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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP News: Amar Ujala Meritorious Students Award 2022

मेधावी छात्र सम्मान 2022 : पिता की मेहनत लाई रंग, अब उनके सपनों को मिलेंगे पंख, छात्रों ने बताए अपने इरादे

Fri, 04 Nov 2022 01:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा रजनीकांत तिवारी, लखनऊ
रजनीकांत तिवारी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 04 Nov 2022 01:21 AM IST
सार

 UP News: अभावों के बीच कड़ी मेहनत कर बच्चों को पढ़ाने का जुनून था तो बच्चों ने भी अपने पिता के पसीने की कमाई का मोल चुकाया अच्छे नंबरों से पास होकर। अब इन मेधावियों का एक ही सपना है कि वे अपने माता-पिता के सपनों को आगे चलकर साकार करें।

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UP News:  Amar Ujala Meritorious Students Award 2022
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह-2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अभावों के बीच कड़ी मेहनत कर बच्चों को पढ़ाने का जुनून था तो बच्चों ने भी अपने पिता के पसीने की कमाई का मोल चुकाया अच्छे नंबरों से पास होकर। अब इन मेधावियों का एक ही सपना है कि वे अपने माता-पिता के सपनों को आगे चलकर साकार करें। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में पहुंचे यूपी बोर्ड 2021-22 की परीक्षा में टॉप टेन रैंकिंग पाने वाले विद्यार्थियों ने भविष्य को लेकर अपनी तैयारियों पर खुलकर बात की। ये कहानियां उन मेधावियों की हैं जिनकी मंजिलें उनका इंतजार कर रही हैं। उनकी बातों में जहां एक ओर अभाव का दर्द था तो वहीं अपने पिता के प्रति उनकी आंखों में अथाह सम्मान भी दिखा। इन्हें पढ़कर हो सकता है आपकी आंखें भी नम हो जाएं लेकिन उन छात्रों के लिए नसीहत भी है जो संसाधनों का रोना रोकर कड़ी मेहनत से मन चुराते हैं। तो आइए जानते हैं ऐसे ही मेधावियों के बारे में :

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10वीं के विद्यार्थी

सफाईकर्मी पापा ने देखा डॉक्टर बनने का सपना, मैं करूंगी पूरा
सीतापुर के बिसवां निवासी शीतल वर्मा ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा में प्रदेश में छठवीं रैंक पाई। पिता सुरेश चंद्र वर्मा बिसवां में सफाई कर्मचारी हैं। शीतल ने बताया कि पापा छोटा काम करते हैं लेकिन उनके सपने काफी बड़े थे। वह अक्सर मुझसे कहते थे कि मैं डॉक्टर बनना चाहता था लेकिन घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी इसलिए पढ़ नहीं पाया। तभी से ठान लिया कि अब मैं अपने पिता के सपनों को पूरा करूंगी। शीतल बोली, कोई भी पूछता है तो मैं गर्व से कहती हूं कि मेरे पिता सफाई कर्मी हैं।

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ऑटो चालक पिता का बनूंगी सहारा
कानपुर के नौबस्ता की रहने वाली नैंसी वर्मा ने हाईस्कूल में पांचवीं रैंक पाई। पापा ने बताया था कि आज तक परिवार में कोई इतने अच्छे नंबरों से पास नहीं हुआ था, मेरिट तो दूर की बात है। तब पापा ने कहा कि वह दिन-रात ऑटो चलाएंगे लेकिन कभी पढ़ाई में बाधा नहीं आने देंगे। आईपीएस अफसर बनने का सपना संजोए नैंसी बताती हैं कि किसी के पापा डॉक्टर तो किसी के इंजीनियर होते हैं। मुझे कभी अफसोस नहीं हुआ कि मेरे पापा ऑटो चलाते हैं। वह मेहनत के बूते पर हमारी अच्छी परवरिश कर रहे हैं। मुझे उन पर नाज है।
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फर्नीचर बनाने वाले पापा की हर मुराद करूंगी पूरी
कानपुर नगर की पलक अवस्थी ने 10वीं में चौथी रैंक पाई। पलक बताती हैं कि पापा कारपेंटर हैं। वे ही मेरे सुपर हीरो हैं। अच्छी पढ़ाई कर मैं उनके सपनों को पूरा करूंगी। कोई दुकान नहीं है। घर पर ही पापा सोफा, मेज, दरवाजे बनाते हैं। खाली समय निकालकर मैं भी उनका हाथ बंटाती हूं। परिवार में इससे पहले कभी कोई यूपी बोर्ड परीक्षा की रैंक में नहीं आया था। रिजल्ट आने पर पापा के चेहरे पर खुशी देखी तो लगा कि जैसे उनकी कोई मुराद पूरी हो गई हो। दो दिन तक मोहल्ले में मिठाई बंटी थी। उस सम्मान ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है।

