UP: बिजली की नई दरों का जल्द होगा एलान, 10% छूट बरकरार रखने की मांग; बिजली कर्मियों की छंटनी पर बड़ा अपडेट
उत्तर प्रदेश में नई बिजली दरों की घोषणा जल्द होने की संभावना है। उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरें न बढ़ाने और 10 फीसदी छूट जारी रखने की मांग की है। वहीं बिजली कर्मचारियों की कमी, संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित भर्ती और बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
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प्रदेश में बिजली दर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग जल्द नई दरें घोषित कर सकता है। उम्मीद है कि इस वर्ष भी बिजली दरें नहीं बढ़ेंगी। उधर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने घोषणा की है कि नोएडा पॉवर कंपनी के उपभोक्ताओं को 10 फीसदी छूट बरकरार रखने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
प्रदेश में वर्ष 2026–27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता के तहत पॉवर कॉर्पोरेशन व बिजली वितरण कंपनियों द्वारा वर्ष 2024–25 के ट्रूअप में लगभग 3,995 करोड़ और वर्ष 2026–27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर दर्शाया गया है।
इस तरह लगभग 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाकर बिजली दरों में वृद्धि की मांग की गई है। विभिन्न स्थानों पर हुई जनसुनवाई में उपभोक्ता परिषद ने इसे खारिज किया। अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। इसका भुगतान करने के लिए बिजली दरें 10 से 20 फीसदी कम की जाएं।
जनसुनवाई के बाद नियामक आयोग के समक्ष राज्य सलाहकार समिति की बैठकें भी हो चुकी हैं। अब नियामक आयोग कभी भी नई बिजली दरों की घोषणा कर सकता है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में किसी भी कीमत पर बिजली दरें नहीं बढ़ाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश लगातार छठवें साल भी बिजली दरें नहीं बढ़ाने वाला राज्य बनेगा।
पदाधिकारियों ने बिजली कर्मियों की छंटनी पर जताई चिंता
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का कहना है कि बिजली की बढ़ती मांग और कर्मचारियों की भारी कमी से आपूर्ति व्यवस्था गड़बड़ा रही है। निगमों में कर्मचारियों की संख्या 30 हजार से कम हो गई है। समिति की फील्ड हॉस्टल में शुक्रवार को हुई बैठक में पदाधिकारियों ने बिजली कर्मियों की छंटनी पर चिंता जताई।
समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि वर्ष 2000 में करीब 60 लाख उपभोक्ता और 1.20 लाख कर्मचारी थे। अब उपभोक्ता करीब 3.73 करोड़ हो गए हैं और कर्मचारियों की संख्या 30 हजार हो गई है। वहीं, वर्ष 2000 में बिजली की मांग 6500-7000 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर लगभग 33 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। ऐसे में सीमित कर्मचारियों के भरोसे भरपूर बिजली देने का दावा हवाई है। यही वजह है कि रोस्टर से अधिक बिजली देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को कई घंटे कम बिजली मिल पाती है।
समिति की प्रमुख मांगें
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए। मार्च 2023 से अब तक की सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां समाप्त की जाए। रिक्त पदों पर नियमित भर्ती हो। निजीकरण के नाम पर 45 फीसदी से अधिक संविदा कर्मियों की हुई छंटनी को खत्म किया जाए।