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UP: 10 लाख से ज्यादा छोटे उद्यमियों को गृहकर में बड़ी राहत, नगर निगमों के बाद सभी छोटे निकायों में लागू
Tue, 09 Jul 2024 12:34 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 09 Jul 2024 12:34 AM IST
सार
सूक्ष्म और लघु उद्यमियों का गृहकर घटाकर आवासीय के बराबर कर दिया गया है। 17 नगर निगमों के बाद सभी छोटे निकायों में भी इसे लागू किया गया है।
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- फोटो : istock
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विस्तार
सूक्ष्म और लघु उद्यमियों की वर्षों पुरानी मांग प्रदेश सरकार ने स्वीकार कर भारी राहत दी है। इस श्रेणी के उद्यमियों का गृहकर आवासीय के बराबर कर दिया गया है। यह आदेश प्रदेश के 17 नगर निगमों के बाद अब सभी नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत में भी लागू कर दिया गया है। इससे कम से कम 10 लाख छोटे उद्यमियों को फायदा होगा। ये उद्यमी अभी तक आवासीय का तीन गुना हाउस टैक्स दे रहे थे। हालांकि मध्यम श्रेणी और बड़े उद्यमियों को गृहकर का तीन गुना टैक्स देना होगा।
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उद्यमी चार साल से गृहकर को लेकर हर मंच से आवाज उठा रहे थे। उनकी दलील थी कि छोटे उद्यमियों के पास पूंजी कम होती है। प्रतिस्पर्धा के चलते फिक्स खर्च कम से कम करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसमें गृहकर उनके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं था क्योंकि उन्हें आवासीय की तुलना में तीन गुना टैक्स देना पड़ता था। ये गृहकर भी पूरी जमीन पर देय था जबकि उद्यमियों का कहना था कि बहुत सी जगह हमारे काम की नहीं होती। चारों तरफ सैटबैक होता है। ग्रीन बेल्ट होती है लेकिन खुली जमीन पर भी टैक्स भरना पड़ता था।
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नगर विकास विभाग ने अहम फैसला लेते हुए उनका बोझ काफी कम कर दिया। अब सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाइयों को उपनियम (एक) के अधीन उतना ही गृहकर देना होगा, जितना आवासीय में लिया जाता है। वहीं मध्यम व बड़े उद्योग से तय गृहकर का तिगुना लिया जाएगा।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि छोटी इकाइयों के लिए बहुत बड़ी राहत से भरा फैसला है। तीन गुना टैक्स देने को उद्यमी मजबूर थे। अगर इसे 17 नगर निगमों के बाद सभी छोटे निकायों में लागू करने से सभी इकाइयों को लाभ मिलेगा।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष मधुसूदन दादू का कहना है कि गृहकर कम करने के लिए ढाई साल से संगठन प्रयासरत था। मेहनत का नतीजा निकला और लाखों उद्यमियों का बोझ करीब 70 फीसदी तक घट गया है।
आईआईए राष्ट्रीय महासचिव आलोक अग्रवाल का कहना है कि ज्यादातर इकाइयां लीज पर हैं। उद्यमी किरायेदार हैं। उन्हें ये राहत देकर प्रदेश सरकार ने बड़ा योगदान दिया है। इसका असर प्रदेश में निर्यात और सकल घरेलू उत्पाद पर दिखाई देगा।
लघु उद्योग भारती उपाध्यक्ष रीतेश श्रीवास्तव का कहना है कि गृहकर की गणना इमारत की कीमत के 15 फीसदी रेंटल वैल्यू से की जाती है। फिर उस 15 फीसदी पर 7 फीसदी गृहकर लिया जाता है। उद्यमियों को इसका तीन गुना देना पड़ता है। इस बोझ से राहत मिल गई है।