यूपी : एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर लग रहे ऑक्सीजन प्लांट, जल्द दूर होगी किल्लत
प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती का असर दिखने लगा है । प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत विभिन्न जिलों में 13 ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम तेजी से शुरू हो गया है।
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प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती का असर दिखने लगा है । प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत विभिन्न जिलों में 13 ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम तेजी से शुरू हो गया है। वहीं केंद्र सरकार ने भी यूपी के लिए 750 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का आवंटन कर दिया है। इसके अलावा प्रदेश के 75 जिलों में 81 इकाइयां रोजाना 900 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन उत्पादन कर रही हैं। प्रदेश में जल्द ही ऑक्सीजन की किल्लत दूर हो जाएगी।
सीएम के निर्देश पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग ने ऑक्सीजन की आपूर्ति मेडिकल उपयोग में ही सुनिश्चित करने के लिए अफसरों की ड्यूटी लगा दिया है। ताकि ऑक्सीजन का उपयोग किसी अन्य काम न होने पाए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने युद्ध स्तर पर प्रयास शुरु कर दिए है। अब इसका सार्थक परिणाम सामने आने लगा है।
प्रदेश के आठ राजकीय मेडिकल कॉलेजों व स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में ऑक्सीजन प्लांट के निर्देश दिए गए थे। इसमें से राजकीय मेडिकल कालेज आजमगढ़, बांदा, सहारनपुर अम्बेडकर नगर के अलावा स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या, बस्ती, बहराइच और फिरोजाबाद में प्लांट की स्थापना शुरू कर दी गई है।
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और चिकित्सा महाविद्यालयों में युद्ध स्तर पर संसाधनों में बढ़ोतरी की जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश में कुल 13 ऑक्सीजन प्लांट लग रहे हैं, जिसमें पांच प्लांट डीआरडीओ राम मनोहर लोहिया लखनऊ, कैंसर इंस्टीट्यूट लखनऊ, मेडिकल कॉलेज कानपुर, आगरा और झांसी में लगा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।
अपर मुख्य सचिव एमएसएमई नवनीत सहगल ने बताया कि ऑक्सीजन इकाइयों से समन्वय के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। वह स्थानीय स्तर पर डीएम से समन्वय कर ऑक्सीजन की आपूर्ति मेडिकल उपयोग के लिए सुनिश्चित कराएंगे।
इन जिलों में हो रहा उत्पादन और रीफिलिंग
75 जिलों के 81 इकाइयों में ऑक्सीजन के उत्पादन और रिफिलिंग का काम हो रहा है। इनमें गौतमबुद्धनगर में एक, गाजियाबाद में एक मैन्यूफैक्चरर और 15 रीफिलर, आगरा में सात रीफिलर और एक मैन्यूफैक्चरर, मथुरा में दो मैन्यूफैक्चरर, अलीगढ़ में तीन रीफिलर एक मैन्यूफैक्चरर, कानपुर नगर में दो रीफिलर और दो मैन्यूफैक्चरर, कानपुर देहात में एक मैन्यूफैक्चरर और एक रीफिलर, लखनऊ में तीन रीफिलर और दो प्रोड्यूसर, प्रयागराज में एक मैन्यूफैक्चरर, मुजफ्फरनगर में दो मैन्यूफैक्चरर एक रीफिलर, वाराणसी में एक मैन्यूफैक्चरर, चंदौली में छह मैन्यूफैक्चरर और संतकबीरनगर में एक मैन्यूफैक्चरर इकाई है।
इसके अलावा अयोध्या में एक, बाराबंकी में एक, अंबेडकरनगर में एक, फिरोजाबाद में तीन, अमेठी में दो, बरेली में तीन, बहराईच में एक, गोरखपुर में दो, झांसी में तीन, और्रैया में एक, शामली में एक, बुलंदशहर में एक, मेरठ में एक, बिजनौर में दो, मुरादाबाद में चार, मीरजापुर में एक रीफिलर ईकाई ऑक्सीजन का उत्पादन कर रही है।
दो दर्जन से ज्यादा इकाइयों की इंडस्ट्रियल सप्लाई रोकी गई
खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने हाल ही में ऑक्सीजन का उत्पादन और रीफिलिंग की क्षमता तत्काल बढ़ाने को लेकर आदेश जारी किए थे। इसी कड़ी में कई इकाइयों ने उत्पादन और रीफिलिंग बढ़ाया है। इसके अलावा यह सुनिश्चित किया गया है कि ऑक्सीजन की सप्लाई सिर्फ मेडिकल उपयोग में ही लाई जाए। जिसके तहत दो दर्जन से ज्यादा इकाइयों की इंडस्ट्रियल आपूर्ति रोकी दी गई है।