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UP: गैंगस्टर मामले में पूर्व सांसद रिजवान जहीर को हाईकोर्ट से राहत, चार्जशीट और समन आदेश भी किए निरस्त
Tue, 02 Jun 2026 10:49 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 02 Jun 2026 10:49 PM IST
सार
जज ने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट लगाने से पहले कानून में तय जरूरी शर्तों का सही ढंग से पालन नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होना ही गैंगस्टर एक्ट लगाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
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पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बलरामपुर के पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर और उनके दामाद रमीज नेमत को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में दाखिल चार्जशीट, ट्रायल कोर्ट के संज्ञान और समन आदेश को रद्द कर दिया है।
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न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट लगाने से पहले कानून में तय जरूरी शर्तों का सही ढंग से पालन नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होना ही गैंगस्टर एक्ट लगाने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।
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तुलसीपुर थाने में 2024 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में पुलिस ने रमीज नेमत को गिरोह का सरगना और रिजवान जहीर को सदस्य बताया था। गैंग चार्ट में दो आपराधिक मामलों को आधार बनाया गया था। इनमें एक मुकदमे में दोनों के नाम थे, जबकि दूसरे हत्या के मामले में केवल रमीज नेमत आरोपी थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास भी पाया। जिस थाना प्रभारी ने 7 जुलाई 2024 को गैंग चार्ट तैयार किया था, उसी अधिकारी ने बाद में एफआईआर में लिखा कि उसे 20 जुलाई 2024 को गश्त के दौरान गिरोह की जानकारी मिली। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अविश्वसनीय माना।
हाईकोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह साबित हो कि आरोपी सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने या अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से अपराध कर रहे थे। मामले में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने यह भी माना कि जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और ट्रायल कोर्ट ने जरूरी कानूनी संतुष्टि दर्ज किए बिना कार्रवाई आगे बढ़ाई। इसी आधार पर कोर्ट ने चार्जशीट और समन आदेश रद्द कर दिए।