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यूपी: जटिल प्रक्रिया के चलते पंचायत चुनाव टलने के आसार, जातिवार आरक्षण के साथ आयोग गठन है वजह

Fri, 13 Feb 2026 09:24 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 13 Feb 2026 09:24 AM IST
सार

Panchayat elections in UP: यूपी में पंचायत चुनाव अपने समय से लेट हो सकते हैं। कई जटिल और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते चुनाव समय से टल सकते हैं।

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UP: Panchayat elections likely to be postponed due to complex procedures, with the formation of a commission w
यूपी में पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शासन ने हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा में भले ही समय से पंचायत चुनाव कराने का दावा किया है, लेकिन तमाम जटिल प्रक्रियाओं के चलते ऐसा होना संभव होता नहीं दिख रहा है। समय से चुनाव कराने में सबसे अधिक बाधा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना है। गठन के बाद भी आयोग को सीटों की आरक्षण प्रक्रिया तय करने में एक से डेढ़ महीने तक का समय चाहिए। इसके अलावा कई और भी औपचारिकताएं पूरी करनी बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में समय से चुनाव कराने को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति है।

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बता दें कि प्रदेश में इसी साल अप्रैल-मई में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने का सयम नियत है। लेकिन अभी तक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है। इस वजह से आगे की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। हालांकि इससे पहले पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी प्रदेश में पंचायत चुनाव समयानुसार अप्रैल-मई में कराए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन तैयारियों के लिहाज से इसको लेकर संशय है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि अभी भी यदि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाता है तो भी समय से चुनाव कराना संभव नहीं है। कम से कम एक या दो महीने चुनाव को टालना ही पड़ सकता है।

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12 जनवरी को कोर्ट में दिया था हलफनामा 

वहीं, पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक निदेशक पंचायती राज ने 12 जनवरी को हाईकोर्ट में एक हलफनामा दिया था। ये हलफनामा एक पीआईएल पर जवाब देते हुए दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के लिए पत्रावली शासन को भेज दी गई है। शीघ्र ही निर्णय होने की संभावना है। इसकी पुष्टि शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने की है। उनका कहना है कि ये हलफनामा पंचायत चुनाव के समय को लेकर तिथियों की स्पष्टता पर मौन है। ऐसे में माना जा रहा है कि समय से चुनाव होने की संभावना कम ही दिखती है।

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आरक्षण तय करना बड़ी चुनौती

UP: Panchayat elections likely to be postponed due to complex procedures, with the formation of a commission w
पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

दरअसल समय से पंचायत चुनाव कराने में सबसे बड़ी बाधा जातिवार सीटों का आरक्षण तय करना। बता दें जनगणना 2011 के अनुसार, राज्य में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत क्रमशः 20.6982 और 0.5677 प्रतिशत है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इन वर्गों के लिए इतनी ही प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी। इसमें ओबीसी जातियों का प्रतिशत जनगणना में शामिल नहीं था। जबकि रैपिड सर्वे 2015 के अनुसार, राज्य की ग्रामीण आबादी में अन्य पिछड़ा वर्ग की हिस्सेदारी 53.33 प्रतिशत थी। 2021 के चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया गया था। ऐसे में इस बार पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रतिशत 27 प्रतिशत रखना अनिवार्य है। इसलिए अबकी बार संख्या में हुए बदलाव को ध्यान में रखते हुए आरक्षण तय करने में समय लग सकता है।

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