यूपी: बसपा के आंतरिक विवाद में मायावती ने किया आंबेडकर का जिक्र, आकाश आनंद को दिखाया आईना
BSP internal dispute: बसपा में आतंरिक विवाद जारी है। मायावती ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को फिर जिम्मेदारियां देने का निर्णय लिया है।
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को लिखे पत्र का जिक्र कर आकाश आनंद को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि ’बहुजन समाज’ ही मेरा असली परिवार है। सत्ता की मास्टर चाबी के जरिये उन्हें ’शोषित से शासक वर्ग’ बनाना मेरा मिशनरी लक्ष्य व प्रतिज्ञा है। इसके लिए मैं अपने भाई-बहनों आदि के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकती हूं। जैसा डाॅ. आंबेडकर ने उदाहरण पेश किया, यही मेरा भी संकल्प है।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि उन्होंने यह फैसला डॉ. भीमराव आंबेडकर के लिखे एक पत्र से प्रभावित होकर लिया है जो उन्होंने अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को लिखा था। डॉ. आंबेडकर ने लिखा था कि 'तुम्हें सूचित करना है कि उपशम के कई पत्राचार मिले हैं कि तुम उन्हें बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस के एकाउंटेंट व कैशियर के रूप में उनकी ड्यूटी नहीं करने दे रहे हो। तुम्हें ऐसा लगता है कि तुम प्रेस को अपने कब्जे में ले लोगे। मैं तुम्हें आगाह कर रहा हूं कि प्रेस पब्लिक प्रापर्टी है। तुम्हारा आचरण उचित नहीं रहा है। अगर तुमने मेरे अंतिम निर्देश की परवाह नहीं की तो मैं आपको प्रेस से बाहर कर दूंगा। इस चेतावनी के बाद भी नहीं मानने पर आप पर मुकदमा भी करूंगा।
23 को बुलाई बैठक
बसपा सुप्रीमो ने 23 सितंबर को पार्टी के देश भर के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है जिसमें ईशान को अहम जिम्मेदारी देने की घोषणा हो सकती है। साथ ही अगले वर्ष पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी मंथन होगा। खासकर यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव में प्रत्याशियों के चयन पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बसपा सुप्रीमो ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत से जुटने को कहा है।
बसपा में आने से पहले दीपिका आउट, ईशान की फिर इंट्री
बहुजन समाज पार्टी में फिर बड़ा फेरबदल हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को फिर जिम्मेदारियां देने का निर्णय लिया है। वहीं अपनी भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में आने से पहले की बाहर का रास्ता दिखा दिया। ईशान को मायावती ने बीते दिनों मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया था, लेकिन छह दिन बाद ही पद से हटा दिया था। वहीं बड़े भतीजे आकाश आनंद को लेकर उनकी नाराजगी अभी बरकरार है।
बसपा सुप्रीमो ने रविवार को सोशल मीडिया पर अपने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शादी के बाद से आकाश आनंद के रवैये की वजह से कुछ दिन पहले फिर से पार्टी से अलग करना पड़ा था। वह अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के जंजाल में फंस चुके हैं, जिसकी वजह से आकाश को वापस लेना पार्टी के लिए विश्वासघात होगा। मैं यह पार्टी विरोधी कार्य नहीं कर सकती हूं। भाई आनंद कुमार के परिवार में से किसे पार्टी में आगे करूं, यह मेरे लिए दुविधा बनी थी, जिसे विराम देते हुए अब मैंने किसी ऐसे सदस्य को पार्टी में आगे करने का निर्णय लिया है जो आकाश के नक्शेकदम पर बिल्कुल भी न चले।
आनंद की बेटी (दीपिका आनंद) की शादी के बाद इनका मामला भी यदि आकाश की तरह ही निकला तो यह भी पार्टी हित में सही नहीं होगा। इसी वजह से अब दोनों को पार्टी से दूर रखने का फैसला लिया गया है जिसमें अब कोई फेरबदल नहीं होगा। केवल ईशान को ही सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा। यदि इन्होंने पार्टी विरोधी कोई भी कृत्य किया तो बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार में से किसी को पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। तब पार्टी में ही कार्यरत दलित वर्ग के किसी भी एक मिशनरी व वफादार कार्यकर्ता को ही आगे किया जाएगा।
पार्टी के लिए रिश्ते-नातों का मोह नहीं
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यदि पार्टी के लोगों को राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना होगा। बसपा संस्थापक कांशीराम ने भी राजनीति में आने के बाद अपने रिश्तेदारों को को राजनीतिक लाभ देने से दूर रखा है। उन्हें केवल निःस्वार्थ भावना से पार्टी संगठन में कार्य करने की इजाजत दी। उनसे प्रेरित होकर मैंने भी उनके पदचिन्हों पर चलकर अपनी जिंदगी ’बहुजन समाज’ के लिए समर्पित कर दी।