फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Lok Sabha Election 2024 Nishad Samaj influence on 23 Lok Sabha seats

UP: चुनावी नैया के खेवनहार बन रहे निषाद... इन 23 लोकसभा सीटों पर इस समाज का प्रभाव; पढ़ें दस सीट का हाल

Wed, 27 Mar 2024 11:46 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 27 Mar 2024 11:46 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में निषाद समाज का 23 लोकसभा सीटों पर प्रभाव है। ऐसे में निषाद समाज को हर पार्टी लुभाने की कोशिश में लगी है। 

विज्ञापन
UP Lok Sabha Election 2024 Nishad Samaj influence on 23 Lok Sabha seats
UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश की करीब 23 लोकसभा सीटों पर प्रभाव रखने वाले निषाद समुदाय के लोग तकरीबन हर दल की नैया के खेवनहार बनते रहे हैं। यह उनकी सियासी ताकत ही है कि हर दल उन्हें लुभाने में जुटा हुआ है। 
विज्ञापन


सत्तापक्ष मछुआ बोर्ड बनाने और मत्स्य विभाग को स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने को बड़ी उपलब्धि बता रहा है, तो विपक्ष अपने कार्यकाल के दौरान समाज हित में किए गए कार्यों की दुहाई दे रहा है। यह बिरादरी इस बार किसके साथ रहेगी, इस पर सभी की निगाहें हैं।
विज्ञापन


23 लोकसभा सीटों पर निषाद समाज की आबादी करीब एक से तीन लाख तक है। निषाद के साथ ही इन्हें बिंद, मल्लाह, केवट, कश्यप, बाथम, तुरैहा, धीमर, रायकवार के रूप में पहचाना जाता है। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक केवट, मल्लाह, निषाद की पिछड़ी जातियों में भागीदारी 4.33 फीसदी है और कहार, कश्यप की 3.31 फीसदी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


जबकि निषाद समुदाय के लोगों का दावा है कि समिति की रिपोर्ट में सिर्फ निषाद, मल्लाह, केवट को लिया गया है। मध्य उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मल्लाह बिरादरी के लोग कश्यप लिखते हैं, जबकि विंध्य क्षेत्र में बिंद। ऐसे में इनकी कुल भागीदारी करीब आठ फीसदी है।

निषाद बहुल 10 लोकसभा सीटों का हाल
  • गोरखपुर : करीब चार लाख निषाद मतदाता हैं। भाजपा ने वर्तमान सांसद रवि किशन को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने काजल निषाद को मैदान में उतारा है।
  • भदोही : करीब तीन लाख बिंद, निषाद मतदाता हैं। अभी भाजपा ने यहां उम्मीदवार तय नहीं किए हैं, जबकि सपा ने यह सीट तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ी है।
  • संतकबीरनगर : करीब दो लाख निषाद हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद प्रवीण निषाद को दोबारा मौका दिया है। सपा ने उम्मीदवार तय नहीं किए हैं।
  • अंबेडकरनगर : यहां करीब एक लाख निषाद हैं। भाजपा ने बसपा से आए रितेश पांडेय पर दांव लगाया है, जबकि सपा ने लालजी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है।
  • सुल्तानपुर : करीब एक लाख निषाद हैं। भाजपा ने मेनका गांधी को फिर टिकट दिया है, जबकि सपा ने भीम निषाद को मौका दिया है।

मिर्जापुर : यहां करीब ढाई लाख निषाद मतदाता हैं। यह सीट अपना दल (सोनेलाल) के खाते में है। सपा ने राजेश एस बिंद को मौका दिया है।
फतेहपुर : यहां करीब दो लाख निषाद वोटर हैं। भाजपा ने सांसद साध्वी निरंजन ज्योति पर फिर दांव लगाया है। सपा ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
जौनपुर : करीब एक लाख निषाद हैं। भाजपा ने कृपाशंकर सिंह को मौका दिया है। सपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
प्रयागराज :  यहां करीब डेढ़ लाख निषाद हैं। यहां से रीता बहुगुणा जोशी सांसद हैं। गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के पास है। अभी तक किसी पक्ष ने उम्मीदवार नहीं उतारा है।
फतेहपुर सीकरी :  यहां करीब दो लाख निषाद हैं। भाजपा ने सांसद राजकुमार चाहर को दोबारा मौका दिया है, जबकि गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के पास है।
(नोट- जातीय आंकड़ा विभिन्न पार्टियों के दावों के मुताबिक)

निषाद समाज की सियासी ताकत
वर्ष 1926 में जब डॉ. भीमराव आंबेडकर बॉम्बे प्रेसीडेंसी से एमएलसी बने थे, उस समय संयुक्त प्रांत से कोर्ट ऑफ अवध के वकील बाबू रामचरणलाल मल्लाह भी एमएलसी चुने गए थे।
  • 1952 के आम चुनाव में महात्मा गांधी के शिष्य प्रभुदयाल विद्यार्थी बांसी से पहले विधायक बने।
  • 2022 में आठ विधायक चुने गए, इनमें छह   भाजपा के और दो सपा के हैं। इस समय भाजपा से राज्यसभा में समाज के दो और लोकसभा में पांच सांसद हैं।

निषाद पार्टी के गठन के बाद समाज को सम्मान मिला। सभी दल इस समुदाय को टिकट देने के लिए विवश हुए। मछुआ कल्याण बोर्ड बनने से समाज को लाभ मिल रहा है। पहली बार सदन में सांविधानिक सुरक्षा का मुद्दा उठा।  - डॉ. संजय निषाद, मत्स्य मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
 

भाजपा ने निषादों से वादाखिलाफी की। सरकार में शामिल होकर सत्तासुख लेने वालों से सावधान रहना होगा। निषाद मछुआ समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा। -चौधरी लौटनराम निषाद, राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय निषाद संघ
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed