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यूपी: पीएम पर अपमानजनक टिप्पणी मामले में नेहा सिंह राठौर को नहीं मिली राहत, केस रद्द की याचिका खारिज
Sun, 21 Sep 2025 07:47 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 21 Sep 2025 07:47 PM IST
सार
Neha Singh Rathore: लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री पर टिप्पणी मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। लखनऊ खंडपीठ ने यह याचिका खारिज कर दी है।
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लोक गायिका नेहा सिंह राठौर।
- फोटो : फेसबुक से साभार।
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विस्तार
लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री पर टिप्पणी मामले में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नेहा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार चुनाव और हिंदू-मुस्लिम राजनीति से जुड़े अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आग्रह किया था।
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न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने नेहा सिंह राठौर को 26 सितंबर को जांच अधिकारी के सामने पेश होने और पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप पहली नजर में संज्ञेय अपराध दर्शाते हैं, जिनकी पुलिस द्वारा जांच की जानी उचित है। अदालत ने कहा कि उनके ट्वीट्स का समय बेहद अहम है, क्योंकि वे पहलगाम हमले के तुरंत बाद पोस्ट किए गए थे।
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कोर्ट ने कहा कि "याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया जाता है, जो एफआईआर के तहत लंबित है। वह जांच में सहयोग करने के लिए 26 सितंबर को सुबह 11 बजे जांच अधिकारी के सामने उपस्थित हो और पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक जांच में सहयोग करती रहें। “
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गौरतलब है कि नेहा सिंह राठौर के खिलाफ इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज थाने में अप्रैल में एफआईआर दर्ज हुई थी। उन पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ, जब उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी बिहार आए ताकि पाकिस्तान को धमका सकें और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोर सकें। उन्होंने यह भी लिखा था कि आतंकियों को ढूंढने और अपनी गलती मानने के बजाय बीजेपी देश को युद्ध की तरफ धकेलना चाहती है।
इस केस को रद्द करने का आग्रह कर नेहा के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करने का मौलिक अधिकार है। राज्य का कोई भी प्राधिकारी ऐसे मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में इन पोस्टों में प्रधानमंत्री के नाम का अपमानजनक तरीके से इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि राठौर ने भाजपा पर अपने निहित स्वार्थों के लिए पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है।