नीली बत्ती लगी कार में घूमने की है हसरत
कन्नौज के तिरवा निवासी अनिकेत शर्मा ने हाईस्कूल की परीक्षा में तीसरी रैंक पाई है। उनके पिता अनूप शर्मा वेल्ंिडग का काम करते हैं। अनिकेत ने बताया कि वह आईएएस अफसर बनना चाहते हैं। पिता का सपना था कि मेरा बेटा नीली बत्ती लगी कार में घूमे। अब मैं उनके इस सपने को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा हूं। बताया कि रिजल्ट निकले पांच माह से ज्यादा समय बीत गया है लेकिन पापा आज भी दुकान पर आने वालों से कहते रहते हैं कि बेटे ने यूपी बोर्ड परीक्षा की मेरिट में जगह बनाकर पूरे कुल का नाम रोशन कर दिया। आगे की पढ़ाई अब पापा के सपनों के हिसाब से कर रहा हूं।


12 वीं के विद्यार्थी...

पापा की हर ख्वाहिश पूरी करेगी अफसर बिटिया
लखनऊ की रहने वाली स्वाति गोस्वामी ने इंटर की परीक्षा में छठवीं रैंक पाई थी। स्वाति के पिता कोरियर का काम करते हैं। सरस्वती विद्या मंदिर से पढ़ाई करने वाली स्वाति बताती हैं कि मेरे मम्मी-पापा की वजह से ही मैं इस मुकाम पर हूं। वह हमेशा सिखाते हैं कि अच्छे काम करो, नतीजा भगवान देंगे। प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुटी स्वाति बताती हैं कि मेरे सपनों को पूरा करने के लिए पापा ने अपनी इच्छाएं मारीं। पापा सबसे कहते हैं कि ये तो अफसर बिटिया है, उनकी यही हसरत पूरी करूंगी। कुछ मुकाम पाते ही लखनऊ के सबसे बड़े होटल में उन्हें पार्टी दूंगी।

मेरी पढ़ाई की खातिर बेच दिया घर
मुरादाबाद के जतिन राज ने इंटर की परीक्षा में छठवीं रैंक पाई। जतिन को हाईस्कूल में भी छठवीं रैंक मिली थी। जतिन बताते हैं कि वह आज जो भी हैं अपने पापा भुराज सिंह की बदौलत हैं। हाईस्कूल में अच्छी रैंक आई तो पापा ने गर्व से कहा था कि बेटा कभी पैसे का मुंह मत देखना, तुम ही हमारी संपत्ति हो। खूब पढ़ो, जितना पैसा चाहिए मैं व्यवस्था करूंगा। बताया कि अब दिल्ली में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा हूं। दिल्ली में रहने व कोचिंग के लिए घर पर पैसे नहीं थे। कोई उधार भी नहीं दे रहा था। इस वजह से पापा ने घर भी बेच दिया। अब कुछ बनूंगा तो सबसे पहले ऐशो आराम की हर एक चीज पापा के कदमों में लाकर रख दूंगा। उनके सपनों का घर बनवाऊंगा।

