UP News : प्राधिकरण की मलिन बस्ती पर मकान बनाने पर बिल्डरों को मिलेगी छूट, कई सहूलियत देगा आवास विभाग
इस तरह के भूखंडों पर मकानों का निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना की ‘स्वस्थाने’ स्लम पुनर्विकास घटक के तहत कराया जाएगा। इस फैसले से जहां प्रमुख शहरों में स्थित मलिन बस्तियों का विकास होगा, वहीं बस्ती में रहने वाले लोगों को सस्ते में साफ-सुथरा व हवादार मकान उपलब्ध हो सकेगा।
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केन्द्र द्वारा लागू ‘प्रधानमंत्री आवास योजना, सबके लिए आवास (शहरी) मिशन’ के तहत अब विकास प्राधिकरणों केस्वामित्व वाले ऐसे भूंखडों पर भी गरीबों के लिए मकान बनाए जा सकेंगे, जहां मलिन बस्तियां हैं। इस जमीन पर मकान बनाने पर बिल्डरों को सरकार छूट देने पर भी विचार कर रही है। इस तरह के भूखंडों पर मकानों का निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना की ‘स्वस्थाने’ स्लम पुनर्विकास घटक के तहत कराया जाएगा। इस फैसले से जहां प्रमुख शहरों में स्थित मलिन बस्तियों का विकास होगा, वहीं बस्ती में रहने वाले लोगों को सस्ते में साफ-सुथरा व हवादार मकान उपलब्ध हो सकेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के अर्न्तगत ‘स्वस्थाने’ स्लम पुनर्विकास घटक में भूमि को एक संसाधन के तौर पर उपयोग करते हुए नगर निकायों व विकास प्राधिकरणों के स्वामित्व वाली मलिन बस्तियों की जमीन पर फ्लैट बनाकर वहां के निवासियों को सस्ते दर पर फ्लैट उपलब्ध कराने संबंधी प्रावधान किया गया है। लेकिन मलिन बस्तियों की भूमि टुकड़ों में बटी होने से वहां फ्लैट बनाने में कई तरह की दिक्कतों की वजह से बिल्डर वहां मकान बनाने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे।
पिछले दिनों राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में बिल्डरों ने मलिन बस्तियों में अपार्टमेंट बनाने में एफएआर, लैंड यूज बदलने समेत कई अन्य तरह की कानूनी व व्यवहारिक दिक्कतों का जिक्र किया था। इसके मद्देनजर आवास विभाग प्राधिकरणों के स्वामित्व वाले मलिन बस्तियों के भूखंडो पर प्रधानमंत्री आवास योजना केतहत गरीबों के लिए ईडब्लूयएस और एमआईजी श्रेणी के मकान बनाने के लिए बिल्डरों को कई तरह की छूट देने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
बिल्डरों को मिल सकती हैं ये सहूलियतें
आवास विभाग केएक उच्चपस्थ अधिकारी के मुताबिक स्वस्थाने स्लम पुनर्विकास स्कीम के तहत विकास प्राधिकरणों के मालिकाना हक वाली मलिन बस्तियों की जमीन पर फ्लैट बनाने वाले बिल्डरों द्वारा प्रस्तावित प्रोजेक्ट के एफएआर में बृद्धि कर दी जाएगी, ताकि छोटे भूखंड पर भी फ्लैट बनाने में तकनीकी अड़चन न आए। इसी प्रकार भू-उपयोग परिवर्तन और अमलगमेशन (दो-तीन छोटे प्लाटों को मिलाकर एक करने) संबंधी नियमों में भी छूट दी जा सकती है। विभाग की ओर से सभी विकास प्राधिकरणों से अपने-अपने क्षेत्रों की मलिन बस्तियों के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर भेजने का भी निर्देश दिया है।