यूपी: लखनऊ की 23 फीसदी बेटियां ही कामकाजी, पढ़ाई में आगे पर नौकरी में पीछे; जानें कॅरिअर से दूर होने की वजह
लखनऊ में उच्च शिक्षा के बावजूद महिलाओं की रोजगार में भागीदारी काफी कम है। 15 वर्ष से अधिक उम्र की केवल 23.2 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं या नौकरी तलाश रही हैं। घरेलू जिम्मेदारियां, सुरक्षा, परिवार की सोच और बच्चों की देखभाल जैसी वजहों से महिलाएं करियर से दूर हो रही हैं।
विस्तार
उच्च शिक्षा हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी और कॅरिअर से बाहर हो रही हैं। लखनऊ में 15 वर्ष से अधिक उम्र की केवल 23.2 फीसदी महिलाएं ही काम कर या नौकरी तलाश रही हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 74.9 फीसदी है। यह जानकारी केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की मार्च में जारी सालाना रिपोर्ट में सामने आई है।
इंजीनियरिंग, एमबीए और पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी 30 से 59 वर्ष की उम्र वाली 68.9 फीसदी महिलाएं न तो नौकरी कर रही हैं, न पढ़ाई और न ही किसी कॅरिअर से जुड़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में 15 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 23.2 फीसदी है। इसका अर्थ है कि हर 100 महिलाओं में करीब 23 ही काम पर हैं या नौकरी खोज रही हैं।
पुरुषों में यह दर 74.9 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ में 15-59 वर्ष की 60.4 फीसदी महिलाएं नाॅट इन एजुकेशन, इंप्लायमेंट ऑर ट्रेनिंग (एनईईटी) हैं। 30-59 वर्ष उम्र की महिलाओं में यह अनुपात बढ़कर 68.9 फीसदी हो जाता है। पुरुषों में यह आंकड़ा मात्र 8.7 फीसदी है। यानी कॅरिअर की सबसे अहम उम्र में महिलाओं और पुरुषों के बीच बड़ा अंतर बनता जा रहा है।
कॅरिअर से दूर होने की मुख्य वजहें
महिलाओं के नौकरी से दूर होने की वजह सिर्फ शादी और बच्चों की जिम्मेदारी नहीं है। घर की जिम्मेदारी, परिवार की सोच और सुरक्षा की चिंता भी बड़ी वजहें हैं। बच्चों की देखभाल की सुविधा न होना और लंबे समय तक काम भी नौकरी छोड़ने का कारण बनता है। पति के साथ दूसरे शहर जाने पर या बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी आने पर नौकरी छूट जाती है। लंबे समय तक कॅरिअर से दूर रहने के बाद दोबारा काम पाना भी मुश्किल होता है।
| उम्र | स्थिति | महिलाएं | पुरुष |
| 15 वर्ष से अधिक | काम कर रहीं या नौकरी तलाश रहीं | 23.2% | 74.9% |
| 30-59 वर्ष | न काम, न पढ़ाई, न प्रशिक्षण | 68.9% | 8.7% |
परिवार के साथ पूरी अर्थव्यवस्था को मिलेगा
लखनऊ विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोली मिश्रा ने बताया कि लखनऊ की तस्वीर बताती है कि पुरुषों को भी घर की जिम्मेदारियां बांटनी होंगी। शादी, मातृत्व या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण नौकरी छोड़ चुकीं महिलाओं को दोबारा काम से जोड़ना व लैंगिक संवेदनशीलता जरूरी है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो उनकी शिक्षा और हुनर का लाभ परिवार के साथ पूरी अर्थव्यवस्था को मिलेगा।