कोरोना काल में पढ़ाई थमी, पापा ने बढ़ाया हौसला
प्रयागराज की अंशिका यादव ने यूपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा में तीसरी रैंक पाई थी। वह बताती हैं कि कोरोना काल में पढ़ाई बाधित हो गई थी। इस वजह से हाईस्कूल में रैंक नहीं आ सकी। पापा ने हौसला बढ़ाया। जी-तोड़ मेहनत की और मेरिट में स्थान बना लिया। पिता राम बहादुर की जूते की दुकान है। वह बताती हैं कि पापा अपनी इच्छाओं का गला घोंटकर हमें पढ़ा रहे हैं। अब मैं आईएएस अफसर बनकर उनके सपने को साकार करूंगी।

उनका हर सपना करूंगा पूरा
गोंडा के महादेवा निवासी शुभांकर तिवारी ने 12वीं की परीक्षा में आठवीं रैंक पाई। शुभांकर बताते हैं कि पापा पवन कुमार तिवारी किसान हैं। खेती से घर खर्च चलाना मुश्किल है। लेकिन फिर भी वह किसी तरह परिवार चला रहे हैं। शुभांकर ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने के लिए तैयारी कर रहा हूं। किसान का बेटा हूं इसलिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने के लिए कुछ करने की सोच रहा हूं।

खेत बंटाई पर लेकर करा रहे पढ़ाई
12वीं में प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल करने वाले बाराबंकी के रामसनेहीघाट निवासी योगेश प्रताप सिंह आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। बताया कि पिता राजेंद्र प्रताप सिंह किसान हैं। खेत बंटाई पर लेकर किसी तरह घर चला रहे हैं। योगेश ने बताया कि इंटर में बिना ट्यूशन लिए ही पढ़ाई की। यूट्यूब पर कोर्स से जुड़े टॉपिक सर्च करके तैयारी की और मेरिट में स्थान ले आया। पापा ने यह देखा तो बहुत खुश हुए। पापा ने हम लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। अब उन्हें रिटर्न गिफ्ट देने की हमारी बारी है। 

सीएम से मिलने का सपना हुआ पूरा, लखनऊ शहर भी खूब भाया

मेधावी छात्र सम्मान में प्रदेश भर से आए छात्र-छात्राओं ने जहां एक ओर राजधानी की सैर की तो वहीं मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाकर फूले नहीं समाए। बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने कहा कि यहां आकर उनका सपना पूरा हो गया। किसी ने कहा कि वे यहां से नई ऊर्जा लेकर लौट रहे हैं तो किसी ने यह अवसर देने के लिए अमर उजाला को धन्यवाद दिया। 

सीएम से मिलने का अवसर मिला
अमर उजाला के सहयोग से सीएम योगी से मिलने का अवसर मिला। काफी अच्छा लगा। कॉलेज व परिवार के लिए गर्व की बात है।
-अथर्व श्रीवास्तव, रैंक-पांचवीं, सीतापुर

एक नई ऊर्जा लेकर जा रहे हैं हम

सीएम से मिलना ही अपने आप में बड़ी बात है। उनसे जो ज्ञान प्राप्त होगा, उससे मिली नई ऊर्जा लेकर जा रहे हैं हम।
- एकता वर्मा, रैंक-पांचवीं, रायबरेली

रिजल्ट से ज्यादा खुशी सम्मान पाकर
जब अपना रिजल्ट पता चला था, उस वक्त की खुशी से अधिक खुशी अब सीएम के हाथ से मिले सम्मान को पाकर हुई।
-आस्था सिंह, रैंक-चौथी, सीतापुर

इससे बढ़ता है हौसला
अमर उजाला ने प्रतिभाओं को सही और भरपूर सम्मान देने का अवसर प्रदान किया है। इस तरह केकार्यक्रम से विद्यार्थियों का हौसला बढ़ता है।
-इशिता वर्मा, रैंक-सातवें, सीतापुर

माता-पिता के लिए सम्मान का क्षण

माता-पिता व परिवार के लिए बहुत सम्मान का क्षण है। सीएम के विचारों को सुनकर ज्ञान प्राप्त हुआ।
-अजय प्रताप सिंह, रैंक-सातवीं, रायबरेली

