20 रुपए के पौवे ने मचाया मौत का तांडव!
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चढ़ावे की आंच से धधकती अवैध शराब की भट्ठियों में तैयार 20 रुपये के पौवा ने मलिहाबाद के ग्राम दतली में मौत का तांडव मचाया। आबकारी विभाग व पुलिस की शिथिलता से बेखौफ धंधेबाज इस ठंड में घरों व बाग-बगीचों में भट्ठियां सुलगाकर कच्ची शराब बना रहे हैं।
मलिहाबाद हो या सरोजनीनगर, मोहनलालगंज या बीकेटी सभी इलाकों में अवैध शराब का धंधा कुटीर उद्योग की तरह चल रहा है। इसमें पुरुष ही नही, महिलाएं और बच्चे भी जुटे देखे जा सकते हैं। सुबह होते ही बाग-बगीचों व नहरों के किनारे भट्ठियां सुलगा कर हर दिन सैकड़ों लीटर देसी शराब बनाई जाती है।
बाद में सस्ती दर पर बेचने के लिए इसे पाउच में पैक किया जाता है। गांवों में इन अवैध देसी शराब के कारोबारियों के बारे में क्षेत्रीय आबकारी निरीक्षक से लेकर थाना पुलिस तक सबको पता रहता है। फिर भी ये लोग हर रोज की बंधी रकम की लालच में मलिहाबाद जैसे किसी बड़े हादसे के इंतजार में आंख बंद किए रहते हैं।
ऐसे तैयार होता है जानलेवा पौवा
अवैध शराब के धंधे से जुड़े लोग कच्ची शराब बनाने के लिए पीने वालों की सेहत दांव पर लगाने से भी नहीं हिचकते। कम कीमत पर ज्यादा नशा देने के लिए नाम मात्र के महुआ के साथ एक लीटर स्प्रिट से साढ़े तीन लीटर कच्ची शराब बनाने के लिए इसमें यूरिया, आक्सीटोसिन इंजेक्शन व गुड़ का शीरा मिलाया जाता है।
इससे तैयार देसी शराब को पॉलीथिन के पाउच में पैक कर 20 रुपये की दर से गांवों में बेचा जाता है। प्राय: कमजोर वर्ग के लोग इसका शिकार बनते हैं। जानकार बताते हैं कि मलिहाबाद के दतली गांव में धंधेबाजों ने सस्ती देसी दारू के नाम पर स्प्रिट में नशे की टेबलेट व नींद की गोली के साथ केमिकल मिला कर जहर तैयार किया था। न केवल दतली बल्कि आसपास के और गांव वाले भी सस्ती शराब के चक्कर में पड़ गए।
मिलावटी देसी दारू की लागत कम रखने और नशा बढ़ाने के लिए बेहद खतरनाक केमिकल व यूरिया जैसा पदार्थ मिलाते हैं। इस तरह तैयार शराब लीवर, किडनी, आंखों की रोशनी और शरीर के तंत्रिका तंत्र को चौपट कर देता है। अधिकतर मामलों में ऐसी कच्ची दारू पीने वालों की मौत रोकना डाक्टरों के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाता है। शरीर पर इसका असर इतना तेज होता है कि कुछ ही घंटों में जान चली जाती है।
गांव-गांव में धधकती कच्ची शराब की भट्ठी
जिले के माल, मलिहाबाद, गोसाईगंज, सरोजनीनगर व बंथरा में अवैध शराब बनाने का धंधा काफी बड़े पैमाने पर चल रहा है। अमौसी, गंगानगर हनुमानपुरी, बसंतखेड़ा, लतीफनगर, तिर्वा, ऐन, बरकोता, दरियापुर, खटोला, मेमौरा व हरौनी सहित करीब डेढ़ दर्जन गांवों में पुलिस की शह पर खुलेआम कच्ची शराब बनाई जाती है।
सरोजनीनगर के अमौसी व हनुमानपुरी तो आसपास के जिलों तक मशहूर हैं। साथ ही इन्द्रजीतखेड़ा, हुल्लासखेड़ा, उम्मेरखेड़ा, जगरौली, खुजौली, चौधरा, छेब्यूखेड़ा, हुसैनी, राजाखेड़ा, सिसेंडी, गोला, मधुवापुर, मोहद्दीपुर, सरावां, अमानीगंज, फिरोजपुर, तिलसवां, पाड़पुर, दतली, बुलबुलखेड़ा, कुंडराखुर्द, गढ़ी, गौदा, बेहता नाला, दयालपुर, निगोहां, रामपुर गढ़ी, जमुनी, जवाहरखेड़ा, लालपुर, कुटिया, नरायनखेड़ा, करनपुर, नडौली, रामदासपुर, शिवपुरा, भोलाखेड़ा, ग्राम घोला, औलियाखेड़ा, मधवापुर, शेरनगर, गोपालपुर, बेलगढ़ा, लुधौसी व खडौहा में यह धंधा बेखौफ संचालित है।
यहां देसी पाउच 15 से 20 रुपये में बिकती है जबकि आबकारी विभाग द्वारा तैयार देसी पौवा 64 रुपये में मिलता है। कच्ची शराब की रोकथाम को आबकारी विभाग समय-समय पर महज खानापूर्ति को अभियान चलाता है। क्षेत्रीय पुलिस के साथ मिलकर कुछ जगहों पर छापेमारी कर छोटे-मोटे धंधेबाजों को दस-पंद्रह लीटर देसी शराब व महुआ के साथ पकड़कर कार्रवाई पूरी मान ली जाती है। दूसरी तरफ चढ़ावे की आंच से गर्म होती भट्ठियां धधकती रहती हैं।