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UP: इस सीट पर हाथी तय करेगा... कमल खिलेगा या पंजा छोड़ेगा छाप, बसपा के दांव पर सबकी टिकी नजर; ये हैं दावेदार
Mon, 08 Apr 2024 09:20 AM IST
शाहरुख खान
उदय प्रकाश सिंह, अमर उजाला, सीतापुर
उदय प्रकाश सिंह, अमर उजाला, सीतापुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 08 Apr 2024 09:20 AM IST
सार
सीतापुर संसदीय सीट पर भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। अब बसपा के दांव पर सबकी नजर टिकी हैं। बसपा के प्रत्याशी घोषित नहीं करने से फिलहाल समीकरण उलझे नजर आ रहे हैं।
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UP Lok Sabha Election 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बसपा के हाथी की चाल तय करेगी कि सीतापुर संसदीय सीट पर कमल खिलेगा या कांग्रेस का पंजा अपनी छाप छोड़ेगा। यहां का चुनावी इतिहास इसकी तस्दीक करता है। भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। बसपा ने अब तक पत्ते नहीं खोले हैं। हर किसी की नजर बसपा पर लगी है।
बसपा किस पर दांव लगाएगी, इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। सीतापुर संसदीय सीट पर बसपा ने तीन बार विजय पताका फहराया है। 2019 के चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही। इस बार चुनावी बिसात बिछने के बाद भी बसपा फिलहाल चुप है। लिहाजा, सीतापुर लोकसभा की सियासी तस्वीर अभी धुंधली है।
सीतापुर सीट से बसपा ने 1989 में पहला चुनाव लड़ा। इसमें बसपा के टिकट पर सय्यद नासिर ने किस्मत आजमाई। पहले ही चुनाव में हाथी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 1,16,680 मतों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
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1991 के चुनाव में बसपा के अजीज खान 35,670 मतों के साथ पांचवें नंबर पर रहे। 1996 के चुनाव में बसपा ने फिर ताकत दिखाई। बसपा प्रत्याशी प्रेमनाथ 1,17,791 मत हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे। प्रेमनाथ ने 1998 में फिर बसपा के टिकट पर ताल ठोंकी और 1,88,954 मत पाकर रनर रहे। बसपा ने यहां 1999 में जीत का स्वाद चखा।
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बसपा किस पर दांव लगाएगी, इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। सीतापुर संसदीय सीट पर बसपा ने तीन बार विजय पताका फहराया है। 2019 के चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही। इस बार चुनावी बिसात बिछने के बाद भी बसपा फिलहाल चुप है। लिहाजा, सीतापुर लोकसभा की सियासी तस्वीर अभी धुंधली है।
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सीतापुर सीट से बसपा ने 1989 में पहला चुनाव लड़ा। इसमें बसपा के टिकट पर सय्यद नासिर ने किस्मत आजमाई। पहले ही चुनाव में हाथी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 1,16,680 मतों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
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1991 के चुनाव में बसपा के अजीज खान 35,670 मतों के साथ पांचवें नंबर पर रहे। 1996 के चुनाव में बसपा ने फिर ताकत दिखाई। बसपा प्रत्याशी प्रेमनाथ 1,17,791 मत हासिल कर तीसरे नंबर पर रहे। प्रेमनाथ ने 1998 में फिर बसपा के टिकट पर ताल ठोंकी और 1,88,954 मत पाकर रनर रहे। बसपा ने यहां 1999 में जीत का स्वाद चखा।
एससी व पिछड़ा वर्ग के मतों के सहारे राजेश वर्मा ने 2,11,120 वोट हासिल करते हुए हाथी को दिल्ली पहुंचा दिया। 2004 के चुनाव में राजेश वर्मा ने सीट पर कब्जा बरकरार रखा। 2009 के चुनाव में बसपा ने यहां से हाथी का महावत बदल दिया, इसके बाद भी सीट पर कब्जा बनाए रखने में कामयाब रही।
कैसरजहां ने मुस्लिम व एससी वोट बैंक के सहारे जीत दर्ज की। इस चुनाव में कैसरजहां को 2,41,106 मत मिले थे। 2014 में कैसरजहां 3,66,519 पाने के बाद भी चुनाव हार गईं। वे रनर रहीं। 2019 में बसपा-सपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर नकुल दुबे मैदान में उतरे। वह 4,13,695 मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। इस बार बसपा अकेले चुनाव लड़ रही है।
भाजपा ने राजेश वर्मा पर तीसरी बार भरोसा जताया है। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने नकुल दुबे का टिकट काटकर पूर्व विधायक राकेश राठौर पर दांव लगाया है। बसपा ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इससे फिलहाल समीकरण उलझे नजर आ रहे हैं। यहां के चुनावी समीकरण काफी हद तक हाथी की चाल पर निर्भर हैं।
यह है चुनाव का गणित
सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में लगभग 28.1 फीसदी एससी-एसटी मतदाता हैं। यह वर्ग बसपा का कैडर वोट बैंक माना जाता है। इसके अलावा करीब 23 फीसदी सामान्य, 27.9 फीसदी पिछड़ा वर्ग एवं 21 फीसदी मुस्लिम मतदाता है। डेढ़ दशक तक सीतापुर सीट बसपा का अपराजेय दुर्ग रही है।
सीतापुर लोकसभा क्षेत्र में लगभग 28.1 फीसदी एससी-एसटी मतदाता हैं। यह वर्ग बसपा का कैडर वोट बैंक माना जाता है। इसके अलावा करीब 23 फीसदी सामान्य, 27.9 फीसदी पिछड़ा वर्ग एवं 21 फीसदी मुस्लिम मतदाता है। डेढ़ दशक तक सीतापुर सीट बसपा का अपराजेय दुर्ग रही है।
दो बार लगातार पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति का समीकरण बनाकर राजेश वर्मा तो एक बार मुस्लिम व एससी की जुगलबंदी से कैसरजहां ने हाथी को दिल्ली पहुंचाया है। यानी पिछड़ा वर्ग अथवा मुस्लिम प्रत्याशी बसपा के तुरुप का इक्का है। इस लिहाज से बसपा का दांव नए चुनावी समीकरण बना सकता है।
टिकट के लिए ब्राह्मण, कुर्मी, मुस्लिम व यादव कतार में
बसपा से टिकट की लाइन में ब्राम्हण, कुर्मी, मुस्लिम के अलावा यादव वर्ग के दावेदार हैं। बसपा जिलाध्यक्ष विकास राजवंशी बताते हैं कि प्रत्याशी चयन को लेकर हाईकमान मंथन कर रहा है। जिताऊ उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है। जल्द प्रत्याशी घोषित किया जा सकता है।
बसपा से टिकट की लाइन में ब्राम्हण, कुर्मी, मुस्लिम के अलावा यादव वर्ग के दावेदार हैं। बसपा जिलाध्यक्ष विकास राजवंशी बताते हैं कि प्रत्याशी चयन को लेकर हाईकमान मंथन कर रहा है। जिताऊ उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है। जल्द प्रत्याशी घोषित किया जा सकता है।