पहली बार देखा ऐसा कार्यक्रम

कार्यक्रम में आने से पूरे परिवार को बहुत खुशी मिली। मैंने ऐसा कार्यक्रम जीवन में पहली बार देखा है। बहुत कुछ सीखने को मिला।
-ओमशी सिंह, रैंक-आठवीं, झांसी

खुशी का कोई ठिकाना नहीं

जब से पता लगा कि अमर उजाला की ओर से सम्मानित किया जाना है, खुशी का ठिकाना नहीं था।
-अंजलि चौहान, रैंक-आठवीं, मऊ

मेट्रो की सुविधा से थकान दूर हुई
लखनऊ में मेट्रो की सुविधा इतनी सुखदायी लगी कि वाराणसी से आने की सारी थकान दूर हो गई। सभी बड़े शहरों में मेट्रो की सुविधा होनी चाहिए।
-आशुतोष कुमार, रैंक-आठवीं, वाराणसी

सम्मान के बहाने शहर घूमा

लखनऊ आकर बहुत कुछ देखने को मिला। यहां के पार्क बहुत आकर्षक दिखे। चौड़ी सड़कों ने भी मन मोह लिया। सम्मान केबहाने शहर घूमने का मौका मिला।
-रोशनी निषाद, रैंक-नौवीं, फतेहपुर

अखबार का योगदान सराहनीय
 शिक्षकों व माता-पिता की बदौलत यहां तक पहुंचने का मौका मिला। इसमें अमर उजाला का योगदान सराहनीय है।
- अक्षय पटेल, रैंक-दसवीं, हरदोई

सीएम व कई मंत्रियों से मिलने का मौका

मुख्यमंत्री केसाथ ही प्रदेश के अन्य मंत्रियों को एक साथ मंच पर देखने को पहली बार अवसर मिला। इनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।
- अनुप्रिया जैन, रैंक-नौवीं, ललितपुर

सम्मान से बढ़ता है मनोबल
मेधावियों को सम्मानित करने से उनका मनोबल बढ़ता है। विद्यार्थी इससे प्रेरित होकर आगे भी लगन व मेहनत से पढ़ाई करते हैं।
-कशिश यादव, रैंक-सातवीं, रायबरेली

इतने सारे लोगों को एक साथ देखा

 साफ-सुथरा लखनऊ व यहां की आबोहवा बहुत अच्छी लगी। इतने सारे लोगों को एक साथ एक प्लेटफॉर्म पर देखने का पहली बार मौका मिला। नई प्रेरणा मिली।
-हर्षिता वर्मा, रैंक-सातवीं, मऊ

टीवी पर सुना था, आज सीएम को सामने से सुना

 सीएम हमारे आदर्श हैं। हम अक्सर उनके भाषणों को टीवी में सुनते हैं। आज उन्हें अपने सामने बोलते देखकर मन गदगद हो गया।
-संस्कृति ठाकुर, रैंक-दूसरी, मुरादाबाद

कच्चे मकान से लखनऊ के मंच तक
मेरा परिवार गांव में कच्चे मकान में रहता है। अमर उजाला की वजह से यहां तक पहुंचने का मौका मिला। लखनऊ की चमक-दमक और यहां की यातायात व्यवस्था बहुत अच्छी लगी।
-प्रिंस पटेल, रैंक-प्रथम

मेरी सफलता से मां-पापा खुश

पापा पिकअप चलाते हैं। घर में पांच बहने हैं। जिनकी सबकी जिम्मेदारी पापा केऊपर है। मेरी सफलता पर सभी को बहुत खुशी हुई है।
- किरन कुशवाहा, रैंक-दूसरी, कानपुर

सीएम ने जो कहा, उससे मिली राह
यहां आने पर हर किसी से शिक्षा की बातें सुनने को मिल रही हैं। सीएम से मिलने की लालसा थी। उनके भाषण से एक राह मिली।
-राज यादव, रैंक-आठवीं, कानपुर

इतने लोगों का साथ प्रेरणादायक
सीएम से मिलने केलिए बहुत उत्सुक हूं। कार्यक्रम में आकर बहुत कुछ देखने व सुनने को मिला। साथ ही इतने लोगों से मिलकर नई प्रेरणा मिली।
-प्रांसी द्विवेदी, रैंक-पांचवीं, कानपुर

