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यूपी: मायावती ने आकाश आनंद पर गिराई गाज, राष्ट्रीय संयोजक का पद छीना, कहा- अभी अपरिपक्व
Thu, 03 Sep 2026 12:35 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 03 Sep 2026 12:35 PM IST
सार
Akash Anand: आकाश आनंद की भूमिका को लेकर मायावती ने एक बार फिर से पलटी मारी है। उन्होंने कहा कि वह अभी परिपक्व नहीं हैं इसलिए उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर किया जाता है।
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मायावती ने आकाश आनंद पर दिया बयान।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मायावती ने आकाश आनंद को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व (मैच्योर) होने की बात कहते हुए पार्टी की किसी भी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जिस तरह उन्होंने अपने परिवार को केवल पार्टी के कार्य करने की इजाजत दी थी, चुनाव लड़ाने या पद देने के खिलाफ थे। उसी संकल्प पर चलते हुए आकाश आनंद को भी केवल पार्टी में कार्य करने की अनुमति दी गई है।
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मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी और परिपक्वता की आवश्यकता है ताकि विरोधी दलों द्वारा साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों के इस्तेमाल से पार्टी को होने वाले संभावित चुनावी नुकसान से बचाया जा सके। इसके साथ ही आकाश आनंद ने भी अपना एक्स प्रोफाइल बदल लिया है। उन्होंने राष्ट्रीय संयोजक की जगह बसपा कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बताई है। इससे आकाश के समर्थकों में निराशा है।
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उठाए ये मुद्दे
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल-इंडिया स्तर की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगठन को मजबूत करने और ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख साफ करने संबंधी निर्देश जारी किए। बैठक के दौरान उन्होंने पिछले कार्यों की समीक्षा की और सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को कमियों को दूर कर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।
कांशीराम जी के संघर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन मूवमेंट का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर दिए गए बयानों का संज्ञान लेते हुए मायावती ने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए आजीवन संघर्ष किया, जबकि आरक्षण, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा और महिला अधिकारों के मामलों में आरएसएस के दावों में सच्चाई की कमी दिखती है। उन्होंने संघ को सलाह दी कि वह खुद भी बाबा साहेब के मानवतावादी व समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी इसका पालन करवाए।