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यूपी पुलिस का सिपाही ही लगवा रहा था शिक्षक भर्ती में सेंध, एसटीएफ ने यूं किया खुलासा

Mon, 07 Jan 2019 12:51 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 07 Jan 2019 12:51 AM IST
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up police constable involved in teacher recruitment scam
प्रिंसिपल उमाशंकर सिंह व सिपाही अरुण कुमार

यूपी एसटीएफ ने लखनऊ में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने सरगना उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही अरुण कुमार और नेशनल इंटर कालेज के प्रधानाचार्य उमाशंकर सिंह समेत नौ लोगों को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया है।

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एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि रविवार को आयोजित सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 के दौरान राजधानी के नेशनल इंटर कालेज में धांधली का इनपुट मिला था। जिसके आधार पर पुलिस उपाधीक्षक सत्यसेन यादव के नेतृत्व में एक टीम गठित कर नेशनल कालेज में छापा मारा गया।
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एसटीएफ ने नेशनल के बाहर खड़ी इनोवा गाड़ी से पहले सरगना अरुण कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। अरुण कुमार सिंह यूपी पुलिस का सिपाही है और लखनऊ के गोसाईंगंज थाने में तैनात है। अरुण कुमार की निशानदेही पर प्रिंसिपल उमाशंकर सिंह समेत आठ अन्य लोगों को एसटीएफ ने कालेज के अंदर से गिरफ्तार कर लिया।
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अरुण ने पूछताछ में बताया कि वह यूपी पुलिस का सिपाही है। उसका भाई अजय कुमार सिंह मेरठ में भूगर्भ जल विभाग में भूगर्भ जल अधिकारी है। वह दोनों मिलकर इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक कराकर अनुचित लाभ कमाते हैं। पेपर लीक कराने के बदले प्रति कैंडीडेट 3 लाख रुपये तक लिए जाते हैं। 

अरुण ने बताया कि उसका भाई काफी समय से इस तरह के कार्यों में लिप्त है और कई परीक्षाओं में इसी तरह परीक्षा पेपर लीक कराकर करोड़ों रुपये कमा चुका है। अरुण ने बताया कि उसने इंदिरानगर केदयानंद इंटर कालेज के अध्यापक राम इकबाल शुक्ला के माध्यम से नेशनल इंटर कालेज के प्रिंसिपल उमाशंकर सिंह को अपने मनमुताबिक इंवीजीलेटर तैनात करने के लिए 50 हजार रुपये में सेट किया। 

अरुण की एक महिला मित्र शाहनूर जो नगर निगम लखनऊ में निरीक्षक के पद पर तैनात है, उसकी ड्यूटी परीक्षा कक्ष में लगवाता था जो अभ्यर्थी को नकल कराती थी। अरुण कुमार ने आंसर की शाहनूर के मोबाइल पर व्हाट्स एप के माध्यम से भेजी थी। दयाशंकर जोशी, विजय मिश्र और अशोक मिश्र भी इंवीजिलेटर के रूप में नकल करा रहे थे। गिरफ्तार अभियुक्तों में दो अभ्यर्थी बिरकेश यादव और खुर्शेद आलम भी हैं। 

अरुण का दावा कई परीक्षाओं में लीक करा चुके हैं पेपर

गिरफ्त में आए सिपाही अरुण कुमार ने बताया कि वह कई परीक्षाओं में पेपर लीक कराकर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचा चुका है और उससे लाखों रुपये कमा चुका है। अरुण के पास से एसटीएफ को भारी संख्या में अलग-अलग परीक्षाओं के एडमिट कार्ड और परीक्षाओँ से जुड़े अन्य दस्तावेज मिले हैं। उसने बताया कि वह कोचिंग सेंटर के माध्यम से कैंडीडेट सेट करता था। एसटीएफ ने अरुण के पास से एक लाख 90 हजार रुपये बरामद किए हैं।

एसटीएफ ने की कार्रवाई

जिस कालेज में लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्ण और पुलिस कप्तान कलानिधि नैथानी कुछ देर पहले राउंड लगाकर निकले थे वहीं पर यूपी एसटीएफ के जवानों से सर्विलांस की मदद से ट्रैक करते हुए एक-दो नहीं बल्कि नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ के साथ प्लस प्वाइंट यह था कि  उसके पास सटीक सूचनाएं थी और इंटर कालेज के बाहर इनोवा में बैठे अरुण कुमार को पहचानने वाला शख्स भी एसटीएफ के पास था।

दो साल गैर हाजिर रहने के बाद दोबारा जॉइन किया था

सूत्रों की मानें तो अरुण कुमार सिंह की पहचान आशिक मिजाज सिपाही के रूप में रही है। वह काफी समय तक गोमतीनगर के पत्रकारपुरम चौराहे चौकी पर तैनात था। वह दो साल तक ड्यूटी से अनुपस्थित भी रहा। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई लेकिन उसने दोबारा पुलिस लाइन में आमद कराकर गोसाईंगंज में तैनाती पा ली।

प्रयागराज से चार गिरफ्तार

एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि प्रयागराज से भी एक सरगना और दो साल्वर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में सरगना कौशांबी निवासी नागेंद्र सिंह, अभ्यर्थी सुरेश कुमार यादव, साल्वर राजेश कुमार यादव और मनोहर कुमार शाह को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सहारा गर्ल्स इंटर कालेज करैली और सरोज विद्याशंकर इंटर कालेज झूंसी से की गई है। पूछताछ में मुख्य अभियुक्त नागेंद्र सिंह ने बताया कि वह बिहार से साल्वर बुलाकर यहां के अभ्यर्थियों के बदले परीक्षा में बैठाता था। एक साल्वर को 50 हजार रुपये दिए जाते थे। जबकि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के लिए ढाई लाख रुपये से तीन लाख रुपये लिए जाते थे। 

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