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UP: गली-गली पहुंच रहे तेंदुए...नसबंदी की है तैयारी, अकेले इस जिले में 444 संख्या; वन विभाग ने बनाई स्कीम

Sat, 03 Jan 2026 03:10 PM IST
आकाश द्विवेदी अजित बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 03 Jan 2026 03:10 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेंदुओं के बढ़ते हमलों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बिजनौर में तेंदुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालात पर काबू पाने के लिए 75 प्रतिशत तेंदुओं की नसबंदी की वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे मानव और पशुधन क्षति में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

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UP: Leopards are reaching every street... preparations are underway for sterilization; 444 leopards have been
तेंदुओं की नसबंदी का प्लान - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बहराइच, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बिजनौर समेत प्रदेश के कई इलाकों में इंसानों व मवेशियों पर तेंदुओं के हमले बढ़ते जा रहे हैं। अकेले बिजनौर में वर्ष 2025 में सितंबर तक तेंदुओं ने 30 लोगों पर हमले किए। इनमें नौ की मौत हो गई। वन विभाग की रिपोर्ट में इन हमलों को प्रभावी तरीके से रोकने के लिए तेंदुओं की 75% आबादी की नसंबदी की जरूरत बताई गई है। बता दें कि महाराष्ट्र में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी मंजूरी दी जा चुकी है।

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वन विभाग ने शासन और वन मंत्री के सामने पेश की रिपोर्ट में बताया कि अकेले बिजनौर में अगले पांच साल के भीतर तेंदुओं की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 12(बीबी) के तहत प्रदेश के मुख्य वन्यजीव वार्डन वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किसी भी वन्यजीव की जनसंख्या सीमित करने के लिए अनुमति दे सकते हैं। अनुसूची-1 में शामिल जानवरों के लिए केंद्र की अनुमति अनिवार्य है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, अगर बिजनौर में पांच साल में 50% तेंदुओं (हर साल 10%) की नसबंदी की जाती है तो भी इनकी संख्या इस अवधि में 444 से बढ़कर 990 होगी। विभाग ने 75% तेंदुओं की नसबंदी (प्रति वर्ष 15%) की सिफारिश की है ताकि पांच साल में इनकी संख्या 775 तक पहुंचकर स्थिर हो जाए। इससे मानव मृत्यु व पशुधन हानि में 80% तक कमी हो सकती है।

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तेंदुओं की नसबंदी का प्लान - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

ये है समस्या की वजह

बिजनौर जिला राजाजी और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास है। बाघों की संख्या बढ़ने के कारण तेंदुए गैर वन क्षेत्रों यानी गन्ने के खेतों की ओर स्थानांतरित हो गए हैं। बिजनौर में 49% क्षेत्र में तेदुओं को छिपने और प्रजनन की आदर्श जगह मिलती है। खेतों के पास पालतू पशुओं की उपलब्धता ने तेंदुओं के लिए भोजन की समस्या खत्म कर दी है। इसकी जनसंख्या में तेज वृद्धि हुई है।

UP: Leopards are reaching every street... preparations are underway for sterilization; 444 leopards have been
टाइगर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

446 में 326 गांव प्रभावित

बिजनौर के कुल 446 गांव में 326 गांव प्रभावित हैं। इनमें 40 गांव अत्यंत संवेदनशील और 80 गांव संवेदनशील हैं। वहीं, स्टाफ की कमी प्रबंधन की चुनौतियां पैदा कर रही है। बिजनौर में वन कर्मियों की स्वीकृत संख्या 326 है, जबकि इस समय 163 कर्मी तैनात हैं।

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वाहन के सामने खड़ा तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

एक बार में तीन शावकों को देती हैं जन्म

वन विभाग के अनुसार, बिजनौर में इस समय 444 तेंदुए हैं। इनमें 222 मादा हैं और 111 वयस्क हैं। मादा तेंदुए का प्रजनन चक्र 2 साल का है। एक बार में मादा आमतौर पर तीन शावकों को जन्म देती है। एक नर तेंदुए के पीछे 1.5 मादा का अनुपात है।

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