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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP News: After the end of recognition of four departments, there is a crisis on two more, NCISM has banned

UP News : चार विभागों की मान्यता समाप्ति के बाद दो और पर संकट, एनसीआईएसएम ने लगा दी है रोक

Fri, 11 Nov 2022 06:01 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 11 Nov 2022 06:01 PM IST
सार

राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में इस समय कुल 14 विभाग हैं। इनमें से आठ विभाग में पीजी कोर्स का संचालन होता है। एनसीआईएसएम ने एक दिन पहले ही बाल रोग, क्रिया शरीर, रचनासारी और मौलिक सिद्धांत विभाग में पीजी कोर्स के संचालन पर रोक लगाई है।

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UP News: After the end of recognition of four departments, there is a crisis on two more, NCISM has banned
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

आयुर्वेद कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर अब पाठ्यक्रम संचालन पर पड़ना लगा है। नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एनसीआईएसएम) ने राजकीय आयुर्वेद कॉलेज टूड़ियागंज के चार विभागों में पीजी कोर्स के संचालन पर रोक लगाई है और अगले सत्र के लिए दो अन्य विभागों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इनमें से एक विभाग में मानक के अनुसार शिक्षक नहीं हैं तो वहीं दूसरे विभाग में शिक्षक की सेवानिवृत्ति के बाद यही स्थिति बनने वाली है।

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राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में इस समय कुल 14 विभाग हैं। इनमें से आठ विभाग में पीजी कोर्स का संचालन होता है। एनसीआईएसएम ने एक दिन पहले ही बाल रोग, क्रिया शरीर, रचनासारी और मौलिक सिद्धांत विभाग में पीजी कोर्स के संचालन पर रोक लगाई है। मानक के अनुसार पीजी कोर्स के संचालन के लिए विभाग में कम से कम एक प्रोफेसर होना अनिवार्य है। इन विभागों में इस समय एक भी प्रोफेसर नहीं है। इसके अलावा काय चिकित्सा विभाग में अभी तक संविदा के आधार पर प्रोफेसर था, जिसके जाने के बाद अब यहां भी प्रोफेसर नहीं बचा है। इसके अलावा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में फिलहाल तो प्रोफेसर हैं, लेकिन जल्द ही यहां सेवानिवृत्ति होने वाली है। इसके बाद यहां पर भी वही संकट खड़ा होने वाला है।
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प्रमोशन से होनी है प्रोफेसर पद पर नियुक्ति
आयुर्वेद विभाग के नियमों के अनुसार इन कॉलेजों में प्रोफेसर का पद दो तरीके से भरा जाता है। इसके अनुसार 50 फीसदी भाग प्रमोशन और 50 फीसदी पर नई नियुक्ति का नियम है। विभाग के शिक्षकों ने बताया कि प्रमोशन की प्रक्रिया वर्ष 2019 में हुई थी, लेकिन एक पद पर विवाद की स्थिति में मामला न्यायालय तक पहुंच गया था। जहां इस पर स्टे लगा दिया गया। विभाग ने एक पद के बजाय सभी पदों की प्रक्रिया रोक दी इसकी वजह से यह स्थिति बन गई।
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आधी हो गई पीजी की सीट
राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में अभी तक पीजी की कुल 49 सीट थीं। चार विभागों की मान्यता समाप्त होने के बाद 22 सीट कम हो गई है। इसके बाद अब यहां पर सीट की संख्या केवल 27 बची है। दो और विभाग की मान्यता पर संकट होने पर यह संख्या 20 से भी नीचे आ सकती है।


पीजी पाठ्यक्रमों में चार कोर्स की मान्यता समाप्त की गई है, लेकिन हम इसे शुरू कराने के लिए प्रयासरत हैं। जिन विभागों में प्रोफेसर नहीं हैं, वहां पर संविदा के आधार पर भर्ती करके कमी पूरी की जाएगी। हमारा प्रयास है कि पीजी पाठ्यक्रमों की सीट कम न हों।
डॉ. पीसी सक्सेना, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद कॉलेज। 

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