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UP: ठंडे बस्ते में गई प्रदेश में राजकीय संस्कृत विद्यालय की योजना, दो संस्थान खुलने के बाद नहीं खुल सका तीसरा

Sun, 09 Nov 2025 08:47 AM IST
रोहित मिश्र अक्षय कुमार, अमर उजाला लखनऊ
अक्षय कुमार, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 09 Nov 2025 08:47 AM IST
सार

Sanskrit Colleges in UP: संस्कृत का प्रचार प्रसार करने के लिए यूपी में 15 राजकीय संस्कृत विद्यालय खोजे जाने थे। यह योजना दो विद्यालयों से आगे नहीं बढ़ पाई। 

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UP: Plans for a state-run Sanskrit school have been shelved, with two institutions failing to open after the t
यूपी में संस्कृत विद्यालय। - फोटो : डेमो पिक।

विस्तार

 प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तर पर कवायद हो रही है। एक तरफ संस्कृत विद्यालयों के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति देने का निर्णय हुआ है। वहीं, नए डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किए गए हैं। इसी क्रम में पिछले दो साल से 15 नए राजकीय संस्कृत विद्यालयों को खोलने की कवायद चल रही थी। पर, यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। इससे प्रदेश में राजकीय संस्कृत विद्यालयों की संख्या दो से तीन नहीं हो सकी।

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प्रदेश में अभी मात्र दो राजकीय संस्कृत विद्यालय चंदौली और भदोही में चल रहे हैं। सरकार ने विद्यार्थियों को सस्ती और सुलभ संस्कृत शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से 10 सामान्य व पांच आवासीय राजकीय संस्कृत विद्यालय और प्रस्तावित किए थे।
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यहां कक्षा छह से 12 (प्रथमा से उत्तर मध्यमा) तक की पढ़ाई होनी थी। इसमें कई विद्यालयों के लिए जिलों में जमीन चिह्नित कर निर्माण की डिजाइन और बजट भी शासन ने स्वीकृत कर दी थी। लेकिन अचानक इस योजना पर ब्रेक लग गया है। यह स्थिति तब है जबकि संस्कृत विद्यालयों में शुरू किए गए डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को लेकर युवाओं में काफी रुचि है और कॉलेज भी आगे आ रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा कि फिलहाल इस योजना को रोका गया है। सरकार कुछ और बेहतर करने के विकल्प पर काम कर रही है।

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यहां बनने थे आवासीय विद्यालय

योजना के तहत पांच धार्मिक शहरों नैमिषारण्य (सीतापुर), प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा व चित्रकूट में नए आवासीय राजकीय संस्कृत विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया था। यहां पर विद्यालय के साथ 100-100 बेड के छात्रावास भी बनने थे ताकि विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा के लिए भटकना न पड़े और उन्हें अपने शहर में ही रोजगार मिल सके। इसके अलावा वाराणसी, रायबरेली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, जालौन, अमेठी, मुरादाबाद, एटा, हरदोई में भी नए राजकीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना होनी थी।

ट्रस्ट के विद्यालयों को लेकर चलाने का प्रस्ताव

अधिकारियों ने बताया कि उच्च स्तर से यह निर्देश दिया गया है कि विभाग अपने नए राजकीय संस्कृत विद्यालय खोलने की जगह अच्छे तरीके से चलाए जा रहे ट्रस्ट या निजी संस्कृत विद्यालयों को लेकर उनका संचालन करे। हालांकि, यह निर्देश दिए हुए भी काफी समय हो गया है। अब तक विभाग की ओर से ऐसे एक भी विद्यालय को चिह्नित नहीं किया गया है।

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