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UP: जघन्य अपराधों में क्राइम सीन को तत्काल करना होगा सुरक्षित, एसओपी को लेकर डीजीपी ने दिए निर्देश
Sun, 14 Sep 2025 09:25 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 14 Sep 2025 09:25 PM IST
सार
हत्या, बलात्कार और पाक्सो आदि अपराध में फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने के लिए एसओपी जारी की गई है। ये एसओपी तकनीकी सेवा शाखा के निर्देशन में विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने तैयार की है।
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यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
डीजीपी राजीव कृष्ण ने क्राइम सीन मैनेजमेंट और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है, जिसमें खासकर हत्या, बलात्कार, पाक्सो आदि अपराध में क्राइम सीन को तत्काल सुरक्षित कर फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 176(3) के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी सेवा शाखा के निर्देशन में राजधानी स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने इसे तैयार किया है।
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बता दें कि एसओपी में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई है। डीजीपी ने इसका सख्ती से पालन करने और इसमें लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एसओपी के मुताबिक, ऐसे सभी अपराधों जिनमें सात साल से अधिक सजा का प्रावधान है, मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि फोरेंसिक विशेषज्ञ अपराध स्थल का निरीक्षण करें और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए। खासकर गंभीर अपराध, यौन अपराध, आतंकवाद, एनडीपीएस, हत्या, पाक्सो आदि के प्रकरणों में इस बाबत खास सावधानी बरतते हुए कार्य करना होगा। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि घटनास्थल पर पहुंचने वाली फोरेंसिक टीम के पास सभी आवश्यक उपकरण होने चाहिए।
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घटनास्थल पर केवल एक प्रवेश और निकासी मार्ग होना चाहिए। मीडिया, रिश्तेदार, स्थानीय लोगों को घटनास्थल से दूर रखा जाए। कोई भी वस्तु बिना छुए निरीक्षण किया जाए। इसी तरह डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को संकलित करने के लिए भी स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिसमें मोबाइल स्विच ऑन होने पर उसी स्थिति में छोड़ने, स्विच ऑफ होने पर ऑन नहीं करने, एयरप्लेन मोड न लगाने, इस्तेमाल करने वाले मोबाइल लॉक हटवाने को कहा गया है। इसी तरह कंप्यूटर में किसी प्रोग्राम को बंद नहीं करने, स्क्रीन की स्थिति और खुले एप्लीकेशन की फोटो लेने, हार्ड डिस्क को सीधे न निकालने को कहा गया है। इसके अलावा सभी साक्ष्यों को 24 घंटे के भीतर ई-साक्ष्य पोर्टल या सीसीटीएनएस पर अपलोड करने का निर्देश भी दिया गया है।
अफसरों की जिम्मेदारी
एसएचओ/थाना प्रभारी : अपराध स्थल सुरक्षित करना, फोरेंसिक टीम बुलाना, प्रारंभिक रिपोर्ट संकलन, अपलोड और ट्रांसफर सुनिश्चित करना।
पर्यवेक्षण अधिकारी (डिप्टी एसपी, एडिशनल एसपी, एसपी, एसएसपी एवं समकक्ष) : एसओपी का अनुपालन सुनिश्चित करना, साक्ष्य की गुणवत्ता पर निगरानी, विवेचक को मार्गदर्शन देना, अनुशासनिक नियंत्रण।