यूपी: त्योहारों के ठीक पहले बिजली संकट, छह से आठ घंटे में सिमटी गांवों में बिजली सप्लाई; इकाइयां ठप
Power crisis in UP: यूपी में बिजली संकट गहराता जा रहा है। अब कुल 13 उत्पादन इकाइयां बंद हैं, जिससे 5440 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भविष्य में बिजली संकट बढ़ सकता है।
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प्रदेश में भरपूर बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, लेकिन उत्पादन इकाइयों के बंद होने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को तीन अन्य उत्पादन इकाइयां भी बंद हो गई हैं। अब कुल 13 उत्पादन इकाइयां बंद हैं, जिससे 5440 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भविष्य में बिजली संकट बढ़ सकता है।
प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 14 सितंबर को यह अधिकतम मांग 27407 मेगावाट रही। यूपीएसएलडीसी का दावा है कि वह रोस्टर से अधिक बिजली आपूर्ति कर रहा है। ग्रामीण इलाके में 18 के बजाय 18.38 घंटे की आपूर्ति की गई है। इसी तरह बुंदेलखंड में 20 के 21.30 घंटे बिजली आपूर्ति की गई है, जबकि हकीकत एकदम अलग है।
उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। इसकी बड़ी वजह बीच- बीच में लोकल फाल्ट भी है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को 10 उत्पादन इकाइयां बंद थी, जिनसे 5340 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हो रहा था। मंगलवार को बंद होने वाली उत्पादन इकाइयों की संख्या 13 हो गई है। इससे प्रदेश में 5940 मेगावाट कम बिजली उत्पादन हो रहा है। इससे भविष्य में बिजली संकट बढ़ने की आशंका है।
त्यौहार पर बिजली संकट से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश
पावर कार्पोरेशन बिजली संकट से निपटने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। त्यौहार पर बिजली संकट न हो, इसके लिए अभी से तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल ने मंगलवार को समीक्षा बैठक में दिए हैं। बैठक में बताया गया कि कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है।
अपर मुख्य सचिव डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के चालू होने की उम्मीद है। अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने और बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार से लगभग 2200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होगी।
एसीएस डा. गोयल ने निर्देश दिया कि भविष्य में बिजली की मांग बढ़ेगी। ऐसे में अभी तैयारी ररखें। फीडर स्तर के आंकड़ों का नियमित विश्लेषण करते हुए जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करें। अधिक लाइन हानि वाले फीडरों एवं क्षेत्रों में फीडरवार कार्य योजना बनाकर नियमित कार्रवाई की जाए।