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UP: भंवर में फंसी भाजपा की नाव... निषाद मतों को साधने में विफल रही पार्टी; ओबीसी ने भी दौड़ाई साइकिल
Sun, 26 May 2024 04:11 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सुल्तानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 26 May 2024 04:11 PM IST
सार
यूपी की इस सीट पर भाजपा की नाव भंवर में फंस गई है। पार्टी निषाद मतों को साधने में विफल रही। ओबीसी ने भी साइकिल खूब दौड़ाई। इसौली में सोनू-मोनू फैक्टर चला। करीबियों ने भी साथ छोड़ दिया। बसपा त्रिकोणीय मुकाबला नहीं बना पाई। दलित मत भी बसपा से छिटक गए।
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UP Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूरे दिन वोटों का जो उतार चढ़ाव, जातीय गुणा-भाग जिले में दिखाई दिया उससे भाजपा की मौजूदा सांसद मेनका गांधी की नाव मझधार में फंसी नजर आ रही है। बसपा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में सफल नहीं हो पाई। इसलिए मेनका का सीधा मुकाबला गठबंधन के प्रत्याशी से ही रहा, जो बेहद कांटे का दिख रहा है।
चुनाव की शुरुआत में ही सपा ने भाजपा के स्थायी वोटर बन चुके निषाद मतों में सेंध लगाने के लिए निषाद प्रत्याशी मैदान में उतारा था, जिसकी काट के लिए भाजपा ने हर चाल चली। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से लेकर वरुण गांधी तक ने निषाद बहुल क्षेत्रों में जोर लगाया। लेकिन, लाख कोशिशों के बावजूद सपा के खाते में जा रहे इस वोट बैंक में भाजपा बड़ी सेंध नहीं लगा पाई।
इसके बावजूद सुल्तानपुर सीट पर भाजपा मजबूत नजर आई। यहां भाजपा के वोटर बूथों तक जाते नजर आए और कार्यकर्ता भी मेहनत करते दिखे। लंभुआ में हालात अलग दिखे। यहां ओबीसी मतदाता सपा के पक्ष में लामबंद नजर आया। यही नहीं, दलित वर्ग के भी कुछ मतदाता बसपा से छिटककर सपा में जाते नजर आए।
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इसौली विधानसभा क्षेत्र के गांवों में भद्र बंधुओं सोनू और मोनू सिंह के सपा में शामिल होने का असर दिखाई दिया। भाजपा का प्रचार करने वाले कई प्रमुख लोग भी मतदान के दिन शांत नजर आए। जिले में अधिकांश मतदान केंद्रों पर सपा और भाजपा की मौजूदगी प्रभावी नजर आई।
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चुनाव की शुरुआत में ही सपा ने भाजपा के स्थायी वोटर बन चुके निषाद मतों में सेंध लगाने के लिए निषाद प्रत्याशी मैदान में उतारा था, जिसकी काट के लिए भाजपा ने हर चाल चली। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से लेकर वरुण गांधी तक ने निषाद बहुल क्षेत्रों में जोर लगाया। लेकिन, लाख कोशिशों के बावजूद सपा के खाते में जा रहे इस वोट बैंक में भाजपा बड़ी सेंध नहीं लगा पाई।
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इसके बावजूद सुल्तानपुर सीट पर भाजपा मजबूत नजर आई। यहां भाजपा के वोटर बूथों तक जाते नजर आए और कार्यकर्ता भी मेहनत करते दिखे। लंभुआ में हालात अलग दिखे। यहां ओबीसी मतदाता सपा के पक्ष में लामबंद नजर आया। यही नहीं, दलित वर्ग के भी कुछ मतदाता बसपा से छिटककर सपा में जाते नजर आए।
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इसौली विधानसभा क्षेत्र के गांवों में भद्र बंधुओं सोनू और मोनू सिंह के सपा में शामिल होने का असर दिखाई दिया। भाजपा का प्रचार करने वाले कई प्रमुख लोग भी मतदान के दिन शांत नजर आए। जिले में अधिकांश मतदान केंद्रों पर सपा और भाजपा की मौजूदगी प्रभावी नजर आई।
लंभुआ के सबसे बड़े मतदान केंद्र में जहां सात हजार से ज्यादा वोट पड़ते हैं, वहां मुकाबला सपा और बसपा के बीच दिखा। इसके अलावा बसपा पूरे जिले में मजबूती से लड़ती नहीं दिखी लेकिन, दलित मतों का ज्यादातर रुझान पार्टी की तरफ ही रहा।
मुस्लिम, यादव और निषाद मतों का पूरा झुकाव पांचों विधानसभा में सपा की ओर दिखा। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी और सपा के रामभुआल के बीच बेहद कांटे का मुकाबला माना जा रहा है।
चिकित्सक हत्याकांड भी अहम फैक्टर
जिले में ब्राह्मण मतों का एक छोटा तबका लंभुआ के डॉक्टर घनश्याम तिवारी हत्याकांड से भी नाराज दिखा। इस घटना में आरोपियों का भाजपा नेताओं से कनेक्शन और अफसरों की शुरुआती लापरवाही से यह तबका नाराज नजर आया।
जिले में ब्राह्मण मतों का एक छोटा तबका लंभुआ के डॉक्टर घनश्याम तिवारी हत्याकांड से भी नाराज दिखा। इस घटना में आरोपियों का भाजपा नेताओं से कनेक्शन और अफसरों की शुरुआती लापरवाही से यह तबका नाराज नजर आया।
कितना चमत्कार करेगा मेनका का चेहरा
जिले में सांसद के तौर पर मेनका गांधी की खासी इज्जत है और उन्हें लोग अच्छा सांसद भी मानते हैं। खासकर शहरी क्षेत्र में यह प्रभाव दिखाई भी दिया। ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं पर इसका कितना असर रहा, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।
जिले में सांसद के तौर पर मेनका गांधी की खासी इज्जत है और उन्हें लोग अच्छा सांसद भी मानते हैं। खासकर शहरी क्षेत्र में यह प्रभाव दिखाई भी दिया। ग्रामीण क्षेत्र में मतदाताओं पर इसका कितना असर रहा, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।