UP: पावर कॉर्पोरेशन में मनचाहे वेतन पर डिप्टी सीईओ, जीएम, सीजीएम नियुक्त करने का विरोध, सीबीआई जांच की मांग
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन में मनचाहे वेतन पर निदेशक की नियुक्ति और फिजूलखर्ची को लेकर सवाल उठाए और मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
विस्तार
विद्युत नियामक आयोग में पावर ट्रांसमिशन की सुनवाई के दौरान बिजली उपभोक्ताओं पर बोझ डालने का मुद्दा जोरशोर से उठा। उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरशन के लेखा विंग में लेटरल एंट्री के जरिये बैंड-4 में ढाई से तीन लाख प्रतिमाह के वेतन पर उच्च पदों पर भर्ती करके फिजूलखर्ची हो रही है। इसका भार उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। परिषद ने इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की। नियामक आयोग से अध्यक्ष अरविंद कुमार ने परिषद की आपत्तियों का संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।
आयोग ने बिजली दर निर्धारित करने के लिए सुनवाई शुरू की है। बुधवार को आयोग के अध्यक्ष व सदस्य संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में सुबह 11 बजे और दूसरे सत्र में दोपहर बाद तीन बजे से सुनवाई हुई। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन की सुनवाई के दौरान ट्रांसमिशन की ओर से अब तक किए गए कार्यों, भविष्य की रणनीति सहित वार्षिक राजस्व आवश्यकता का विवरण रखा गया।
राज्य उपभोक्ता परषिद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विभिन्न नियमों के हवाले से उपभोक्ताओं का पक्ष रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि यूपी पहला राज्य है जहां पावर कॉरपोरेशन लेटरल एंट्री के तहत अकाउंट में उप मुख्य अधिशासी अधिकारी, मुख्य महाप्रबंधक सहित अन्य उच्च पदों पर सिर्फ साक्षात्कार के जरिये भर्ती कर रहा है। इन्हें प्रतिमाह ढाई से तीन लाख वेतन भी दिया जा रहा है। कहा, लेटरल एंट्री की व्यवस्था की सीबीआई जांच कराई जाए। आरोप लगाया कि इस भर्ती के जरिये मनचाहे लोगों को पदस्थापित करने का खेल हो रहा है। उन्होंने नियामक आयोग से इस मामले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। कहा, इस तरह होने वाली फिजूलखर्च को पावर ट्रांसमिशन की टैरिफ प्लान से बाहर रखा जाए। सुनवाई के दौरान पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक रणवीर प्रसाद सहित सभी निदेशक मौजूद रहे।
अध्यक्ष के न आने पर सवाल
सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष के सुनवाई से गायब रहने पर सवाल उठाया। आयोग से मांग की कि जनहित की इस सुनवाई में अध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी का निर्देश दिया जाए।
पहले भार बढ़ाएं, फिर बढ़ोतरी की बात
सुनवाई के दौरान पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने अपनी कुल राजस्व आवश्यकता 4385 करोड़, सकल खर्च वर्ष 2024-25 के लिए 4339 करोड़ बताया। उपभोक्ता परिषद ने इस पर एतराज किया। कहा कि इसके पहले आयोग ने सिर्फ 3582 करोड़ अनुमोदित किया था। ऐसे में 757 करोड़ अधिक का प्रस्ताव देना उचित नहीं है। पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन चाहता है कि उसकी ट्रांसमिशन टैरिफ 26 पैसे से बढ़कर 29 पैसे कर दी जाए यह भी उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रांसमिशन को अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता सिर्फ 5.86 करोड़ किलोवाट है, जबकि उपभोक्ता द्वारा 7.38 करोड़ किलोवाट का भार लिया गया है।
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