सीएम के हाथों सम्मान पाने से खिले मेधावियों के चेहरे 

‘अमर उजाला’ के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2022 में शीर्ष दस स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के हाथों सम्मानित होने पर इन विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।

मुख्यमंत्री ने इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में राज्य स्तरीय मेरिट में स्थान प्राप्त करने वाले फतेहपुर की दिव्या व दिव्यांशी, प्रयागराज की अंशिका यादव, जिया मिश्रा व आंचल यादव, बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह व अभिमन्यु वर्मा, फतेहपुर के बालकृष्ण, कानपुर के प्रखर पाठक, मुरादाबाद के जतिन राज और लखनऊ की स्वाति गोस्वामी को पुरस्कार व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। उन्होंने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की मेरिट में स्थान प्राप्त करने वाले कानपुर के प्रिंस पटेल, किरण कुशवाहा, नैंसी वर्मा, प्रांशी द्विवेदी व पलक अवस्थी, मुरादाबाद की संस्कृति ठाकुर, प्रयागराज की आस्था सिंह, कन्नौज के अनिकेत शर्मा, सीतापुर की एकता वर्मा व शीतल वर्मा और रायबरेली के अथर्व श्रीवास्तव को सम्मानित किया।

जिला स्तर पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी और परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने सम्मानित किया। 

इस मौके पर प्रमुख सचिव गृह व सूचना संजय प्रसाद, माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्दिया, मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार, सूचना निदेशक शिशिर, अपर निदेशक अंशुमान राम त्रिपाठी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी सरवन बघेल, माध्यमिक शिक्षा निदेशक सरिता तिवारी, संयुक्त निदेशक भगवती सिंह, वीके पांडेय, विकास श्रीवास्तव, एमएलसी विशाल सिंह, मनीष शुक्ला, रामशंकर मौजूद थे।

एक ‘गौरव पथ’ जिले में तो एक ‘गौरव मंच’ राजधानी में
टॉपर्स के लिए सरकार ने उनके जिले में उनके नाम पर एक सड़क बनाने की घोषणा की है। इसे गौरव पथ का नाम दिया गया है। अमर उजाला के मंच पर सीएम से सम्मान पाकर छात्र छात्राएं बोल उठे कि एक गौरव पथ उनके जिले में उनके लिए बनाया गया तो एक गौरव मंच उनके लिए प्रदेश की राजधानी में आज बना है। यह फख्र की बात है। इससे उन्हें आगे बढ़ने में प्रेरणा मिलेगी। याद रहेगा कि किस तरह से खुद सीएम ने उनका सम्मान किया और यह मंच हमेशा उनके जेहन में ताजा रहेगा।


मन की उद्गारों को भी छात्रों ने कर दिया व्यक्त
कार्यक्रम में कॅरिअर काउंसिलिंग सेशन भी चला। काउंसलर अमित कुमार निरंजन ने कहा कि किन छात्रों को वीडियो गेम पसंद है तो पहले टॉपर सकुचाए पर जब उन्होंने कहा कि वीडियो गेम एक बड़ा कॅरिअर है। टॉपर गेम डेवलप कर बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं तो छात्रों ने अपने मन के उदगार व्यक्त कर दिए। काफी छात्रों ने कहा कि उन्हें वीडियो गेम खेलना पसंद है। काउंसिलिंग में यह तथ्य भी सामने आया कि अपनी पसंद नापसंद को छुपाना नहीं चाहिए।



साथियों को लाइव प्रसारण दिखाते रहे
इस सम्मान के पलों को विद्यार्थियों ने साथियों व परिवार के अन्य लोगों संग साझा करने के लिए कार्यक्रम को लाइव दिखाया। अधिकतर छात्र छात्राओं के साथ परिवार से कोई न कोई आया था। ऐसे में जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो इसका लाइव दिखाने के लिए साथ आए सदस्य ने मोबाइल से सोशल मीडिया या वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिजनों एवं टॉपर के साथियों को भी इन पलों का साक्षी बनाया।

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