहा है।

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तापमान बढ़ने के कारण प्रदेश में बिजली की मांग में भी भारी इजाफा हुआ है। प्रदेश में बिजली की मांग 26,000 मेगावाट के आसपास बनी हुई है। राज्य के बिजलीघरों से लगभग 11,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि केंद्र से 14,000 मेगावाट से ज्यादा बिजली मिल रही है। जरूरत के मुताबिक 3000-3600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली भी खरीदी जा रही है। इन सबके बावजूद लोगों प्रदेश में बिजली का संकट बना हुआ है और शहरों से लेकर गांवों तक अघोषित कटौती का सिलसिला जारी है। हालांकि  स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) की ओर से गांवों में 16 घंटे, तहसीलों में 21 घंटे, बुंदेलखंड में 19 घंटे तथा जिला, मंडल व महानगरों में 24 घंटे आपूर्ति का दावा किया जा रहा है लेकिन जमीनी हालात अलग हैं। गांवों में बमुश्किल सात-आठ घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है।
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लखनऊ समेत लगभग सभी बड़े-छोटे शहरों में स्थानीय गड़बड़ियों और अन्य तकनीकी कारणों से धुआंधार अघोषित कटौती की जा रही है। यही नहीं लोड बढ़ने से तमाम इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या भी बढ़ गई है। इसकी वजह से लोगों के एसी व अन्य कीमती बिजली के उपकरणों के खराब होने की शिकायतें भी आ रही हैं।
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अभियंताओं का कहना है कि भीषण गर्मी पड़ने की वजह से वितरण और ट्रांसमिशन सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है। जिस तरह से बिजली की मांग में इजाफा हो रहा है और लोड बढ़ रहा है, उसके हिसाब से वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता में वृद्धि नहीं हो पाई है। इसकी वजह से समस्या खड़ी हो रही है। जब तक बारिश नहीं होती है तब तक हालात में सुधार की संभावना नहीं दिखाई दे रही है।


बिजली के बढ़ते संकट के मद्देनजर सरकार और पावर कार्पोरेशन प्रबंधन भी लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बृहस्पतिवार को पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान समस्या से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करें। जनता को बार-बार होने वाली ट्रिपिंग एवं लो वोल्टेज से निजात दिलाने के लिए जरूरी मेंटीनेंस व क्षमता वृद्धि आदि के कार्य समय से पूरे कराए जाएं। आपूर्ति में अनावश्यक व्यवधान न हो इसके लिए सभी ट्रांसफार्मर एवं फीडर की लोड बैलेंसिंग जरूर करा ली जाए। उन्होंने कहा कि बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाए तथा जिन फीडर पर लाइन लास ज्यादा हो वहां पर नाइट पेट्रोलिंग कर बिजली चोरी रोकी जाए। जितनी बिजली आपूर्ति की जा रही है उतना राजस्व वसूल किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी को समय पर सही बिल मिले।

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