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यूपी: अब लू, वज्रपात, तूफान, सर्पदंश और डूबने की घटनाएं भी आपदा सूची में होंगी शामिल, बढ़ाई जाएगी आपदा की सीमा
Thu, 19 Jun 2025 10:06 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 19 Jun 2025 10:06 AM IST
सार
Disaster in UP: यूपी की राज्य आपदाओं में बढ़ोतरी की गई है। अब लू, वज्रपात, तूफान, सर्पदंश और डूबने की घटनाएं भी आपदा सूची में शामिल की जाएंगी।
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वज्रपात की घटनाएं अब आपदा में होंगी शामिल।
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
राज्य सरकार आपदा से निपटने की रणनीति को और प्रभावी बनाएगी। सरकार ने हाल में 16वीं वित्त आयोग के सामने आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए कई अहम प्रस्ताव रखे हैं। राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीएमएफ) के नियमों में भी कई बदलाव के प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार की ओर से रखे गए प्रस्तावों में आपदाओं, जैसे गर्मी की लहर (लू), वज्रपात, असमय बारिश, तूफान, सांप के काटने और डूबने जैसी घटनाओं को राष्ट्रीय आपदा सूची में शामिल करने की बात कही है।
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राज्य सरकार का मानना है कि ये आपदाएं राज्य में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती हैं। वर्ष 2024-25 में राज्य अधिसूचित आपदाओं से 4,534 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि राष्ट्रीय आपदाओं से केवल 176 लोगों की जान गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र सरकार से इन आपदाओं को गंभीरता से लेने की अपील की है।
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इसके अलावा, सरकार ने राज्य अधिसूचित आपदाओं के लिए खर्च की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की मांग की है। यह बदलाव इसलिए जरूरी है क्योंकि राज्य की आपदाएं अधिक लोगों को प्रभावित करती हैं और इनके लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत होती है। योगी सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि कोष के विभिन्न मदों के बीच बजट को आपस में बदला जा सके। इससे अगर किसी एक मद में खर्च न हो, तो उसका उपयोग दूसरी जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री योगी के इस प्रयास से आपदा प्रबंधन में लचीलापन आएगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
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राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रत्येक जिले में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के लिए भवन निर्माण की अनुमति दी जाए। वर्तमान में एसडीआरएफ और एसडीएमएफ के नियम इसकी अनुमति नहीं देते। इसके साथ ही, सरकार ने 1 प्रतिशत प्रशासनिक खर्च की अनुमति देने की भी मांग की है, ताकि आपदा प्रबंधन के लिए बेहतर प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सके।