कश्मीर से लौटे विधायकों ने सुनाई दास्तां, बोले- सुरक्षाबल कर रहे कड़ा संघर्ष
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कश्मीर में फोर्स को कड़ी चुनौती और संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। वहां भय और आतंक का माहौल है। यह कहना है कश्मीर की यात्रा पर गए कि विधानसभा की लोक लेखा निधि कमेटी के सदस्यों का।
हिंसा के चलते वे तीन दिन तक होटल में ही कैद रहे। इसके चलते उनकी विभिन्न विभागों के साथ प्रस्तावित बैठक भी नहीं हो पाई। अजय कपूर की अध्यक्षता में यह कमेटी नौ जुलाई को श्रीनगर पहुंची थी। कमेटी में छह विधायक और विधानसभा के पांच अफसर शामिल थे।
समिति के सदस्य व महोबा के विधायक राजनारायण बुधौलिया ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि कश्मीर पहुंचने से पहले ही हालात तनावपूर्ण हो गए थे और कर्फ्यू लग चुका था। लिहाजा, कमेटी के तयशुदा कार्यक्रम स्थगित हो गए।
मजबूरन सभी सदस्य होटल में ही कैद रहे। फोर्स के साथ आसपास के कुछ स्थानों पर जरूर गए, लेकिन वहां जनजीवन अस्त-व्यस्त था। उन्होंने कहा कि कश्मीर में फोर्स कठिन परिस्थितियों में सीधे संघर्ष का सामना कर रही है। बुधौलिया ने बताया कि उनके पास पहले से ही 12 जुलाई को दिल्ली वापसी के टिकट थे। इसलिए कमेटी को बिना कारण तीन दिन श्रीनगर में ही रुकना पड़ा।
सेना की सख्ती से श्रीनगर में नहीं हुई हिंसा
लखीमपुर की मोहम्मदी सीट से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी बताते हैं कि श्रीनगर में कर्फ्यू लगा हुआ था। सुरक्षाबलों की सख्ती से वहां हिंसा नहीं हुई। सरकार और सुरक्षा बलों का इतना दबाव था कि देश विरोधी और असामाजिक तत्व दहशतगर्दी नहीं फैला सके।
....पर आतंकियों के प्रति दिखी हमदर्दी
बरेली की फरीदपुर सीट से विधायक डॉ. सियाराम सागर का कहना है कि कर्फ्यू के चलते होटल से बाहर निकलना संभव नहीं था। फिर भी, डल झील के आसपास माहौल तनावपूर्ण नहीं था।
हम लोग वहां गए और स्थानीय लोगों से बातचीत भी की। पर्यटन को वे मुख्य व्यवसाय मानते हैं, लेकिन तीन दिन वहां रहने पर पता चला कि बहुत लोग पाक समर्थित आतंकियों का समर्थन कर रहे हैं।