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UP Legislative Assembly Elections : सपा के सामने एमएलसी सीट बचाने की चुनौती
Sun, 06 Feb 2022 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 06 Feb 2022 06:03 AM IST
सार
आठ एमएलसी छोड़ चुके हैं सपा, 67 जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा के। सपा में क्षेत्रवार पंचायत प्रतिनिधियों के जातिगत समीकरण पर हो रहा मंथन।
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सपा कार्यालय में अखिलेश यादव व अन्य।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
विधानसभा चुनाव के बीच विधान परिषद प्राधिकारी क्षेत्र चुनाव का बिगुल बजने से सपा की चुनौती बढ़ गई है। एक तरफ आठ एमएलसी पार्टी छोड़ चुके हैं तो दूसरी तरफ 67 जिला पंचायत अध्यक्ष और ज्यादातर ब्लॉक प्रमुख भाजपा के हैं। ऐसे में पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। चुनावी चौसर पर जिताऊ ही नहीं, हर स्तर पर टिकाऊ उम्मीदवार उतारने की तैयारी है। इसके लिए एक टीम जिलेवार समीकरण साधने में जुटी है तो दूसरी पंचायत प्रतिनिधियों के लिए घोषणा पत्र में कुछ योजनाएं शामिल करने पर विचार कर रही है।
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चुनाव आयोग ने प्राधिकारी क्षेत्र की 35 सीटों पर चुनाव कराने का एलान किया है। अभी तक 35 में 30 सीटें सपा के पास थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव की घोषमा होते ही आठ एमएलसी भाजपा के पाले में जा चुके हैं। प्रदेश के 67 जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा अथवा उसके समर्थित हैं। इसमें अवध क्षेत्र की 13 में 13 और कानपुर- बुंदेलखंड की 14 में 13, ब्रज की 12 में 11, पश्चिम में 14 में 13 काशी क्षेत्र 12 में 10 और गोरखपुर में 10 में सात जिलों में भाजपा अथवा भाजपा समर्थिक जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
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इसी तरह ज्यादातर ब्लॉक प्रमुख भी भाजपा समर्थित हैं। ऐसे में विधानसभा परिषद प्राधिकारी क्षेत्र की सीटें बचाए रखना सपा के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसको स्वीकार करते हुए पार्टी के रणनीतिकार नए सिरे से मंथन में जुट गए हैं। सपा की एक टीम जिलेवार प्राधिकारी वोटरों के जातिगत आंकड़ों का मूल्यांकन करने में जुटी है। आकलन किया जा रहा है कि बदली परिस्थितियों में किस जाति का उम्मीदवार किस क्षेत्र में सफल हो सकता है। इतना ही नहीं, संबंधित क्षेत्र पर चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए भी अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। टीम की रिपोर्ट के बाद ज्यादातर उम्मीदवार घोषित किए जाएंगे।
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जहां की सीटें खाली, वहां ज्यादा दावेदार
सपा ने एमएलसी के लिए आवेदन मांगे हैं। उन आठ सीटों पर दो से तीन आवेदन आए हैं, जहां के एमएलसी पार्टी छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। अभी तक हमीरपुर प्राधिकारी क्षेत्र से एमएलसी रमेश मिश्रा, रामपुर से धनश्याम लोधी, सुल्तानपुर से शैलेंद्र प्रताप सिंह, झांसी से रमा निरंजन, गोरखपुर से सीपी चंद, बलिया से रविशंकर पप्पू, हाथरस से जसवंत सिंह, गौतमबुद्ध नगर से नरेंद्र भाटी पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। अब इन सीटों पर नए दावेदार सामने आए हैं। इसी तरह दूसरे क्षेत्र की सीटों पर भी कई जगह दावेदारों ने आवेदन जमा किया है।
कुछ एमएलसी के कट सकते हैं टिकट
सूत्रों का कहना है कि जिन जिलों विधानसभा चुनाव टिकट को लेकर सिर फुटौव्वल की नौबत है, वहां के एमएलसी के टिकट कट सकते हैं। इन जिलों में पार्टी विधानसभा परिषद प्राधिकारी क्षेत्र में दूसरी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतार कर सियासी समीकरण साध सकती है। बशर्ते वह जिताऊ की श्रेणी में हो। इसके पीछे रणनीति है कि विधानसभा चुनाव को लेकर जिस जाति के उम्मीदवार ज्यादा विरोध कर रहे हैं, वहां संबंधित जाति के एमएलसी उम्मीदवार को मैदान में उतार कर 8 से 10 सीटों पर गोटी बैठाई जा सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि एमएलसी उम्मीदवारों को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है। मौजूदा एमएलसी से प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने बातचीत कर उनकी इच्छा की भी जानकारी ली है। यह भी पूछा गया कि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो विकल्प क्या हो सकता है?
पंचायत प्रतिनिधियों के लिए नई योजनाओं पर विचार
सपा के घोषणा पत्र में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, पार्षद, जिला पंचायत अध्यक्ष आदि से संबंधित योजनाएं भी शामिल करने पर विचार चल रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि घोषणा पत्र में नए प्रावधानों के जरिए पंचायत प्रतिनिधियों को आकर्षित किया जा सकता है। क्योंकि वर्ष 1994 में सपा सरकार के कार्यकाल में ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष और नगर पालिका व पंचायत चेयरमैन को मानदेय देने की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2012 में सपा के सत्तासीन होने पर मानदेय में बढ़ोतरी की गई। विभिन्न संगठनों की ओर से क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीसीडी), पार्षद, सभासद और जिला पंचायत सदस्यों को भी मानदेय देने की मांग की जा रही है। सपा के विधान परिषद सदस्य हीरालाल यादव मानदेय बढ़ाने का मुद्दा सदन में भी उठाते रहे हैं।